यूपी कैबिनेट ने परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांसफर व्यवस्था मंजूर की है। अब जिले के अंदर ही शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाएगा ताकि किसी भी स्कूल में शिक्षक की कमी न रहे।
नई नीति के तहत एक जिला स्तरीय समिति इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। जिन स्कूलों में निर्धारित मानक से ज्यादा शिक्षक हैं, वहाँ से शिक्षकों को उन विद्यालयों में भेजा जाएगा जहाँ शिक्षक नहीं हैं या केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में कोई भी स्कूल ‘शून्य शिक्षक’ या ‘एकल शिक्षक’ की स्थिति में न रहे, और हर विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक उपलब्ध हों।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यू-डायस पोर्टल के डाटा के आधार पर उन स्कूलों की पहचान की जा रही है जहाँ स्टाफ की भारी कमी है।
स्थानांतरण की प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति पूरी करेगी, जिसमें सीडीओ और डायट प्राचार्य सदस्य होंगे, जबकि बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के शिक्षकों को उन्हीं क्षेत्रों में समायोजित किया जाएगा। किसी शिक्षक के स्थानांतरण, पदोन्नति या निधन से यदि कोई स्कूल खाली हो जाता है, तो समिति तत्काल वहाँ शिक्षक की नियुक्ति करेगी।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी शिक्षकों का रिकॉर्ड मानव संपदा पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के किसी भी बच्चे की शिक्षा शिक्षक की कमी के कारण प्रभावित न हो। नई व्यवस्था जल्द ही लागू कर दी जाएगी।















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