गुजरात हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2025 को सूरत रेप केस में दोषी करार दिए गए स्वयंभू संत आसाराम बापू को एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत की अवधि 21 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी है।
यह राहत चिकित्सा कारणों के आधार पर दी गई है। इससे पहले भी, आसाराम को दो बार इसी केस में अंतरिम जमानत मिल चुकी है, जिससे यह तीसरी बार का विस्तार है।
केस की पृष्ठभूमि
आसाराम कौन हैं?
- आसाराम बापू एक विवादित धार्मिक गुरु हैं, जिनका आश्रम नेटवर्क भारत और विदेशों में फैला हुआ था।
- उन्होंने 1970 के दशक से आध्यात्मिक प्रवचन शुरू किए और लाखों अनुयायी बनाए।
- लेकिन 2013 से, उन पर नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के साथ यौन शोषण, बलात्कार, और अवैध कब्जों के कई मामले दर्ज हुए।
सूरत रेप केस
- वर्ष 2013 में, सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई।
- एक बहन ने जोधपुर पुलिस में केस दर्ज कराया (जिसमें आसाराम को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद की सजा मिली)।
- दूसरी बहन ने सूरत पुलिस में केस दर्ज कराया, जिसमें आरोप था कि 2001 से 2006 के बीच आसाराम ने उसके साथ बार-बार यौन शोषण किया।
अदालत का फैसला
- 2018 में, सूरत की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने आसाराम को दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
- नारायण साईं को भी इसी केस में दोषी ठहराया गया।
- हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है।
जमानत और कानून
अंतरिम जमानत क्या है?
- अंतरिम जमानत एक अस्थायी राहत है, जो कोर्ट आरोपी/दोषी को खास परिस्थितियों में देती है।
- यह आमतौर पर सीमित समय के लिए होती है और उसके बाद आरोपी को फिर से जेल में लौटना पड़ता है, जब तक कि अवधि न बढ़ाई जाए।
चिकित्सा आधार पर जमानत
- भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 389 और 439 के तहत, अदालतें दोषी को चिकित्सा उपचार के लिए अंतरिम राहत दे सकती हैं।
- इसका उद्देश्य है कि दोषी को गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर उचित इलाज मिल सके।
2025 में जमानत की घटनाक्रम
पहली राहत
- मई 2025 में, आसाराम ने मेडिकल आधार पर जमानत मांगी, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और गठिया की गंभीर समस्या है।
- अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई और एक माह की अंतरिम जमानत दी।
दूसरी राहत
- जून 2025 में, मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि उनका इलाज अभी अधूरा है।
- इस आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत 7 अगस्त तक बढ़ा दी।
तीसरी राहत (नवीनतम आदेश)
- 7 अगस्त 2025 को, सरकारी वकील ने कहा कि मेडिकल दस्तावेजों की पुष्टि के लिए समय चाहिए।
- बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि रिपोर्ट स्पष्ट है और आसाराम को उपचार की जरूरत है।
- अदालत ने कहा कि मेडिकल रिकॉर्ड की पुष्टि तक, जमानत 21 अगस्त तक बढ़ाई जाती है।
अदालत में बहस
बचाव पक्ष की दलील
- आसाराम की उम्र 83 वर्ष है और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है।
- जेल में उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही।
- यदि उन्हें तुरंत और पर्याप्त इलाज नहीं मिला, तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।
सरकारी पक्ष का जवाब
- मेडिकल दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच ज़रूरी है, क्योंकि पहले भी कुछ कैदियों ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जमानत ली है।
- जब तक रिपोर्ट पूरी तरह सत्यापित न हो, राहत अस्थायी रूप से ही दी जानी चाहिए।
पीड़िता पक्ष की चिंताएं
- पीड़िता के वकील ने अदालत को बताया कि लगातार मिल रही अंतरिम राहत से केस की गंभीरता कम आंकने का संदेश जाता है।
- यह भी आशंका जताई गई कि आसाराम बाहर रहकर गवाहों या सबूतों पर असर डाल सकते हैं।
- हालांकि, अदालत ने शर्त रखी है कि आसाराम पीड़िता, गवाहों या केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे।
कानूनी विश्लेषण
दोष सिद्ध होने के बाद जमानत का प्रभाव
- भारतीय न्याय प्रणाली में, दोष सिद्ध होने के बाद जमानत मिलना बेहद कठिन होता है।
- हालांकि, मानवीय आधार (जैसे गंभीर बीमारी) पर अदालतें अपवादस्वरूप राहत देती हैं।
अंतरिम जमानत के दुरुपयोग का खतरा
- अतीत में कई मामलों में देखा गया है कि दोषी इलाज के बहाने बाहर निकलते हैं और केस की प्रक्रिया में देरी करते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि मेडिकल आधार पर दी गई राहत का दुरुपयोग न हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
समर्थकों की राय
- आसाराम के समर्थकों का कहना है कि वे झूठे केस के शिकार हैं और उनकी उम्र और सेहत को देखते हुए राहत मिलना न्यायसंगत है।
- कुछ ने इसे मानवाधिकार का मामला बताया।
आलोचकों की राय
- महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले से बलात्कार पीड़िताओं का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठ सकता है।
- सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या आम कैदी को भी इतनी राहत मिलती है।
जेल में आसाराम का जीवन
- जोधपुर सेंट्रल जेल और गुजरात की जेलों में आसाराम का स्वास्थ्य पहले से चिंता का विषय रहा है।
- कई बार उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- जेल प्रशासन का कहना है कि उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन उम्र और बीमारियों के कारण उनका स्वास्थ्य नाजुक है।
आगे की राह
- 21 अगस्त 2025 को अगली सुनवाई होगी।
- तब तक मेडिकल रिपोर्ट की पूरी जांच होगी और अदालत तय करेगी कि अंतरिम जमानत बढ़ाई जाए या नहीं।
- अगर रिपोर्ट में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की पुष्टि होती है, तो राहत बढ़ सकती है; वरना उन्हें वापस जेल जाना होगा।
निष्कर्ष
आसाराम को मिली यह तीसरी अंतरिम राहत न्यायिक प्रक्रिया में एक जटिल संतुलन को दर्शाती है — एक तरफ कानून की सख्ती और दूसरी तरफ मानवीय दृष्टिकोण।
यह केस सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि क्या भारतीय न्याय व्यवस्था दोष सिद्ध अपराधियों के मामले में मेडिकल जमानत का एक समान और पारदर्शी इस्तेमाल कर पाती है या नहीं।















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