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“पीएम मोदी के ‘विशेष दूत’ बनकर रूस पहुंचे केशव मौर्य — भगवान बुद्ध के अवशेषों से सजेगा भारत-रूस का आध्यात्मिक पुल”

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इन दिनों एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिशन पर रूस के कलमीकिया गणराज्य की राजधानी एलिस्टा पहुंचे हैं। वे यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के रूप में भारत से भगवान गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेष लेकर गए हैं।

यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को विश्व मंच पर प्रदर्शित करने वाली पहल है। नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट से विशेष पूजा-अर्चना के बाद केशव मौर्य ने रूस के लिए प्रस्थान किया था, जहां 11 से 18 अक्टूबर तक बुद्ध के अवशेषों को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा।

रूस में इस अवसर को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कलमीकिया प्रांत, जो यूरोप का एकमात्र बौद्ध बहुल इलाका है, वहां भारत से आए इस पवित्र धरोहर को देखने के लिए हजारों लोग जुट रहे हैं। इसी के साथ वहां एक भव्य बौद्ध प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।

केशव प्रसाद मौर्य के साथ भारत के 11 वरिष्ठ भिक्षुओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल है। रूस पहुंचने पर मौर्य ने कहा कि, “यह मेरे जीवन का सबसे सौभाग्यशाली क्षण है, जब मुझे भगवान बुद्ध के संदेश को विश्व तक पहुंचाने का अवसर मिला।” उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “भारत आज पूरी दुनिया को ‘युद्ध नहीं, बुद्ध’ का संदेश दे रहा है।”*

रूसी नागरिकों और बौद्ध समुदाय में भी इस आयोजन को लेकर गहरा उत्साह है। स्थानीय लोगों ने कहा कि यह आयोजन भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को नया आयाम देगा। कलमीकिया में करीब 300 साल पहले भारत से गए लोगों ने बौद्ध धर्म की नींव रखी थी, और अब एक तरह से यह यात्रा उन ऐतिहासिक रिश्तों की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन गई है।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, इस आध्यात्मिक यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच **आपसी विश्वास, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता** को और मजबूत करना है। कहा जा रहा है कि यह आयोजन भारत की उस नीति का भी प्रतीक है, जो युद्ध की जगह **बुद्ध के मार्ग** पर चलने का संदेश देती है।

आख़िर में कहा जा सकता है —
रूस की धरती पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का यह आगमन केवल श्रद्धा की बात नहीं, बल्कि यह भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक शांतिपूर्ण संदेश है —“युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए।”

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