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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भरत सिंह कुंदनपुर का निधन, राजस्थान की राजनीति में ईमानदारी की मिसाल थे

राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज और बेबाक छवि वाले नेता भरत सिंह कुंदनपुर का सोमवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 75 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।

लंबे समय से अस्वस्थ थे भरत सिंह

भरत सिंह पिछले करीब डेढ़ साल से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि वह लंबी खांसी और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। पहले उन्हें कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में उनकी स्थिति बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल शिफ्ट किया गया।

उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को पैतृक गांव कुंदनपुर (जिला कोटा) में किया जाएगा।

राजस्थान कांग्रेस को लगा एक और बड़ा झटका

रामेश्वर डूडी और अश्क अली टाक के निधन के बाद, कांग्रेस को एक बार फिर अपने वरिष्ठ नेता के जाने का गहरा सदमा लगा है। भरत सिंह को पार्टी में एक ईमानदार, सादगीपूर्ण और निडर नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कई बार अपनी ही सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए थे और जनहित को सर्वोपरि रखा था।

सरपंच से विधायक और मंत्री तक का सफर

भरत सिंह का जन्म 15 अगस्त 1950 को कोटा जिले की सांगोद तहसील के कुंदनपुर गांव में हुआ था।
उनका राजनीतिक जीवन ग्राम पंचायत स्तर से शुरू हुआ —

वे तीन बार सरपंच रहे।

10 साल तक सांगोद पंचायत समिति के प्रधान रहे।

2014 से 2019 तक कुंदनपुर ग्राम पंचायत के वार्ड पंच चुने गए।

राज्य राजनीति में प्रवेश के बाद उन्होंने 10वीं, 12वीं, 13वीं और 15वीं राजस्थान विधानसभा में सांगोद क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
गहलोत सरकार में उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।

कला और पर्यावरण के प्रति गहरी रुचि

भरत सिंह केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि कृषि, चित्रकला, फोटोग्राफी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी गहरी रुचि रखते थे।
वर्ष 2007 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था — उस समय राज्य में वसुंधरा राजे की सरकार थी।

परिवार और विरासत

भरत सिंह के पिता पूर्व मंत्री जुझार सिंह थे। उनके परिवार में पत्नी मीना सिंह और दो बेटे — भगवती सिंह और गंगा सिंह हैं, जो राजनीति से दूर हैं।
भरत सिंह अपने नाम के साथ अपने गांव ‘कुंदनपुर’ को जोड़ते थे, जिससे उनकी जमीन से जुड़ी पहचान झलकती थी।

राजनीति में ईमानदारी की पहचान

भरत सिंह कुंदनपुर ने अपने राजनीतिक जीवन में ईमानदारी, सादगी और जनता के प्रति जवाबदेही को हमेशा प्राथमिकता दी।
उनके निधन से राजस्थान की राजनीति ने एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता को खो दिया है, जिनकी पहचान निडरता और जनसेवा के लिए हमेशा याद की जाएगी।

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