बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी जनसुराज ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 65 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया गया है। इससे पहले पार्टी ने पहली लिस्ट में 51 उम्मीदवारों की घोषणा की थी। इस तरह अब तक जनसुराज ने 116 विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर दिया है।
जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी वही कर रही है, जिसका उसने वादा किया था —“समाज में जिसकी जितनी हिस्सेदारी है, उसे उतनी ही भागीदारी दी जाएगी।” उन्होंने बताया कि बिहार में अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) की आबादी सबसे अधिक है, इसलिए पार्टी ने अब तक जारी कुल सीटों में लगभग एक-तिहाई टिकट इसी वर्ग के उम्मीदवारों को दिए हैं।
पीके ने कहा कि बिहार की राजनीति के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब किसी पार्टी ने इतनी बड़ी संख्या में अतिपिछड़े वर्ग के लोगों को टिकट दिया है। उनके मुताबिक, जनसुराज का मकसद केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और बराबरी की राजनीति को स्थापित करना है।
दूसरी लिस्ट जारी करने के दौरान जनसुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने भी सभी 65 उम्मीदवारों के नामों की औपचारिक घोषणा की। पार्टी के अनुसार, उम्मीदवार चयन में जातीय संतुलन, सामाजिक विविधता और स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता दी गई है।
जनसुराज की पहली सूची में कुल 51 सीटें शामिल थीं — इनमें 7 सुरक्षित और 44 सामान्य सीटें थीं। उस सूची में अति पिछड़ा वर्ग के 17 (16 हिंदू और 1 मुस्लिम) ओबीसी के 11 सामान्य वर्ग के 9,और अल्पसंख्यक वर्ग के 7 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था। वहीं वाल्मीकिनगर विधानसभा सीट से एक अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार को भी मौका मिला था।
पार्टी का दावा है कि बिहार के हर इलाके में सामाजिक प्रतिनिधित्व और जमीनी नेतृत्व को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि जनसुराज किसी जाति या वर्ग की नहीं, बल्कि “सबकी आवाज़ और सबके विकास” की राजनीति करने आया है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले चरणों में जनसुराज किन सीटों पर उम्मीदवार उतारती है और यह नई राजनीतिक ताकत बिहार के पारंपरिक समीकरणों को कितना बदल पाती है।















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