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कैसे पता करें कि आपके नाम पर डुअल वोटर कार्ड हैं? तेजस्वी–विजय सिन्हा जैसी मुश्किल से बचें

How to find out if you have dual voter cards in your name? Avoid problems like Tejashwi-Vijay Sinha

परिचय – मामला क्यों सुर्खियों में है?

हाल ही में बिहार की राजनीति में हलचल तब मच गई, जब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के नाम पर डुअल वोटर कार्ड होने का मामला सामने आया। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। यह केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी मामला भी है — क्योंकि दो वोटर कार्ड रखना भारत में अपराध है


डुअल वोटर कार्ड क्या है और क्यों अपराध है?

भारत के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत हर नागरिक के पास सिर्फ एक वोटर कार्ड होना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के पास —

  • अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दो वोटर कार्ड हैं
  • या एक ही क्षेत्र में अलग-अलग नंबर वाले वोटर कार्ड हैं

तो यह “डुप्लीकेट” या “डुअल वोटर कार्ड” माना जाएगा।

कानूनी प्रावधान:

  • धारा 17 और 18, RPA 1950 – डुअल रजिस्ट्रेशन प्रतिबंधित
  • धारा 31, RPA 1950 – गलत जानकारी देने पर 6 महीने की जेल या जुर्माना या दोनों

तेजस्वी–विजय सिन्हा केस का संदर्भ

  • तेजस्वी यादव – विपक्ष के नेता पर आरोप लगा कि उनके नाम का वोटर कार्ड दो जगह पंजीकृत है — एक पटना में और एक दिल्ली में।
  • विजय कुमार सिन्हा – विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर भी दो मतदाता पहचान पत्र होने की शिकायत हुई।

दोनों नेताओं ने दावा किया कि यह तकनीकी गलती है और वे चुनाव आयोग के नियमों का पालन करेंगे।
लेकिन इस विवाद ने जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया — “क्या हमारे नाम पर भी ऐसा तो नहीं?”


क्यों होता है डुप्लीकेट वोटर कार्ड का मामला?

डुअल वोटर कार्ड कई कारणों से बन सकता है:

  1. पता बदलना:
    नए पते पर वोटर कार्ड बनवाते समय पुराने पते की एंट्री कैंसिल नहीं कराना।
  2. ऑनलाइन-ऑफलाइन मिसमैच:
    अलग-अलग फॉर्म भरने से डुप्लीकेट एंट्री हो जाना।
  3. मानव त्रुटि:
    बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या डेटा एंट्री में गलती।
  4. जानबूझकर धोखाधड़ी:
    एक व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज कराना ताकि दो बार वोट डाल सके — यह गंभीर अपराध है।

खुद कैसे चेक करें — स्टेप बाय स्टेप गाइड

A. ऑनलाइन तरीका

  1. राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) पर जाएँ – https://www.nvsp.in
  2. Search in Electoral Roll विकल्प पर क्लिक करें।
  3. नाम, पिता/पति का नाम, उम्र, राज्य, जिला दर्ज करें।
  4. अगर आपका नाम एक से ज्यादा जगह पर दिख रहा है — तो आपके नाम पर डुअल वोटर कार्ड है।

B. वोटर हेल्पलाइन ऐप से

  1. गूगल प्ले स्टोर/एप स्टोर से Voter Helpline App डाउनलोड करें।
  2. “Search Your Name in Electoral Roll” सेक्शन में जानकारी भरें।
  3. अगर एक से ज्यादा एंट्री दिखे — तुरंत कार्रवाई करें।

C. BLO या ERO ऑफिस में

  • अपने मतदान क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क करें।
  • वे आपको Form 7 भरवाकर डुप्लीकेट एंट्री कैंसिल कर देंगे।

डुप्लीकेट मिलने पर क्या करें?

  1. Form 7 भरें:
    • NVSP पोर्टल या BLO से फॉर्म लें।
    • यह फॉर्म डिलीशन (नाम हटाने) के लिए है।
  2. सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट दें:
    • आधार कार्ड, नया पता, वोटर आईडी की कॉपी।
  3. ऑनलाइन स्टेटस ट्रैक करें:
    • NVSP या Voter Helpline App में देखें कि डुप्लीकेट एंट्री हट गई है या नहीं।

अगर अनदेखा किया तो?

  • कानूनी कार्रवाई: 6 महीने तक की जेल या ₹1000 तक जुर्माना
  • मतदान रद्द: अगर डुअल कार्ड पकड़ा गया, तो वोट डालने का अधिकार रद्द हो सकता है
  • पासपोर्ट, सरकारी नौकरी में दिक्कत: बैकग्राउंड वेरिफिकेशन में नाम आने पर परेशानी

सावधानियाँ – ताकि भविष्य में डुअल वोटर कार्ड न बने

  • पता बदलने पर Form 6 से नए क्षेत्र में नाम जुड़वाएँ और Form 7 से पुराने क्षेत्र से नाम हटवाएँ।
  • BLO द्वारा दी गई डिटेल्स को क्रॉस-चेक करें।
  • वोटर लिस्ट में हर साल अपना नाम चेक करें।

निष्कर्ष

तेजस्वी यादव और विजय सिन्हा का मामला यह याद दिलाता है कि डुअल वोटर कार्ड सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि कानूनी अपराध है। यह आपकी जिम्मेदारी है कि आपके नाम पर सिर्फ एक ही वोटर आईडी हो। चुनाव आयोग ने इसके लिए आसान ऑनलाइन और ऑफलाइन सुविधाएँ दी हैं।

जनहित में संदेश:
“एक मतदाता – एक वोटर कार्ड” ही लोकतंत्र की सच्ची ताकत है।

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