राजस्थान के जैसलमेर में हुए भीषण बस अग्निकांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। जोधपुर में इलाज के दौरान एक 10 साल के बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। वहीं,चार मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जिनकी हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है।
यह हादसा मंगलवार दोपहर उस वक्त हुआ जब जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते पूरी बस लपटों में घिर गई। मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुट गए। हादसे के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार को ही विशेष विमान से स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के साथ जैसलमेर पहुंचे थे। उन्होंने मौके का मुआयना किया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। सीएम ने पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी,जैसलमेर कलेक्टर प्रतापसिंह नाथावत, और एसपी अभिषेक शिवहरे सहित जिले के अधिकारियों से फीडबैक लिया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों को सभी मरीजों के लिए स्पेशल मेडिकल टीम तैनात करने और 24 घंटे मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गहरा दुख जताया है। पीएम मोदी ने कहा कि यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है और सरकार पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करेगी।
बुधवार को जोधपुर जिला प्रभारी मंत्री मदन दिलावर और राज्य मंत्री केके बिश्नोई ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। मंत्री दिलावर ने माना कि हादसा किसी न किसी लापरवाही का परिणाम है और कहा कि “जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
मंत्री केके बिश्नोई ने बताया कि जिन मरीजों को 50% से ज्यादा जलन हुई है, उनकी स्थिति बेहद गंभीर है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर घायलों का ड्रेसिंग के जरिए इलाज शुरू कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस घटना के बाद परिवहन विभाग को नए सुरक्षा नियम बनाने और बसों में पटाखों या ज्वलनशील सामग्री के अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदियां दोबारा न हों।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्राथमिकता घायलों की जान बचाने और उन्हें सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने की है। मुआवजे की घोषणा जांच रिपोर्ट के बाद की जाएगी।















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