khabarhunt.in

खबर का शिकार

बाराबंकी मंदिर हादसा: करंट से दो की मौत, 30 घायल, सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया मुआवजे का ऐलान

Barabanki temple accident: Two died due to electric shock, 30 injured, CM Yogi Adityanath announced compensation

28 जुलाई की सुबह उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। सावन के तीसरे सोमवार को भक्तों से भरे श्री औसानेश्वर महादेव मंदिर परिसर में एक करंट हादसा हुआ जिसमें दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हो गए। हादसे की वजह एक टूटा हुआ हाई वोल्टेज तार बताया जा रहा है जो बंदरों के उछलने से गिर गया था। इस हादसे ने जहां श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए, वहीं प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारियों को भी उजागर किया।

हादसे का पूरा घटनाक्रम

यह दर्दनाक हादसा 28 जुलाई को तड़के 2 बजे के आसपास हुआ। सावन के तीसरे सोमवार को दर्शन के लिए भारी भीड़ श्री औसानेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ी थी। इसी दौरान, कुछ बंदर मंदिर परिसर के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन पर कूदने लगे, जिससे एक तार टूटकर मंदिर के टिन शेड पर गिर पड़ा।

जैसे ही यह हाई वोल्टेज तार शेड से टकराया, पूरे परिसर में करंट फैल गया। कई लोग इसकी चपेट में आ गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग भागने लगे, लेकिन भगदड़ मचने से हालात और बिगड़ गए। कई श्रद्धालु बेहोश होकर गिर पड़े।

मृतकों और घायलों की स्थिति

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अवधेश प्रसाद ने जानकारी दी कि कुल 29 घायलों को हैदरगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया, जिनमें से एक को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। वहीं त्रिवेदीगंज CHC में 9 श्रद्धालुओं को लाया गया, जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। बाकी सात की स्थिति स्थिर है।

इसके अतिरिक्त, छह और घायल श्रद्धालुओं को भी प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। सभी मरीजों को उचित उपचार दिया गया है और जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। बिजली विभाग को विद्युत आपूर्ति बंद करने के निर्देश दिए गए ताकि और नुकसान से बचा जा सके।

डीएम शशांक त्रिपाठी ने बताया, “श्रद्धालु सावन के तीसरे सोमवार को दर्शन करने के लिए औसानेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे थे। बंदरों के कूदने से विद्युत तार टूटकर शेड पर गिरा, जिससे 19 लोग करंट की चपेट में आए। घायल श्रद्धालुओं को हैदरगढ़ और त्रिवेदीगंज CHC में इलाज के लिए भेजा गया है। दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में है और स्थिति सामान्य है। मंदिर परिसर की साफ-सफाई और पुनर्निर्माण कार्य के आदेश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है।

पोस्ट में लिखा गया, “मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज ने जनपद बाराबंकी स्थित श्री औसानेश्वर महादेव मंदिर परिसर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी घायलों को समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराया जाए और राहत कार्यों को तत्काल प्रभाव से पूरा किया जाए। उन्होंने भगवान महादेव से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को शांति और घायलों को शीघ्र स्वस्थ लाभ प्राप्त हो।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि कई स्तर पर लापरवाही का परिणाम है। सावन के पवित्र महीने में जब मंदिरों में भारी भीड़ जुटती है, उस दौरान बिजली की लाइनें ऐसी जगहों पर कैसे खुली रह सकती हैं? क्या मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की थी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में पहले भी कई बार बिजली तारों की मरम्मत की मांग की गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंदरों की गतिविधियां आम हैं और मंदिर के आसपास विद्युत तारों का खुला होना खतरे को न्योता देने जैसा है।

हरिद्वार में भी भगदड़, 8 की मौत

दिल को झकझोर देने वाला एक और हादसा 27 जुलाई को हरिद्वार के मां मनसा देवी मंदिर में हुआ। वहां भगदड़ मचने से 8 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हो गए। यह हादसा रविवार सुबह लगभग 9 बजे हुआ जब भारी संख्या में श्रद्धालु करीब 800 सीढ़ियों को चढ़कर मंदिर पहुंच रहे थे।

हादसे की खबर मिलते ही राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी यूपी के मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की।

भविष्य के लिए सबक

इन दोनों घटनाओं ने मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, बिजली सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। हर साल सावन, कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक पर्वों के दौरान भारी संख्या में लोग मंदिरों में पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा और संरचना से जुड़ी तैयारियां पहले से होनी चाहिए।

सरकार और प्रशासन को चाहिए कि:

  • सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों का सुरक्षा ऑडिट किया जाए।
  • विद्युत विभाग को निर्देश दिए जाएं कि मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों के ऊपर से गुजरने वाले हाई वोल्टेज तारों की तुरंत मरम्मत या स्थानांतरण किया जाए।
  • बंदरों और अन्य जानवरों के खतरे को देखते हुए वायर इंसुलेशन और जाल लगाने जैसे कदम उठाए जाएं।
  • भगदड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस और आपदा प्रबंधन दल को विशेष ट्रेनिंग दी जाए।
  • मंदिर प्रबंधन समितियों को जवाबदेह बनाया जाए और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

बाराबंकी और हरिद्वार की घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि श्रद्धा के साथ सुरक्षा भी जरूरी है। जहां करोड़ों लोग आस्था के साथ धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं, वहां लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। सरकार, प्रशासन और समाज — तीनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी त्रासदियों को रोका जाए और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाए।

इन हादसों में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए हम आशा करते हैं कि यह अंतिम दुर्घटना साबित हो — न कि एक और आंकड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *