14 अगस्त 2025, पटना – बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को एक ऐतिहासिक घोषणा की, जिसके तहत ‘जेपी सेनानी पेंशन’ को दोगुना कर दिया गया है। अब उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को, जिन्होंने जयप्रकाश नारायण आंदोलन (जेपी आंदोलन) में हिस्सा लिया था और आपातकाल (1975–77) के दौरान जेल में समय बिताया था, ₹12,000 की बजाय ₹24,000 प्रति माह पेंशन मिलेगी।
यह निर्णय बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे इसे एक बड़ा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
जेपी आंदोलन और सेनानियों की पृष्ठभूमि
जेपी आंदोलन 1974-75 के दौरान देश के सबसे बड़े जनआंदोलनों में से एक था, जिसका नेतृत्व समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने किया था।
इस आंदोलन में शामिल कई युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आपातकाल में जेल जाना पड़ा।
बिहार सरकार ने 2006 में इन सेनानियों को सम्मानित करने के लिए “जेपी सेनानी पेंशन योजना” शुरू की थी।
2006 से 2025 तक पेंशन में बदलाव
नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है कि पेंशन राशि कैसे बढ़ती रही:
| वर्ष | पेंशन राशि (₹/माह) | सरकार/मुख्यमंत्री |
|---|---|---|
| 2006 | 2,500 | नीतीश कुमार |
| 2010 | 5,000 | नीतीश कुमार |
| 2014 | 6,000 | जीतन राम मांझी |
| 2016 | 8,000 | नीतीश कुमार |
| 2018 | 10,000 | नीतीश कुमार |
| 2020 | 12,000 | नीतीश कुमार |
| 2025 | 24,000 | नीतीश कुमार |
वित्तीय असर
- वर्तमान में बिहार में करीब 4,800 जेपी सेनानी और 2,200 विधवा लाभार्थी हैं।
- पेंशन डबल होने से वार्षिक वित्तीय बोझ लगभग ₹864 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
- सरकार का कहना है कि “सम्मान की कीमत बजट से ज्यादा अहम है”।
नीतीश कुमार का बयान
“जेपी आंदोलन के सेनानियों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जवानी कुर्बान की। उनका सम्मान सिर्फ पेंशन से नहीं, बल्कि पूरे समाज में आदर्श स्थापित करके होना चाहिए। फिर भी, यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें आर्थिक सुरक्षा दें।”
लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
पेंशन डबल होने की घोषणा के बाद पटना और अन्य जिलों में सेनानियों ने जश्न मनाया।
- पटना के जेपी स्मारक पर फूल-मालाएँ चढ़ाई गईं।
- कई लाभार्थियों ने इसे “देर से मिला लेकिन ऐतिहासिक तोहफा” बताया।
राजनीतिक मायने
- बिहार चुनाव से पहले यह फैसला वरिष्ठ वोटर्स और उनके परिवारों को सीधे प्रभावित करेगा।
- विपक्ष का आरोप: “यह सिर्फ चुनावी लाभ के लिए है।”
- जदयू का दावा: “सम्मान और आभार जताना ही मकसद है।”
आगे की चुनौतियाँ
- वित्तीय प्रबंधन – इतने बड़े खर्च को लंबे समय तक बनाए रखना।
- लाभार्थी सूची का सत्यापन – फर्जी दावों को रोकना।
- योजना का डिजिटलीकरण – भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
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बिहार सरकार ने जेपी सेनानी पेंशन दोगुनी कर ₹24,000 मासिक कर दी। जानें इसका इतिहास, वित्तीय असर और राजनीतिक महत्व।
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