पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की 121 सीटों पर गुरुवार को शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हो गया। इस बार वोटिंग ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 64.64 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।
यह आंकड़ा 2020 विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 7 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से हटे नामों के बावजूद मतदान प्रतिशत में वृद्धि इस बार के चुनाव की सबसे अहम बात है।
Bihar Election Voting: 2025 में बना नया रिकॉर्ड
राज्य के 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में इस बार महिलाओं की भागीदारी ने नया उत्साह भरा। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं।
शाम छह बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 64.64% मतदान हुआ है, और अंतिम आंकड़े आने के बाद इसमें और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
अब तक 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57% वोटिंग का रिकॉर्ड सबसे अधिक था। वहीं लोकसभा चुनाव 1998 में 64.6% मतदान हुआ था, जो अब बराबर होता दिख रहा है।
2015 और 2020 में कैसा रहा मतदान प्रतिशत
| वर्ष | कुल मतदान | महिला मतदान | पुरुष मतदान |
| —- | ——— | ———– | ———– |
| 2015 | 56.88% | 60.48% | 53.32% |
| 2020 | 57.29% | 56.69% | 54.45% |
स्पष्ट है कि इस बार मतदान प्रतिशत में लगभग 7% की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले 10 वर्षों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
वोटर लिस्ट से घटे 47 लाख नाम, फिर भी बढ़ा प्रतिशत
चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान 47 लाख (करीब 6%) मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। इसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ से घटकर 7.42 करोड़ रह गई।
फिर भी मतदान प्रतिशत बढ़ना यह संकेत देता है कि वास्तविक वोट डालने वालों की संख्या लगभग समान रही, लेकिन कुल मतदाताओं की संख्या घटने से प्रतिशत स्वतः बढ़ गया।
उदाहरण के तौर पर:
अगर पहले 100 में से 60 लोगों ने वोट डाले, तो मतदान प्रतिशत 60% होता। लेकिन अगर वोटरों की संख्या घटकर 80 रह जाए और वही 60 लोग वोट डालें, तो प्रतिशत बढ़कर 75% हो जाएगा।
क्या अधिक वोटिंग सत्ता विरोधी लहर का संकेत है?
आमतौर पर यह माना जाता है कि ज्यादा मतदान सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का संकेत होता है। लेकिन हाल के वर्षों के आंकड़े इस धारणा को चुनौती देते हैं।
छत्तीसगढ़ (2008-2013) में मतदान 7% बढ़ा, फिर भी बीजेपी दोबारा सत्ता में आई।
मध्य प्रदेश (2003-2013) में मतदान 67.25% से बढ़कर 72.07% हुआ, लेकिन बीजेपी ने लगातार तीन चुनाव जीते।
इसलिए बिहार में भी उच्च मतदान को किसी एक राजनीतिक दिशा से जोड़ना जल्दबाजी होगी।
महिला मतदाता बने चुनाव का केंद्र बिंदु
इस बार की वोटिंग में महिलाओं का उत्साह उल्लेखनीय रहा। राज्य सरकार की कैश ट्रांसफर स्कीम्स और विपक्ष की हर घर नौकरी जैसी घोषणाओं ने महिलाओं को मतदान केंद्र तक लाने में अहम भूमिका निभाई है। परंतु यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह उत्साह किसके पक्ष में जाएगा — सरकार के समर्थन में या विरोध में, यह नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में हुआ रिकॉर्ड मतदान राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।
भले ही वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि के पीछे सांख्यिकीय कारण हों, लेकिन यह स्पष्ट है कि जनता में चुनाव को लेकर उत्साह और जागरूकता दोनों बढ़ी है।
अब सबकी निगाहें दूसरे चरण के मतदान और 2025 के नतीजों पर टिकी हैं।
















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