जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। 2 अगस्त 2025 को कुलगाम जिले के मुडेरगाम गांव में सुरक्षाबलों ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए तीन आतंकियों को ढेर कर दिया। यह मुठभेड़ बीती रात शुरू हुई थी और सुबह तक जारी रही। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिले।
यह ऑपरेशन न केवल एक सैन्य सफलता है, बल्कि यह कश्मीर घाटी में लगातार सक्रिय हो रहे हाइब्रिड आतंकवाद और सीमा पार प्रायोजित घुसपैठ के खिलाफ एक ठोस जवाब भी है।
घटना का क्रमवार विवरण
खुफिया सूचना से शुरू हुआ ऑपरेशन
1 अगस्त की देर शाम सुरक्षाबलों को विश्वसनीय खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि कुलगाम जिले के मुडेरगाम गांव में तीन से चार संदिग्ध आतंकी छिपे हुए हैं। जानकारी के अनुसार ये आतंकी हाल ही में दक्षिण कश्मीर में कुछ गतिविधियों में शामिल रहे थे और स्थानीय संपर्कों के माध्यम से पनाह ले रहे थे।
रात 10 बजे ऑपरेशन शुरू
जानकारी मिलते ही सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स, CRPF की 18वीं बटालियन, और कुलगाम पुलिस की एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र को घेर लिया। स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पूरे इलाके की बिजली काट दी गई और गांव की ओर आने-जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया।
पहली मुठभेड़ – सुबह 4 बजे
सुबह करीब 4 बजे एक संदिग्ध मकान से फायरिंग शुरू हुई, जिसका सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। पहले घंटे में एक आतंकी मारा गया, जिसके शव को तुरंत बरामद कर लिया गया। सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया क्योंकि अन्य आतंकियों के छिपे होने की आशंका बनी हुई थी।
दूसरी टुकड़ी की घेराबंदी – सुबह 7:30 बजे
सेना ने तकनीकी सर्विलांस और ड्रोन की मदद से दो और आतंकियों की लोकेशन को पिन-पॉइंट किया। करीब 8 बजे के आसपास दोबारा गोलीबारी शुरू हुई। यह मुठभेड़ करीब 45 मिनट तक चली, जिसमें दो और आतंकी मारे गए।
ऑपरेशन समाप्त – सुबह 9:30 बजे
तीनों आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे गांव की तलाशी ली और ऑपरेशन को समाप्त घोषित किया। गांव के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें उनके घरों से बाहर निकलने की अनुमति दी गई।
मारे गए आतंकियों की पहचान
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, तीनों आतंकी स्थानीय कश्मीर घाटी से ही ताल्लुक रखते थे और हाल ही में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के संपर्क में आए थे।
- अब्दुल हसीब भट्ट – शोपियां का निवासी, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हाइब्रिड आतंकी
- रईस नजीर लोन – कुलगाम का रहने वाला, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा
- शाकिब डार – पुलवामा का निवासी, हाल ही में सोशल मीडिया के ज़रिए रैडिकलाइज़ हुआ था
तीनों पर पहले से पुलिस रिकॉर्ड में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दर्ज थी। पुलिस का कहना है कि ये लोग आम नागरिकों को धमकाने और सेना पर हमले की योजना बना रहे थे।
क्या है हाइब्रिड आतंकवाद?
इस ऑपरेशन में मारे गए आतंकियों की प्रोफाइल एक बार फिर कश्मीर में उभरते हाइब्रिड आतंकवाद की ओर इशारा करती है। हाइब्रिड आतंकी वो होते हैं जो दिखने में आम नागरिक होते हैं – छात्र, दुकानदार या ट्रांसपोर्टर – लेकिन गुपचुप तरीके से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
इनका नेटवर्क सीमित समय के लिए सक्रिय होता है, जिससे इन्हें पहचानना बेहद मुश्किल होता है। यही कारण है कि खुफिया इनपुट और त्वरित कार्रवाई इनपर लगाम लगाने के लिए अनिवार्य हो गया है।
तकनीकी सहायता और सैन्य रणनीति
इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे सिर्फ साहस ही नहीं, बल्कि तकनीकी और सामरिक श्रेष्ठता भी अहम रही।
1. ड्रोन और थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल
रात के समय दृश्यता कम होने के बावजूद, थर्मल इमेजिंग कैमरों और ड्रोन से संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की गई। इससे सेना को आतंकियों के मूवमेंट का सटीक अंदाज़ा लगा।
2. नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता
सेना और पुलिस ने सुनिश्चित किया कि मुठभेड़ स्थल से आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। कोई भी ह्यूमन शील्ड या कोलैटरल डैमेज की घटना नहीं हुई – जो इस ऑपरेशन की पेशेवर सफलता दर्शाती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और तनाव की स्थिति
ऑपरेशन के बाद कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन या पत्थरबाजी की आशंका से निपटा जा सके।
हालांकि, इस बार स्थानीय लोगों में व्यापक प्रतिक्रिया नहीं देखी गई, जो कि घाटी में बदलते जनभावना और आतंकवाद के प्रति घटती सहानुभूति का संकेत है।
राजनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया
सेना की प्रतिक्रिया
सेना के प्रवक्ता कर्नल सुनील कश्यप ने प्रेस वार्ता में कहा:
“यह ऑपरेशन हमारी इंटेलिजेंस और ग्राउंड कोऑर्डिनेशन की सफलता है। हम घाटी में शांति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।”
गृह मंत्रालय की ओर से बयान
गृह राज्य मंत्री ने ट्वीट कर सुरक्षाबलों को बधाई दी और कहा:
“कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सुरक्षाबलों को पूरा फ्री हैंड मिला हुआ है।”
पाकिस्तान से लिंक की जाँच
इस मुठभेड़ के बाद खुफिया एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इन आतंकियों के पास सीमा पार से कोई सीधा हथियार या वित्तीय सपोर्ट मिल रहा था। कुछ मोबाइल और सैटेलाइट डिवाइस बरामद किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए एनआईए को भेजा गया है।
कश्मीर में आतंक की स्थिति: वर्तमान परिप्रेक्ष्य
पिछले तीन वर्षों में कश्मीर घाटी में आतंकवाद पर नकेल कसने में सरकार और सुरक्षाबलों ने कई मोर्चों पर सफलता हासिल की है:
- 2022: 187 आतंकवादी मारे गए
- 2023: 135 मुठभेड़, 168 आतंकी ढेर
- 2024: 119 आतंकी मारे गए, जिनमें 41 हाइब्रिड थे
- 2025 (अब तक): 78 आतंकी मारे जा चुके हैं
कुलगाम, शोपियां, पुलवामा जैसे जिलों में आतंकियों के नेटवर्क को धीरे-धीरे ध्वस्त किया गया है।
लोकल पुलिस की भूमिका – अब केवल सहायक नहीं, अगुआ भी
कुलगाम मुठभेड़ में J&K पुलिस की खुफिया इकाई की भूमिका बेहद अहम रही। IG कश्मीर जोन, विद्यांत राठौर के अनुसार:
“हमारी टीमें स्थानीय स्तर पर आतंकी नेटवर्क की पहचान कर रही हैं। गांवों में बने हाइब्रिड मॉड्यूल को अब जल्दी पकड़ना संभव हो रहा है।”
भविष्य की रणनीतियाँ: आतंकवाद के समूल अंत की दिशा में कदम
- हाइब्रिड आतंकी निगरानी सेल: स्थानीय युवाओं पर निगरानी के लिए अलग डाटा बेस और AI आधारित ट्रैकिंग शुरू की जा रही है।
- साइबर निगरानी: Telegram, WhatsApp और Signal जैसे ऐप्स पर चल रहे आतंकी नेटवर्क की निगरानी के लिए विशेष साइबर यूनिट बनाई गई है।
- युवाओं का पुनर्वास: जो युवा आतंकवाद की ओर झुक रहे हैं, उनके लिए ‘मिशन वापसी’ जैसी योजनाओं के तहत पुनर्वास के प्रयास तेज़ किए गए हैं।
निष्कर्ष: एक निर्णायक मोड़ की ओर कश्मीर
कुलगाम में 2 अगस्त 2025 को हुआ यह ऑपरेशन न केवल सुरक्षाबलों की रणनीतिक श्रेष्ठता का परिचायक है, बल्कि यह संकेत भी है कि अब आतंक के मंसूबे ज्यादा दिन टिक नहीं पाएंगे। तीन आतंकियों का मारा जाना सिर्फ तीन व्यक्तियों की मौत नहीं, बल्कि सैकड़ों संभावित हमलों की रोकथाम भी है।
जैसे-जैसे घाटी सामान्यता की ओर बढ़ रही है, सुरक्षाबलों की यह सजगता, संवेदनशीलता और सतर्कता ही भविष्य की शांति का आधार बनेगी।















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