दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक 35 वर्षीय शातिर अपराधी वीरेंद्र विमल को गिरफ्तार किया है, जिसने तीन साल पहले अदालत को यह भरोसा दिला दिया था कि वह मर चुका है। आरोपी पर चोरी और अवैध हथियार रखने के कई मामले दर्ज थे और वह बवाना थाने का वांछित अपराधी था।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) आदित्य गौतम ने बताया कि साल 2021 में अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट से बचने के लिए वीरेंद्र ने अपनी मौत का नाटक रचा। उसने दिल्ली नगर निगम से नकली मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया, जिसमें 24 अगस्त 2021 को उसकी मौत दर्ज थी। इस दस्तावेज़ के आधार पर उसके खिलाफ चल रही अदालत कार्यवाही रोक दी गई।
हालांकि, जब अपराध शाखा ने पुराने मामलों की समीक्षा की, तो मौत के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। जांच में यह खुलासा हुआ कि उस तारीख को ऐसा कोई व्यक्ति मृत नहीं हुआ था। अदालत को गुमराह करने के लिए जाली दस्तावेज़ का इस्तेमाल किया गया था।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी पर तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग शुरू की। उसकी डिजिटल गतिविधियों और फील्ड सर्विलांस के जरिए लोकेशन का पता लगाया गया और उसे गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान बायोमेट्रिक डेटाबेस और फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल करके उसकी पहचान की पुष्टि हुई।
वीरेंद्र विमल आदतन अपराधी है। वह वर्षों से चोरी, सेंधमारी और अवैध हथियारों की तस्करी में सक्रिय रहा। उसके खिलाफ बवाना थाने में चार मामले दर्ज हैं, जिनमें फैक्ट्रियों और घरों में सेंधमारी, वाहन चोरी और अवैध बंदूक रखना शामिल है। आरोपी आमतौर पर रात में अपराध करता और चोरी किए गए वाहनों का इस्तेमाल भागने के लिए करता था।
एक मामले में उसके पास से चोरी की एसयूवी भी बरामद हुई थी, जिसके बाद वह जेल गया। जेल से रिहा होने के बाद उसने दोबारा अपराध की राह पकड़ ली और कानून से बचने के लिए मौत का नाटक करना जारी रखा। अब उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया, जहां पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया।













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