khabarhunt.in

खबर का शिकार

हैदराबाद में बारिश के बीच नाले में गिरा डिलीवरी बॉय — TGPWU का आरोप: “सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी”

Delivery boy falls into drain amid rain in Hyderabad — TGPWU alleges: “Not just an accident, but a failure of the system”

घटना का संक्षिप्त विवरण

हैदराबाद में सोमवार शाम भारी बारिश के बीच एक 26 वर्षीय डिलीवरी बॉय फरहान अहमद नाले में गिर गया। गनीमत रही कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और तेज़ रेस्क्यू से उसकी जान बच गई।
लेकिन यह मामला केवल एक हादसे तक सीमित नहीं रहा — तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने इसे गिग इकॉनमी में काम कर रहे हज़ारों डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा की अनदेखी का प्रतीक बताते हुए तीखे सवाल उठाए हैं।

TGPWU के प्रतिनिधि का कहना था:

“यह सिर्फ़ एक हादसा नहीं है, यह प्लेटफॉर्म कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की सुरक्षा पर मुनाफे को प्राथमिकता देने का सीधा नतीजा है। खुदा ने फरहान को जीवनदान दिया, लेकिन हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं होता।”


कैसे हुआ हादसा?

  • सोमवार शाम लगभग 7 बजे, हैदराबाद के टोलिचौकी इलाके में तेज़ बारिश हो रही थी।
  • फरहान, जो एक प्रमुख फूड डिलीवरी ऐप के लिए काम करता है, ऑर्डर देने के लिए बाइक पर निकला था।
  • बरसाती पानी से सड़क पर जलभराव हो गया और नाले का किनारा पानी में छिप गया।
  • गड्ढे और नाले की गहराई का अंदाज़ा न लग पाने के कारण, फरहान बाइक समेत नाले में गिर गया।

स्थानीय निवासी मोहम्मद अली, जिन्होंने रेस्क्यू में हिस्सा लिया, बताते हैं:

“हमने चीख सुनी और तुरंत दौड़े। पानी का बहाव तेज़ था, लेकिन दो-तीन लोगों ने मिलकर उसे पकड़ लिया। वरना 5 सेकंड भी देर होती तो कुछ भी हो सकता था।”


फरहान की हालत

फरहान को हल्की चोटें और घुटने में फ्रैक्चर आया। फिलहाल वह निजी अस्पताल में भर्ती है।
उसने बताया:

“ऐप पर ऑर्डर कैंसिल करने का ऑप्शन था, लेकिन अगर मैं डिलीवर नहीं करता, तो पेमेंट कट जाता और रेटिंग भी गिर जाती। उसी डर में मैं निकल पड़ा।”


TGPWU की प्रतिक्रिया और आरोप

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के अध्यक्ष शेख सलीम का बयान:

  1. सुरक्षा गाइडलाइंस की कमी:
    कंपनियां मॉनसून सीजन में डिलीवरी पार्टनर्स को सुरक्षा प्रशिक्षण या अलर्ट नहीं देतीं।
  2. ‘नो डिलीवरी – नो पे’ का दबाव:
    अगर कोई पार्टनर खराब मौसम में ऑर्डर कैंसिल करता है, तो उसे आर्थिक नुकसान और रेटिंग गिरने का डर रहता है।
  3. बीमा कवरेज की अपर्याप्तता:
    प्लेटफॉर्म कंपनियों के पास नाम मात्र का इंश्योरेंस होता है, जो कई बार ऐसे हादसों में लागू ही नहीं होता।

गिग इकॉनमी और सुरक्षा का प्रश्न

भारत में गिग वर्कर्स (खासकर डिलीवरी बॉय) का नेटवर्क लगभग 77 लाख लोगों का है, जिसमें बड़ी संख्या फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स डिलीवरी से जुड़ी है।
चुनौतियां:

  • अस्थायी रोजगार: न तो स्थायी कॉन्ट्रैक्ट, न ही तय वेतन।
  • जोखिम का भार: ट्रैफिक, मौसम और अपराध — सबका जोखिम वर्कर पर।
  • बीमा और मेडिकल कवरेज: अक्सर अधूरा और सीमित।

हैदराबाद में बरसात का खतरा

हैदराबाद में मॉनसून सीजन में औसतन 700 मिमी बारिश होती है, लेकिन 2025 में अब तक 15% अधिक बारिश दर्ज हुई है।

  • कई जगहों पर नाले और ड्रेनेज ओवरफ्लो हो जाते हैं।
  • जलभराव से सड़कें और फुटपाथ खतरनाक हो जाते हैं।
  • गिग वर्कर्स, जो ऑर्डर समय पर डिलीवर करने की होड़ में रहते हैं, इन परिस्थितियों में सबसे अधिक जोखिम झेलते हैं।

प्लेटफॉर्म कंपनियों की प्रतिक्रिया

हादसे के बाद, संबंधित डिलीवरी ऐप ने एक संक्षिप्त बयान जारी किया:

“हम अपने डिलीवरी पार्टनर की सुरक्षित रिकवरी की कामना करते हैं और सभी गिग पार्टनर्स की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। मामले की आंतरिक जांच की जा रही है।”

हालांकि, यूनियन का कहना है कि यह प्रतिक्रिया सिर्फ औपचारिकता है और असल सुधार ज़मीनी स्तर पर नहीं दिखता।


अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

दुनिया के कई देशों में, गिग वर्कर्स के लिए मौसम आधारित सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं:

  • कनाडा: बर्फबारी या भारी बारिश में ऑर्डर ऑटो-कैंसिल हो जाते हैं और वर्कर को फुल पेमेंट मिलती है।
  • ऑस्ट्रेलिया: कंपनियां वर्कर को रेन गियर, वॉटरप्रूफ बैग और हाई-विजिबिलिटी जैकेट देती हैं।
  • यूरोप: स्थानीय सरकारें खतरनाक मौसम में डिलीवरी पर अस्थायी रोक लगा सकती हैं।

TGPWU की मांग है कि भारत में भी ऐसे नियम लागू हों।


सरकार और नीति निर्माण की भूमिका

तेलंगाना सरकार ने 2024 में गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इसका पूरा क्रियान्वयन नहीं हुआ।
यूनियन का कहना है:

  • आपातकालीन बीमा फंड बनाया जाए।
  • मौसम अलर्ट आधारित डिलीवरी रोक का प्रावधान हो।
  • सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य हो।

जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

हैशटैग #ProtectGigWorkers और #HyderabadRains ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करने लगे।
कई यूजर्स ने लिखा कि “डिलीवरी के लिए अपनी जान जोखिम में डालना पड़ता है, ये व्यवस्था की विफलता है।”
कुछ लोगों ने फरहान के इलाज के लिए क्राउडफंडिंग अभियान भी शुरू किया।


निष्कर्ष: हादसे से सीख

फरहान अहमद की जान बच गई, लेकिन यह घटना बताती है कि गिग इकॉनमी में काम करने वालों के लिए सुरक्षा कोई प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक “बाद में सोचने वाली” चीज़ बन गई है।
TGPWU की मांगें सिर्फ एक संगठन की बातें नहीं, बल्कि हज़ारों वर्कर्स की ज़रूरतें हैं — और अगर इन्हें अनदेखा किया गया, तो अगली बार कोई फरहान इतना भाग्यशाली नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *