khabarhunt.in

खबर का शिकार

Bihar Election 2025: आज इन 12 मंत्रियों का भाग्य EVM में कैद, जानें कौन-कौन हैं हॉट सीट पर और क्या हैं सियासी समीकरण

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान आज यानी 11 नवंबर को जारी है। इस चरण में राज्य के 12 मंत्रियों की किस्मत EVM में बंद हो जाएगी। इनमें से एक मंत्री पिछली बार निर्दलीय विधायक थे और एक बसपा से जुड़े रहे नेता हैं, जो इस बार जदयू के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।

पहले चरण में जहां दो विधान पार्षदों ने चुनाव लड़ा था, वहीं दूसरे चरण में सभी मंत्री मौजूदा विधानसभा के सदस्य हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार जनता किसे फिर से विधानसभा भेजती है और किसे बाहर का रास्ता दिखाती है।

हॉट सीटों का सियासी समीकरण (3 बजे तक का मतदान प्रतिशत)

| विधानसभा क्षेत्र | 2020 मतदान (%) | 2025 (3 बजे तक) (%) |
| —————- | ————– | ——————- |
| बेतिया | 56.26 | 58.6 |
| हरसिद्धि | 59.45 | 60.64 |
| झंझारपुर | 56.85 | 51.79 |
| फुलपरास | 63.38 | 53.41 |
| सुपौल | 61.44 | 61.17 |
| छातापुर | 49.73 | 64.48 |
| सिकटी | 59.4 | 62.93 |
| धमदाहा | 63.38 | 64.66 |
| अमरपुर | 55.46 | 58.38 |
| चैनपुर | 64.72 | 62.72 |
| गया टाउन | 49.73 | 52.30 |
| चकाई | 61.44 | 64.15 |

मतदान प्रतिशत से साफ है कि कई सीटों पर पिछले चुनाव से ज्यादा वोटिंग हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प और कड़ा होने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस चरण की कई सीटें सत्ता का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

नीचे जानिए दूसरे चरण की प्रमुख सीटों पर उम्मीदवारों, सियासी समीकरणों और मुकाबलों का पूरा विश्लेषण

बेतिया (पश्चिम चंपारण)

भाजपा की रेणु देवी, जो बिहार की उपमुख्यमंत्री रह चुकी हैं, इस बार फिर मैदान में हैं। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी को हराया था। इस बार कांग्रेस ने चेहरा बदलते हुए वसी अहमद को प्रत्याशी बनाया है। मुकाबला सीधा एनडीए बनाम कांग्रेस का है।

2. झंझारपुर (मधुबनी)

भाजपा के नीतीश मिश्रा का सामना इस बार भी सीपीआई के राम नारायण यादव से है। पिछली बार मिश्रा ने उन्हें 41,788 मतों से हराया था। इस बार यादव को मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी के समर्थन से उम्मीद है कि समीकरण बदल सकते हैं।

3. फुलपरास (मधुबनी)

जदयू की शीला कुमारी मंडल पिछली बार कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को 10,966 मतों से हराया था। इस बार कांग्रेस ने सुबोध मंडल को टिकट दिया है। सीट पर मुकाबला फिर से त्रिकोणीय होता दिख रहा है।

4. सुपौल

जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के सामने कांग्रेस ने एक बार फिर मिनतुल्लाह रहमानी को उतारा है। पिछली बार रहमानी 28 हजार से अधिक मतों से हारे थे। जन सुराज पार्टी ने निर्दलीय रहे अनिल सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

5. छातापुर (सुपौल)

भाजपा के नीरज कुमार सिंह बबलू का मुकाबला राजद के डॉ. विपिन सिंह से है। पिछली बार विपिन सिंह करीब 20 हजार वोटों से हारे थे। इस बार जन सुराज पार्टी के अभय कुमार सिंह मुन्ना भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय बन गया है।

6. धमदाहा (पूर्णिया)

जदयू की मंत्री लेशी सिंह के सामने उनके ही पुराने सहयोगी और पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा (राजद) हैं। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी** के राकेश कुमार उर्फ बंटी यादव इस सीट पर तीसरा मोर्चा बनते नजर आ रहे हैं। मुकाबला बेहद तगड़ा है।

सिकटी (अररिया)

भाजपा के विजय कुमार मंडल का सामना वीआईपी के हरिनारायण प्रामाणिक से है। पिछली बार राजद के उम्मीदवार शत्रुघ्न प्रसाद सुमन तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार महागठबंधन ने सीट को जीतने के लिए जोर-शोर से प्रचार किया है।

8. अमरपुर (बांका)

जदयू के **जयंत राज** के सामने कांग्रेस के **जितेंद्र सिंह** हैं। पिछली बार यह सीट बेहद करीब रही थी — अंतर सिर्फ **3,114 मतों** का था। इस बार जातीय समीकरण जयंत राज के खिलाफ जाते दिख रहे हैं क्योंकि राजपूत वोटों में बिखराव की आशंका है।

चैनपुर (कैमूर)

जदयू के मंत्री मो. जम़ा खान मुश्किल में हैं। वक्फ बिल विवाद का असर उन पर पड़ रहा है। राजद ने इस सीट पर बृज किशोर बिंद को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें पिछली बार जम़ा खान ने हराया था। जन सुराज और बीएसपी के उम्मीदवारों ने मुकाबले को जटिल बना दिया है।

गया टाउन

भाजपा के डॉ. प्रेम कुमार (पूर्व मंत्री) का मुकाबला कांग्रेस के अखौरी ओंकारनाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव से है। पिछली बार का अंतर 11 हजार वोटों से ज्यादा का था। अब जन सुराज पार्टी के धीरेन्द्र अग्रवाल के उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

चकाई (जमुई)

जदयू के सुमित कुमार सिंह पिछली बार निर्दलीय के रूप में जीते थे, लेकिन इस बार वे सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार हैं। उनके सामने राजद की सावित्री देवी हैं, जो महज 581 वोटों से हारी थीं। कई निर्दलीय उम्मीदवार सुमित सिंह के वोट काट सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषण

इन सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है।

जन सुराज पार्टी कई सीटों पर किंगमेकर बन सकती है।
राजद का फोकस एनडीए के वोटबैंक में सेंध लगाने पर है।
जबकि भाजपा-जदयू गठबंधन अपने पुराने रिकॉर्ड और चेहरों पर भरोसा कर रहा है।

दूसरे चरण के परिणाम बिहार की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *