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AAP का आरोप: ‘बीजेपी-चुनाव आयोग की वोट चोरी की वजह कांग्रेस की खामोशी’

AAP's allegation: 'Congress' silence is the reason behind BJP-Election Commission's vote theft'

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025 — देश की राजनीति में एक और गरमागरम बहस छिड़ गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी और चुनाव आयोग द्वारा कथित “वोट चोरी” के खिलाफ कांग्रेस की खामोशी ही इसकी सबसे बड़ी वजह है। AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि कांग्रेस महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुद्दों पर तो मुखर है, लेकिन दिल्ली में हो रही “वोट चोरी” पर एक शब्द तक नहीं कह रही, जिससे उसका दोहरा रवैया सामने आता है।

प्रियंका कक्कड़ का दावा है कि कांग्रेस की इसी चुप्पी की वजह से बिहार में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Revision of Electoral Rolls – SIR) का दुरुपयोग करते हुए असली वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं और नकली वोटरों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है और चुनाव आयोग को इसमें शामिल करने की कोशिश की जा रही है।


SIR विवाद क्या है?

विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। इसमें मृत, स्थानांतरित या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं।

  • सामान्य रूप से यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होती है, लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि कुछ राज्यों में इस प्रक्रिया के नाम पर राजनीतिक लाभ के लिए हेरफेर किया जा रहा है।
  • बिहार में विपक्ष का कहना है कि लाखों वैध वोटरों के नाम बिना जांच हटाए जा रहे हैं, जबकि “फर्जी नाम” और “स्थानांतरित मतदाता” जोड़े जा रहे हैं, ताकि चुनावी नतीजों पर असर पड़े।

AAP का आरोप: कांग्रेस की खामोशी क्यों खतरनाक?

प्रियंका कक्कड़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:

“कांग्रेस महाराष्ट्र और कर्नाटक के स्थानीय मुद्दों पर तो ट्वीट और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है, लेकिन दिल्ली में बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से हो रही वोट चोरी पर एक शब्द नहीं बोलती। यह उसका दोहरा रवैया है। इसी चुप्पी की वजह से बिहार में भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हो रही है।”

AAP के मुताबिक:

  • दिल्ली में हजारों AAP समर्थक वोटरों के नाम लिस्ट से गायब कर दिए गए।
  • जिनकी उम्र और पते के दस्तावेज़ सही हैं, उन्हें भी लिस्ट से बाहर किया गया।
  • इसके खिलाफ कांग्रेस ने न तो आवाज़ उठाई, न ही चुनाव आयोग को पत्र लिखा।

कांग्रेस की चुप्पी — रणनीति या मजबूरी?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, कांग्रेस की चुप्पी कई वजहों से हो सकती है:

  1. गठबंधन समीकरण — विपक्षी INDIA गठबंधन में AAP और कांग्रेस के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। दिल्ली में MCD और लोकसभा सीटों पर तालमेल को लेकर विवाद रहा है।
  2. राजनीतिक प्राथमिकताएं — कांग्रेस फिलहाल महाराष्ट्र, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों पर फोकस कर रही है, जहां उसका सीधा मुकाबला बीजेपी से है।
  3. SIR मुद्दे की जटिलता — कांग्रेस शायद मानती है कि वोटर लिस्ट संशोधन एक तकनीकी मामला है, जिस पर अधिकतर जनता का ध्यान नहीं जाता, इसलिए इसे चुनावी मुद्दा बनाने का लाभ सीमित होगा।

बिहार में बढ़ता विवाद

बिहार में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्ताधारी NDA के बीच टकराव बढ़ गया है।

  • विपक्ष का दावा — लाखों वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में।
  • NDA का जवाब — फर्जी वोटरों और मृत लोगों के नाम हटाना ज़रूरी है, ताकि चुनाव पारदर्शी हों।

AAP का कहना है कि बिहार में जो हो रहा है, वह दिल्ली के मॉडल की कॉपी है, जहां पहले से वोटर लिस्ट में बदलाव कर सत्ता के पक्ष में माहौल बनाया गया।


चुनाव आयोग की स्थिति

चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह से कानून और तय नियमों के तहत हो रही है। आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि हर बदलाव की पब्लिक नोटिस के जरिए जानकारी दी जाए और मतदाताओं को आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिले।

लेकिन AAP और कुछ अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि कई जगह पब्लिक नोटिस केवल कागजों में दिए जा रहे हैं, और नाम हटाने/जोड़ने की कार्रवाई जमीनी स्तर पर बिना पारदर्शिता के हो रही है।


दिल्ली का अनुभव और AAP की नाराज़गी

दिल्ली में 2024 लोकसभा चुनाव से पहले AAP ने दावा किया था कि लाखों वोटरों के नाम हटाए गए, जिनमें से बड़ी संख्या में AAP समर्थक थे।

  • AAP ने कई बार चुनाव आयोग से शिकायत की, लेकिन आयोग ने आरोपों को खारिज किया।
  • अब जब बिहार में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है, AAP इसे “चुनावी साजिश” बता रही है।

प्रियंका कक्कड़ ने कहा:

“अगर कांग्रेस चुप रही, तो कल महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान में भी यही होगा। यह सिर्फ़ AAP का नहीं, लोकतंत्र का मुद्दा है।”


सोशल मीडिया पर बहस

ट्विटर (X) और फेसबुक पर #VoteChori, #SIRControversy और #CongressSilence जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

  • AAP समर्थक कांग्रेस को “मूक दर्शक” कह रहे हैं।
  • कांग्रेस समर्थक कह रहे हैं कि AAP गठबंधन में रहते हुए भी कांग्रेस पर अनावश्यक हमले कर रही है, जिससे केवल बीजेपी को फायदा होगा।
  • कुछ न्यूट्रल यूजर्स का कहना है कि दोनों पार्टियां जनता के असली मुद्दों से ध्यान हटाकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं।

राजनीतिक निहितार्थ

  1. विपक्षी एकजुटता पर असर — INDIA गठबंधन में यह विवाद दरार को और गहरा कर सकता है।
  2. बीजेपी का लाभ — विपक्षी पार्टियों के आपसी आरोप-प्रत्यारोप से बीजेपी को नैरेटिव सेट करने का मौका मिल सकता है।
  3. लोकसभा चुनाव 2026 की तैयारी — अगर वोटर लिस्ट विवाद बढ़ा, तो यह चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

निष्कर्ष

AAP और कांग्रेस के बीच यह तकरार केवल दिल्ली या बिहार तक सीमित नहीं है। यह विपक्षी गठबंधन की मजबूती, चुनावी रणनीतियों और लोकतंत्र की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल है।

  • अगर विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट नहीं होते, तो बीजेपी और उसके सहयोगियों के लिए राजनीतिक मैदान आसान हो सकता है।
  • वहीं, अगर SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी नहीं बढ़ाई गई, तो मतदाता विश्वास पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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