BJP Leader Resigns Over UGC Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर देश में माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। शुरुआत में इसे केवल उच्च शिक्षा से जुड़ा एक नीतिगत फैसला माना गया था, लेकिन अब यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव में बदल चुका है। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की मांग तेज होती जा रही है।
उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और बिहार समेत कई इलाकों में इन नियमों के असर अलग-अलग रूपों में सामने आ रहे हैं। कहीं प्रशासनिक अधिकारी नाराज होकर पद छोड़ रहे हैं, तो कहीं सत्ताधारी दल से जुड़े नेता खुलकर असहमति जता रहे हैं। इन घटनाक्रमों से यह साफ हो गया है कि विवाद अब केवल शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रहा।
बरेली से आया इस्तीफे का बड़ा संदेश
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए प्रावधानों से असहमति जताते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में कुछ सामाजिक और धार्मिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए नाराजगी जाहिर की।
किसी कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह सार्वजनिक रूप से किसी नीति के खिलाफ खड़ा होना असामान्य माना जा रहा है। इसे नौकरशाही के भीतर पनपते असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इस्तीफे के बाद कैसे होती है सरकारी प्रक्रिया?
प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नगर मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारियों का इस्तीफा पहले जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से राज्य सरकार तक भेजा जाता है। इसके बाद नियुक्ति विभाग इस पर अंतिम निर्णय लेता है।
इस प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं होती। सरकार चाहे तो इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर सकती है या फिर उसे लंबित रख सकती है, जिससे मामला लंबे समय तक चर्चा में बना रह सकता है।
नोएडा में BJP नेता का खुला विरोध
नोएडा में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी UGC के नए नियमों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इन प्रावधानों को अनुचित बताते हुए कहा कि यह नीति अन्यायपूर्ण है।
सत्ताधारी दल के भीतर से इस तरह का खुला विरोध सामने आना दुर्लभ माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के कुछ हिस्सों में भी इन नियमों को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।
मंत्री के सवालों से बचने पर बढ़ी बहस
बिहार के हाजीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय पत्रकारों के सवालों से बचते नजर आए। UGC नियमों को लेकर पूछे गए सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय उन्होंने धार्मिक नारे लगाए।

इस रवैये को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल खड़े किए हैं। कई लोगों का मानना है कि यह सरकार की असहजता को दर्शाता है।
तेज होता विरोध, सरकार पर बढ़ता दबाव
देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र संगठन, शिक्षक संघ और विपक्षी पार्टियां UGC के नए नियमों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने इन बदलावों को लेकर पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी नहीं दी, जिससे भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़े हैं।
अफसरों और राजनीतिक नेताओं के इस्तीफों के बाद यह विवाद और गहराता दिख रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार पर अब स्पष्ट और ठोस जवाब देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।















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