khabarhunt.in

खबर का शिकार

‘दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा भारत’ — पीएम मोदी का वाराणसी में मजबूत सन्देश

‘India is going to become the third largest economy of the world’ — PM Modi's strong message in Varanasi

पिछले दिनों पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को ‘dead economy’ कहे जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इसका जवाब देते हुए कहा: भारत लगातार विकासशील है, और वह बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा


वैश्विक अस्थिरता और भारत की चुनौतियाँ

पीएम मोदी ने उद्घाटन में कहा कि आज विश्व में आर्थिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर देश अपने-अपने हितों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऐसे कठिन दौर में भारत को भी अपने आर्थिक हितों की रक्षा के प्रति सजग रहना ही होगा।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत की प्राथमिकताओं में हमेशा किसान, लघु उद्योग, युवा बेरोज़गारी और रोजगार उत्पन्न करना शामिल रहेगा।


भारत: आर्थिक वृद्धि की गति बेहद तेज़

ट्रम्प के टिप्पणियों का मुकाबला करते हुए, वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत आज विश्व की सबसे तेज़ वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और कुछ वर्ष में यह तीसरी सबसे बड़ी GDP पर आधारित अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

उन्होंने यह तथ्य सामने रखा कि भारत ने मात्र एक दशक में 11वें स्थान से पाँचवें स्थान तक का सफर तय किया है और अगला मुकाम तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होना तय है।

ग्लोबल आँकड़ों की तस्वीर:

  • IMF 2025 अनुमान के अनुसार, PPP के आधार पर भारत GDP में तीन देशों (चीन, अमेरिका, भारत) की श्रेणी में विकसित होते दिख रहा है
  • भारत ने 1995 में अपने आकार का लगभग 12 गुना GDP 2025 तक प्राप्त किया है, जबकि अमेरिका की तुलना में इसका आकार लगभग 14% रहा है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता: ‘स्वदेशी’ की बात

पीएम मोदी ने ‘स्वदेशी को बढ़ावा दें’ का सशक्त संदेश दिया, यह कहते हुए कि जब दुनिया अस्थिर है, तो हमें घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को दोहराया और नागरिकों व उद्योग जगत से अपील की कि वे भारतीय उत्पादों को स्वीकारें और बढ़ावा दें।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘देशभक्ति का असली रूप स्वदेशी उत्पादों का समर्थन करना है’, और यह गांधीजी की आत्मनिर्भरता की सोच का आधुनिक स्वरूप है।


ट्रम्प के ‘dead economy’ बयान के राजनीतिक परिणाम

ट्रम्प द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत घोषित किए जाने पर भारत की राजनीतिक व मीडिया प्रतिक्रिया तीव्र रही:

📌 भारतीय विपक्ष और ट्रम्प का समर्थन

  • कांग्रेस के राहुल गांधी ने ट्रम्प के बयान का समर्थन करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला किया और इसे “देश की अर्थव्यवस्था को मारना” बताया।

📌 सरकार की प्रतिक्रिया

  • भाजपा नेताओं ने इसका जवाब देते हुए ‘डेड इकनॉमी’ को हास्यास्पद करार दिया और भारत की आर्थिक प्रगति को उच्च गति से आगे बढ़ती हुई बताया।

📌 व्यापार नीति पर पुनः बल

  • Commerce Ministry ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी व्यापार सौदे में राष्ट्रीय हित की रक्षा करेगा—किसानों, MSME, युवा रोजगार, और निर्यातकों को प्राथमिकता देगा।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भारत क़ायम कर रहा स्वाभिमान

पिछले वाक्यों से जुड़ा वैश्विक प्रभाव:

  • भारतीय आर्थिक नीति, जैसे ‘अत्मनिर्भर भारत’, Make in India, डिजिटल इंडिया आदि, भारत को वैश्विक मंच पर स्वावलंबी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में मदद करते रहे।
  • जैसे पीएम मोदी ने कहा कि विश्व के लोग भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (कोविन, UPI), अर्थव्यवस्था की मौलिक ताकत, और विश्वास-आधारित नेतृत्व की सराहना करते हैं—यह सब भारत की विश्वसनीयता की पहचान बन चुका है।

पीएम मोदी का आर्थिक एजेंडा: ‘किसान, उद्योग, युवा’

मोदी के संदेश का केंद्रीय विषय रहा है—देश के आर्थिक हितों की रक्षा और आत्मनिर्भरता। उन्होंने इस बात को दोहराया कि:

  • सरकार किसानों के आय और सम्मान को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है
  • लघु उद्योगों और MSME को मजबूत करने का लक्ष्य है
  • युवा रोजगार और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है
  • सभी स्तरों पर आर्थिक निर्णयों में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेंगे

उन्होंने व्यापारियों, उद्यमियों और आम जनता से यह अपील की कि वे अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता से भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती दें।


जनसभा का माहौल और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

इस मैसेज की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी स्पष्ट है:

  • वाराणसी जनसभा में पीएम मोदी ने केंद्र की विकास योजनाओं, डिजिटल पहल, और वोकल फॉर लोकल की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की।
  • यह भाषण ‘विश्व आर्थिक तनाव’ की पृष्ठभूमि में भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत दिखाने वाला एक सशक्त संदेश था।
  • साथ ही, यह भाजपा को राष्ट्रीय मंच पर आत्मविश्वासपूर्ण छवि देने का मौका भी था।

निष्कर्ष: मोदी का ‘तीसरी अर्थव्यवस्था’ संदेश क्यों महत्वपूर्ण है

प्रमुख बिंदुअर्थ
वैश्विक विश्वासभारत को अब विश्व आर्थिक मंच में तीसरे स्थान की सीधी राह में देखा जा रहा है
राजनीतिक आत्मनिर्भरताट्रम्प के बयान पर जवाब से भारत ने स्पष्ट किया कि वह दबाव में नहीं आएगा
आधारित नीति:‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘अत्मनिर्भरता’ से भारत ने खुद को भविष्य के लिए तैयार किया है
गरीब-किसान-केंद्रितराजनीतिक ध्रुवीयता से ऊपर उठकर विकास की रणनीति को किसान, युवा, MSME से जोड़ा गया है

पीएम मोदी का संदेश स्पष्ट था: भारत खुद पर भरोसा करता है, विदेशी टिप्पणियों से विचलित नहीं होगा, और वह तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है


पीछे की चेज़: क्या आगे कुछ बड़ा आने वाला है?

इस संदेश के बाद सरकार के नए आर्थिक पैकेज, वैश्विक साझेदारी, और ‘स्वदेशी पहल जैसे कार्यक्रमों में और गहराई आने की उम्मीद है।

यदि महामारी, वैश्विक मंदी या व्यापार युद्ध जैसी चुनौतियाँ आयी तो भी प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता स्पष्ट है कि भारत अपनी दिशा नहीं बदलेगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *