हरियाणा में हाल ही में दो पुलिसकर्मियों—एक आईपीएस अधिकारी और एक एएसआई—की आत्महत्या ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं और प्रशासनिक एवं राजनीतिक स्तर पर बहस को जन्म दिया।
जानकारी के अनुसार, आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार ने आत्महत्या से पहले आठ पेज का सुसाइड नोट लिखा। इस नोट में उन्होंने 13 पुलिस अधिकारियों पर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। इसके कुछ समय बाद एएसआई संदीप सिंह ने भी आत्महत्या कर ली और पांच पेज का नोट छोड़ा। संदीप सिंह ने अपने नोट में पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम हरियाणा में जातीय संघर्ष, व्यक्तिगत स्वार्थ और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें दर्शाता है। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि भारतीय पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में राजनीतिक दबाव और सामाजिक भेदभाव ने माहौल इतना जटिल बना दिया है कि इस तरह के दुखद परिणाम सामने आते हैं।
विशेषज्ञ राकेश शुक्ल ने बताया कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच अधिकार और जिम्मेदारी को लेकर तनाव भी इस तरह की परिस्थितियों को जन्म देता है। एक ही जिले में काम करने वाले पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के बीच सामंजस्य की कमी, और व्यक्तिगत अहंकार, दोनों की मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डालते हैं।
इस प्रकरण ने यह भी उजागर किया कि प्रशासनिक और पुलिस प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के मामलों का लगातार दबाव कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर गहरा प्रभाव डालता है।
















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