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सरकारी इमारतों की बिगड़ती हालत पर राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी — “कुछ ढह रही हैं, कुछ में आग लग रही है”

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की सरकारी इमारतों की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि राज्य में हाल ही में हुई घटनाओं ने सरकारी भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं — “कुछ इमारतें गिर रही हैं, तो कुछ में आग लग रही है, आखिर हो क्या रहा है सरकारी भवनों के साथ?”

एसएमएस अस्पताल हादसे के बाद कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद आई, जिसमें आईसीयू में भर्ती आठ मरीजों की मौत हो गई थी। यह घटना रविवार देर रात हुई थी और इससे पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था।

झालावाड़ स्कूल हादसे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी

अदालत यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जो जुलाई में झालावाड़ जिले के सरकारी स्कूल भवन गिरने से जुड़ी थी। उस हादसे में सात छात्रों की दर्दनाक मौत हुई थी।
न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा —

> “राज्य की सरकारी इमारतों को आखिर क्या हो गया है? कुछ गिर रही हैं, कुछ में आग लग रही है।”

राज्य सरकार से सुरक्षा रोडमैप मांगा गया

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 9 अक्टूबर तक एक विस्तृत सुरक्षा रोडमैप (Safety Roadmap) अदालत में पेश करे। इस रोडमैप में यह बताया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाएगा, खासकर सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की इमारतों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार ने दी कार्रवाई की जानकारी

राज्य के महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि सरकार ने असुरक्षित स्कूल भवनों से छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है। साथ ही, इन भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा और निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा।

अदालत ने दी चेतावनी

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तो न्यायालय स्वयं हस्तक्षेप कर कठोर निर्देश जारी करेगा। अदालत ने कहा कि स्कूलों और अस्पतालों जैसी सार्वजनिक इमारतों में सुरक्षा की लापरवाही अस्वीकार्य है और इसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए।

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