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उत्तरकाशी में ‘ऑपरेशन जिंदगी’ – धराली और हर्षिल में राहत की नई उम्मीद, 1126 लोगों को मिली जिंदगी

‘Operation Zindagi’ in Uttarkashi – New hope of relief in Dharali and Harshil, 1126 people got life

छठे दिन की सुबह – आसमान साफ, उम्मीदें जागीं

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में चल रहा ‘ऑपरेशन जिंदगी’ अब अपनी रफ्तार पकड़ चुका है।

  • पिछले कई दिनों से लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण राहत कार्य बाधित थे।
  • लेकिन छठे दिन मौसम साफ होने के बाद हर्षिल और धराली से हवाई रेस्क्यू फिर शुरू हो गया।
  • अब तक 1126 लोग सुरक्षित निकाले जा चुके हैं

आपदा की शुरुआत – कैसे फंसे इतने लोग?

यह संकट अचानक नहीं आया।

  • 4 अगस्त 2025 को भारी बारिश और भूस्खलन से उत्तरकाशी के कई इलाके कट गए।
  • गंगोत्री नेशनल हाइवे के कई हिस्से ध्वस्त हो गए, पुल टूट गए और गांवों का संपर्क टूट गया।
  • हर्षिल, धराली, और आस-पास के दर्जनों गांवों में हजारों लोग फंस गए – जिनमें पर्यटक, स्थानीय निवासी और तीर्थयात्री शामिल थे।

रेस्क्यू के शुरुआती दिन – संघर्ष और चुनौतियां

  • पहले दो दिन लगातार बारिश के कारण हेलिकॉप्टर नहीं उड़ सके।
  • सड़कें टूटीं, पहाड़ी दरकने का खतरा बढ़ा, और मलबे में फंसी गाड़ियां हिलाना मुश्किल था।
  • राहत दल को पैदल ट्रेकिंग करके दूर-दराज के गांवों तक पहुंचना पड़ा।

‘ऑपरेशन जिंदगी’ – नाम और मंशा

उत्तराखंड सरकार ने इस राहत अभियान को ‘ऑपरेशन जिंदगी’ नाम दिया, क्योंकि यह सिर्फ रेस्क्यू नहीं, बल्कि जीवन को बचाने की जंग है।

  • इसमें सेना, वायुसेना, ITBP, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं।
  • हेलिकॉप्टर, बोट, अस्थायी पुल और रोप-वे जैसी सभी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आज की बड़ी उपलब्धियां

  1. हर्षिल में बिजली बहाल – पांच दिन के अंधेरे के बाद गांव में रोशनी लौटी।
  2. धराली में तेज रेस्क्यू – हेलिकॉप्टर से लगातार उड़ानें भरकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाया जा रहा है।
  3. लिमचीगाड़ पुल तैयार – सड़क मार्ग से राहत सामग्री भेजना आसान हुआ।

अब तक के आंकड़े

  • 1126 लोग सुरक्षित निकाले गए।
  • 600 से ज्यादा लोगों को हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।
  • बाकी को सड़क और पैदल रास्तों से निकाला गया।
  • 50 से ज्यादा घायल – जिनका इलाज उत्तरकाशी और देहरादून के अस्पतालों में चल रहा है।

रेस्क्यू की तकनीक और रणनीति

रेस्क्यू ऑपरेशन को चार चरणों में बांटा गया है –

  1. फंसे लोगों की लोकेशन ट्रैकिंग – ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी से।
  2. जरूरी सामान की सप्लाई – भोजन, पानी, दवाइयां, कंबल।
  3. इमरजेंसी मेडिकल रेस्क्यू – गंभीर रूप से घायल लोगों को पहले निकालना।
  4. जनरल इवैक्यूएशन – सभी फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना।

हवाई रेस्क्यू की चुनौतियां

  • तेज हवाएं और पहाड़ी इलाके में सीमित लैंडिंग पॉइंट
  • एक हेलिकॉप्टर एक बार में औसतन 5 से 8 लोगों को ही ले जा सकता है।
  • कई बार मौसम अचानक बिगड़ने पर उड़ानें रोकनी पड़ीं।

जमीनी राहत कार्य

  • ITBP और SDRF ने पैदल राहत मार्ग खोले।
  • अस्थायी पुल और रस्सी के झूले (ट्रॉली) से नदी पार कराई जा रही है।
  • स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में शामिल हैं, जो राहत दल को मार्गदर्शन और मदद दे रहे हैं।

पीड़ितों की कहानियां – जिंदा बचने की जंग

1. धराली के मोहन सिंह

“हम पांच दिन से एक ही जगह फंसे थे। खाने के लिए बस बिस्किट और पानी था। हेलिकॉप्टर आया तो लगा जैसे जिंदगी लौट आई।”

2. दिल्ली से आई पर्यटक राधा मिश्रा

“पहली बार उत्तराखंड आई थी, लेकिन जो देखा वह डरावना था। NDRF के जवानों ने हमें सुरक्षित निकाला, हम उनका जीवनभर धन्यवाद करेंगे।”


CM धामी की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज उत्तरकाशी पहुंचकर –

  • रेस्क्यू की प्रगति का जमीनी निरीक्षण करेंगे।
  • राहत शिविरों में जाकर पीड़ितों से बातचीत करेंगे।
  • प्रशासन को निर्देश देंगे कि कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे

भविष्य की चुनौतियां

  • कई दूरस्थ गांवों में अभी भी लोग फंसे हैं।
  • सड़क बहाली में कम से कम 1-2 सप्ताह लग सकते हैं।
  • भूस्खलन का खतरा बरकरार है।

राहत शिविर – सुरक्षित ठिकाना

  • उत्तरकाशी, भटवाड़ी और बड़कोट में राहत शिविर बनाए गए हैं।
  • यहां लोगों को भोजन, कपड़े, प्राथमिक चिकित्सा और मानसिक सहारा दिया जा रहा है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

आपदाओं में फंसे लोग अक्सर –

  • PTSD (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) का शिकार हो सकते हैं।
  • बच्चों में डर और चिंता बढ़ सकती है।
  • इसलिए राहत शिविरों में मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी दी जा रही है।

सोशल मीडिया और मदद की अपील

  • #OperationZindagi और #UttarkashiRescue ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं।
  • लोग राहत सामग्री, दान और स्वयंसेवा के लिए आगे आ रहे हैं।
  • कई NGOs मौके पर पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं।

प्राकृतिक आपदाओं से सबक

यह आपदा एक बार फिर याद दिलाती है कि –

  • पहाड़ी राज्यों में डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान हमेशा तैयार रहना चाहिए।
  • मौसम की सटीक भविष्यवाणी और अलर्ट सिस्टम मजबूत होना जरूरी है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर को भूस्खलन और बाढ़-रोधी डिज़ाइन के साथ बनाना होगा।

निष्कर्ष

‘ऑपरेशन जिंदगी’ सिर्फ एक राहत अभियान नहीं, बल्कि इंसानियत और साहस की कहानी है।

  • यह दिखाता है कि जब जान बचाने का सवाल हो, तो सरकार, सेना और आम लोग कैसे एक साथ आ सकते हैं।
  • अभी भी कुछ लोग फंसे हैं, लेकिन रेस्क्यू की रफ्तार और मौसम का साथ उम्मीद जगा रहा है कि जल्द ही सभी सुरक्षित होंगे।

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