जम्मू-कश्मीर इस समय दो बड़े आतंकवाद-रोधी अभियानों का केंद्र बना हुआ है। एक ओर किश्तवाड़ के दुल इलाके में रविवार तड़के शुरू हुई मुठभेड़ में 2–3 आतंकी घिरे हुए हैं, तो दूसरी ओर कुलगाम में पिछले 10 दिनों से चल रहा “ऑपरेशन अखल” आतंक के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कोशिश है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले के बाद से सुरक्षाबलों ने 20 से अधिक बड़े आतंकियों को मार गिराया है, जो घाटी में आतंकी ढांचे को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
किश्तवाड़ मुठभेड़ — पहाड़ों में घिरते कदम
घटना का समय और स्थान
किश्तवाड़ का दुल क्षेत्र ऊँचे-नीचे पहाड़ों, घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के लिए जाना जाता है। रविवार तड़के, खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली कि 2–3 आतंकी इस इलाके में सक्रिय हैं और छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टुकड़ियों ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी।
मुठभेड़ की शुरुआत
- पहला संपर्क: जैसे ही सुरक्षा बल आतंकियों के संभावित ठिकाने के पास पहुंचे, आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।
- जवाबी कार्रवाई: सेना की तरफ से कड़ा जवाब दिया गया और इलाके में भारी गोलीबारी का दौर शुरू हो गया।
- सुरक्षा घेरा: ऑपरेशन में ‘कॉर्डन एंड सर्च’ (Cordon and Search) तकनीक अपनाई गई—पहले पूरे इलाके को सील किया गया, फिर धीरे-धीरे सर्चिंग शुरू हुई।
रणनीतिक महत्व
किश्तवाड़ का दुल इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से घुसपैठ के संभावित मार्गों में शामिल है। यहाँ घिरना मतलब आतंकियों के पास भागने के रास्ते सीमित हो जाना। साथ ही, यह मुठभेड़ अमरनाथ यात्रा के संवेदनशील समय में हो रही है, जिससे सुरक्षा का महत्व और बढ़ जाता है।
कुलगाम का “ऑपरेशन अखल” — 10 दिन, लगातार दबाव
अभियान की शुरुआत
1 अगस्त 2025 को कुलगाम जिले के अखल क्षेत्र में शुरू हुआ यह ऑपरेशन अब तक 10 दिन से चल रहा है। यह घाटी के इतिहास में सबसे लंबे चलने वाले अभियानों में से एक है।
- शुरुआती दिनों में दो आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई।
- लेकिन आतंकियों की सही संख्या को लेकर सुरक्षाबलों ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
अभियान की चुनौतियाँ
- भूगोल: अखल क्षेत्र पहाड़ी और जंगलों से भरा है, जहां ड्रोन या हेलीकॉप्टर से निगरानी कठिन हो जाती है।
- मौसम: बीच-बीच में बारिश और कोहरा होने से दृश्यता कम हो जाती है।
- स्थानीय समर्थन: कुछ इलाकों में आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद मिलने की आशंका से सर्च ऑपरेशन जटिल हो जाता है।
हताहत और नुकसान
- अब तक 5 से अधिक आतंकी मारे गए हैं।
- 10 से अधिक जवान घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है।
- 2 जवानों ने ऑपरेशन के दौरान शहादत दी।
22 अप्रैल का पहलगाम हमला — इस ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
हमला कैसे हुआ?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के पास आतंकियों ने एक घात लगाकर हमला किया था, जिसमें कई जवान घायल हुए और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई। यह हमला उस समय हुआ जब पर्यटक सीजन अपने चरम पर था।
उसके बाद क्या बदला?
- इंटेलिजेंस अलर्ट: हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने आतंकियों के नेटवर्क, ठिकानों और घुसपैठ मार्गों पर बड़े स्तर पर निगरानी शुरू की।
- ऑपरेशनों में तेजी: अप्रैल से अब तक सुरक्षाबलों ने 20 बड़े आतंकियों को ढेर किया, जिनमें कई शीर्ष कमांडर भी शामिल हैं।
- लक्षित कार्रवाई: ऑपरेशन अखल और किश्तवाड़ मुठभेड़ इन्हीं इंटेलिजेंस इनपुट्स का नतीजा हैं।
आतंकवाद-रोधी रणनीति — कैसे हो रहा है “कड़ा प्रहार”?
मल्टी-एजेंसी ऑपरेशन
इन अभियानों में सेना, CRPF, जम्मू-कश्मीर पुलिस, और विशेष बल (Para SF) एक साथ काम कर रहे हैं।
- सेना: अग्रिम पंक्ति में मुठभेड़ और इलाके की घेराबंदी।
- पुलिस: इंटेलिजेंस और स्थानीय नेटवर्क से जानकारी जुटाना।
- CRPF: इलाकों की सीलिंग और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
तकनीकी मदद
- ड्रोन सर्विलांस: जंगल और पहाड़ी इलाकों में आतंकियों की लोकेशन ट्रैक करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल।
- थर्मल इमेजिंग: रात में या कोहरे में मूवमेंट पकड़ने के लिए।
- सैटेलाइट मॉनिटरिंग: सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ के प्रयास पहचानने के लिए।
आम जनता पर असर
सुरक्षा और प्रतिबंध
इन अभियानों के चलते कई इलाकों में कर्फ्यू या आंशिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
- स्कूल बंद: ऑपरेशन क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
- यातायात रोक: मुख्य सड़कों पर चेकपॉइंट्स बढ़ा दिए गए हैं।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
- समर्थन: कई स्थानीय लोग सेना की कार्रवाई को सराह रहे हैं, क्योंकि यह उन्हें आतंक के साये से मुक्त करने की कोशिश है।
- चिंता: कुछ लोग लंबे ऑपरेशनों के कारण आर्थिक गतिविधियों पर असर की चिंता जता रहे हैं।
अब तक के नतीजे
- 20 बड़े आतंकी मारे गए — अप्रैल से अगस्त तक की कार्रवाई में।
- 5 से अधिक आतंकी खत्म — ऑपरेशन अखल और किश्तवाड़ मुठभेड़ में।
- 10 जवान घायल — कुलगाम ऑपरेशन के दौरान।
- उच्च सतर्कता — अमरनाथ यात्रा और स्वतंत्रता दिवस से पहले घाटी में।
आगे की संभावनाएँ
- किश्तवाड़ ऑपरेशन में घिरे आतंकियों को जिंदा पकड़ना प्राथमिकता हो सकती है ताकि नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सके।
- कुलगाम ऑपरेशन अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है, क्योंकि इलाके का हर कोना खंगालना जरूरी है।
- आने वाले समय में घाटी के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी इसी तरह के लक्षित अभियान चलने की संभावना है।
निष्कर्ष
किश्तवाड़ और कुलगाम के ये ऑपरेशन केवल मुठभेड़ भर नहीं हैं, बल्कि यह संदेश हैं कि भारतीय सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ लंबे, कठिन और रणनीतिक संघर्ष के लिए तैयार हैं।
22 अप्रैल के पहलगाम हमले के बाद जिस दृढ़ता से आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ा गया है, वह आने वाले समय में घाटी की सुरक्षा को नए स्तर पर ले जा सकता है।















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