सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (18 नवंबर) को 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य की जमानत याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत का कड़ा विरोध किया और पूरे मामले को सुनियोजित साजिश करार दिया।
“दंगे स्वाभाविक नहीं, पूर्व-नियोजित साजिश” — एसजी तुषार मेहता
मेहता ने अदालत को बताया कि फरवरी 2020 में हुए दंगे किसी साधारण विरोध की प्रतिक्रिया नहीं थे, बल्कि समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की सुनियोजित कोशिश थे। उन्होंने कहा कि अभियुक्तों की जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए क्योंकि—
दंगे पूर्व-नियोजित थे
CAA विरोध प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काई गई
यह घटना राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला थी
उन्होंने आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने मुकदमे की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की और आरोप तय करने की कार्यवाही में अड़चनें डालीं, इसलिए “जेल में पांच साल बिताना” जमानत का आधार नहीं हो सकता।
शरजील इमाम पर गंभीर आरोप
मेहता ने अदालत को बताया कि शरजील इमाम ने कथित तौर पर सोशल मीडिया और भाषणों के माध्यम से मुसलमानों को प्रेरित किया कि वे देशभर में ‘चक्का जाम’ करें और बड़े शहरों को ठप कर दें।
उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर गलत नैरेटिव गढ़कर युवाओं को उकसाने की कोशिश की गई।
2020 दिल्ली दंगे: मामला क्या है?
उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और रहमान पर दिल्ली दंगों के “मास्टरमाइंड” होने के आरोप में UAPA सहित गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है। फरवरी 2020 में हुई हिंसा में—
53 लोगों की मौत हुई
700 से अधिक लोग घायल हुए
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को करेगा।













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