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पंजाब में व्यापार सुधार की दिशा में बड़ा कदम, राज्य व्यापारी आयोग का गठन

पंजाब सरकार ने प्रदेश में ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए राज्य व्यापारी आयोग का गठन कर दिया है। इस आयोग की अध्यक्षता आबकारी और कराधान मंत्री करेंगे। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत जिला और विधानसभा स्तर पर भी कमेटियां बनाई जाएंगी ताकि छोटे व्यापारियों की समस्याएं सीधे आयोग तक पहुंच सकें और उनका समय पर समाधान हो सके।

आयोग का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के व्यापारियों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना और व्यापारिक नीतियों के निर्माण में सरकार की मदद करना होगा। इसके गठन से व्यापारियों को 15 साल पुराने वैट मामलों के निपटारे की भी उम्मीद जगी है।

अधिसूचना के अनुसार, आयोग में किसी प्रमुख व्यापारी को वाइस चेयरपर्सन बनाया जाएगा, जबकि आबकारी और कराधान विभाग के सचिव सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा श्रम, खाद्य आपूर्ति, उद्योग, स्थानीय निकाय विभागों के प्रशासनिक सचिव, और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे।

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदीश जिंदल ने बताया कि 2011-12 से लंबित वैट मामलों के समाधान के लिए अब आयोग के ज़रिए ठोस पहल की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार कई बार नीतियां लाई, लेकिन अब तक सभी केसों का निपटारा नहीं हो पाया है।

उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी फर्जी बिलिंग के कारण पंजाब का राजस्व प्रभावित हो रहा है। हरियाणा की तुलना में पंजाब का जीएसटी कलेक्शन पहले ही कम है। कई बार व्यापारियों पर भारी जुर्माना लगा दिया जाता है, जिसके खिलाफ उन्हें सीधे कोर्ट का रुख करना पड़ता है। अब आयोग इन मामलों को लेकर भी राहत दिलाने की दिशा में काम करेगा।

बदीश जिंदल ने एडिबल ऑयल उद्योग की समस्या का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, खाने वाले तेल पर जीएसटी लागू है, जबकि ऑयल मिलों पर नहीं, जिससे कर राशि मिलों के खर्च में जुड़ जाती है और व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।

नई अधिसूचना के मुताबिक, जिला स्तरीय कमेटी में एक प्रमुख व्यापारी, असिस्टेंट लेबर कमिश्नर और स्टेट टैक्स के असिस्टेंट कमिश्नर शामिल होंगे। वहीं विधानसभा क्षेत्रीय कमेटी में व्यापारिक संघों के पदाधिकारी, सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी और राज्य कर अधिकारी सदस्य होंगे।

सरकार का मानना है कि इस नई पहल से पंजाब में व्यापारिक माहौल बेहतर होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और पुराने कर मामलों का निपटारा तेज़ी से हो सकेगा।

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