khabarhunt.in

खबर का शिकार

Assembly Election 2027: 2027 से पहले सियासी संग्राम तेज, भाजपा-सपा-कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान से बढ़ी संगठनात्मक चिंता

Assembly Election 2027

Assembly Election 2027: 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के भीतर आपसी प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आने लगी है। टिकट की दावेदारी और नेतृत्व की होड़ में कई नेताओं ने अपने-अपने गुट बना लिए हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू हुई यह खींचतान अब संगठन के भीतर गंभीर तनाव का कारण बनती जा रही है।

इन आंतरिक विवादों की चर्चा लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हो रही है। पार्टी हाईकमान की ओर से कई बार दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद गुटबाजी और टकराव थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

एसआईआर अभियान के जरिए सभी दलों ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मतदाता सूची दुरुस्त करने और नए मतदाता जोड़ने के लिए कमेटियों का गठन किया गया है। लेकिन इन तैयारियों के बीच नेताओं की आपसी लड़ाई पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

Assembly Election 2027

मुरादाबाद में भाजपा के भीतर कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद फिर सुर्खियों में है। विधायक ने जिला पंचायत के टेंडरों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर इस टकराव को नया मोड़ दे दिया है।

वहीं समाजवादी पार्टी में सांसद रुचिवीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट बदलने के बाद से दोनों नेताओं के बीच मतभेद गहराते चले गए। हाल के दिनों में एक पारिवारिक कार्यक्रम को लेकर हुई राजनीतिक टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया, जिसके बाद पार्टी को गाइडलाइन जारी करनी पड़ी।

कांग्रेस में भी पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली और नेता सचिन चौधरी के बीच की तनातनी लंबे समय से चर्चा में बनी हुई है। लोकसभा टिकट की दावेदारी से शुरू हुआ यह विवाद सोशल मीडिया, प्रेसवार्ताओं और सार्वजनिक बयानों तक पहुंच गया। दोनों पक्षों की ओर से की गई बयानबाजी के चलते पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्पष्टीकरण भी मांगा गया।

भाजपा, सपा और कांग्रेस तीनों ही दलों में यह स्थिति बन गई है कि एक नेता के साथ खड़े होने पर दूसरा नाराज हो जाता है। इससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है और संगठनात्मक एकता पर भी असर पड़ रहा है।

पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी नेताओं को संयम बरतने और सार्वजनिक बयानबाजी से बचने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संगठन में दरार और गहरी न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *