Harijan Girijan Word Ban: हरियाणा सरकार ने सभी सरकारी विभागों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी आधिकारिक कार्य या पत्राचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संदर्भ में केवल वही शब्द प्रयोग में लाए जाएं, जो भारत के संविधान में निर्धारित हैं।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ शब्दों का उल्लेख नहीं है। इसलिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने सभी आधिकारिक दस्तावेजों, पत्रों और अन्य कार्यों में केवल “अनुसूचित जाति” और “अनुसूचित जनजाति” शब्दावली का ही उपयोग करें।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले भी इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके थे, लेकिन इसके बावजूद कुछ विभागों में इन शब्दों का प्रयोग जारी था। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और तत्काल प्रभाव से इन शब्दों का प्रयोग बंद करने के आदेश दिए हैं।
दरअसल, हाल के समय में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें सरकारी स्तर पर ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इस पर समाज के विभिन्न वर्गों की ओर से आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी। इन्हीं शिकायतों और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है।

इसी बीच हरियाणा सरकार ने गंभीर बीमारियों से जूझ रही महिलाओं के लिए एक राहतभरा फैसला भी लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि तीसरे और चौथे चरण के कैंसर, हीमोफिलिया, थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब महिलाओं को अब दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ भी दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, अभी तक गंभीर बीमारी से पीड़ित महिलाओं को हर महीने 3200 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। अब लाडो लक्ष्मी योजना के तहत उन्हें अतिरिक्त 2100 रुपये मिलेंगे। इस तरह कुल मिलाकर उन्हें हर महीने 5300 रुपये की सहायता प्राप्त होगी।
सरकार ने यह भी बताया है कि इस राशि में से 1100 रुपये सीधे महिलाओं के बचत बैंक खाते में जमा किए जाएंगे, जबकि शेष 1000 रुपये की रकम आरडी यानी सावधि जमा खाते में ट्रांसफर की जाएगी। सरकार का उद्देश्य न सिर्फ इलाज में मदद देना है, बल्कि भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है।
इन दोनों फैसलों को सामाजिक संवेदनशीलता और कल्याणकारी नीति की दिशा में राज्य सरकार के अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
















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