
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहले से ही दर्जनों भूस्खलन जोन मौजूद थे, लेकिन इस बार मानसून के बाद नए स्थान भी खतरे के दायरे में आ गए हैं।
प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत कुल 3,594 किमी सड़कें आती हैं। इन मार्गों को चौड़ा करके यातायात सुगम बनाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन भूस्खलन, भूधंसाव और भूकटाव जैसी समस्याएं लगातार चुनौती बनी हुई हैं। अभी तक 203 भूस्खलन जोन आधिकारिक रूप से चिह्नित किए जा चुके थे, मगर इस साल मानसून के दौरान कई और जगहें भी खतरे में आ गईं।
यमुनोत्री मार्ग पर सिलाई बैंड, नारदचट्टी और फूलचट्टी में नई समस्याएं पैदा हुई हैं। बदरीनाथ मार्ग पर फरासू क्षेत्र में कटाव देखा गया है, जबकि गुलर घाटी में भी भूस्खलन की दिक्कत सामने आई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य अभियंता मुकेश परमार ने बताया कि पहले से मौजूद भूस्खलन जोनों के अलावा इस बार नए स्थान भी चिह्नित हुए हैं। इन संवेदनशील स्थलों की स्थायी ट्रीटमेंट के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि आने वाले समय में यातायात सुरक्षित और निर्बाध रहे।















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