भारत में आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए एजेंसियां निरंतर सतर्क और सक्रिय रहती हैं। इसी कड़ी में गुजरात एटीएस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने अल-कायदा इन इंडियन सबकॉंटिनेंट (AQIS) के इंडिया मॉड्यूल की एक कथित मास्टरमाइंड – शमा परवीन को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया है। शमा परवीन न सिर्फ कट्टर विचारधारा फैला रही थी, बल्कि वह भारत में आतंकी हमलों की साजिश में भी सक्रिय रूप से शामिल थी।
इस गिरफ्तारी के बाद कई सवाल उठते हैं – आखिर शमा परवीन कौन है? उसकी विचारधारा और नेटवर्क कितना गहरा था? उसका असली मकसद क्या था? और सबसे अहम – क्या वह अकेली काम कर रही थी या कोई बड़ा मॉड्यूल भारत में सक्रिय हो चुका है?
इस विशेष रिपोर्ट में हम इन सभी पहलुओं पर विस्तार से बात करेंगे।
शमा परवीन की पहचान: एक सादा जीवन, एक छिपा हुआ एजेंडा
शमा परवीन मूलतः झारखंड की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वह बेंगलुरु में रह रही थी। शुरुआती जांच में पता चला है कि वह एक शिक्षित महिला है, जिसने खुद को एक साधारण गृहिणी और समाजसेविका के रूप में पेश किया था। लेकिन इस सामान्य चेहरे के पीछे एक कट्टरपंथी सोच और वैश्विक आतंकी नेटवर्क से जुड़ी हुई खतरनाक साजिश छुपी हुई थी।
एटीएस के अनुसार, वह सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स के ज़रिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित कर रही थी।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
गुजरात एटीएस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि बेंगलुरु में एक महिला अल-कायदा की गतिविधियों में शामिल है और वह भारत में एक आतंकी मॉड्यूल का संचालन कर रही है। इस सूचना के आधार पर कई हफ्तों तक टेक्निकल सर्विलांस और मानवीय इंटेलिजेंस जुटाई गई।
इसके बाद गुजरात एटीएस की एक टीम बेंगलुरु पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से शमा परवीन को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल, दस्तावेज़, जिहादी साहित्य और संदिग्ध विदेशी फंडिंग से जुड़े डेटा मिले।
क्या था शमा परवीन का असली प्लान?
शमा का असली एजेंडा भारत में “दारुल इस्लाम” की स्थापना का सपना था, जिसे वह अल-कायदा के जरिए पूरा करना चाहती थी। उसके द्वारा संचालित नेटवर्क का फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर था:
a. ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण (Radicalisation):
शमा सोशल मीडिया, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के ज़रिए युवाओं को इस्लाम के कट्टरपंथी संस्करण की ओर आकर्षित कर रही थी। वह वीडियो, ऑडियो, किताबें और भाषणों के ज़रिए जिहादी विचारधारा फैला रही थी।
b. महिलाओं की कट्टर ट्रेनिंग:
जांच में सामने आया है कि शमा महिलाओं का एक विशेष ‘अल-उम्माह’ नामक गुप्त ग्रुप चला रही थी, जहां मुस्लिम महिलाओं को “ग़ज़वा-ए-हिंद” के लिए तैयार किया जा रहा था। उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही थी कि वे अपने पतियों, भाइयों, बेटों को जिहाद के लिए प्रेरित करें।
c. स्थानीय मॉड्यूल का निर्माण:
शमा ने भारत के अलग-अलग राज्यों में स्लीपर सेल्स एक्टिव करने की कोशिश की थी। खासकर बिहार, झारखंड, बंगाल, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में उसका नेटवर्क फैलाया जा रहा था।
d. विदेशी फंडिंग और हवाला चैनल:
एटीएस ने दावा किया है कि शमा के अकाउंट्स में संदिग्ध विदेशी ट्रांजेक्शन्स पाए गए हैं, जो मिडल ईस्ट, बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं। इन पैसों का इस्तेमाल ऑनलाइन प्रचार सामग्री, हथियारों की खरीद और आतंकी ट्रेवल की व्यवस्था में किया जा रहा था।
सोशल मीडिया: नया हथियार, नया खतरा
शमा परवीन की गतिविधियों से एक बार फिर ये बात साबित हुई है कि सोशल मीडिया अब आतंकी संगठनों के लिए एक बेहद शक्तिशाली हथियार बन चुका है। वो इंस्टाग्राम, फेसबुक, टेलीग्राम और डार्क वेब के ज़रिए:
- युवाओं को भावनात्मक रूप से जकड़ रही थी।
- मुस्लिम विरोधी झूठी खबरों का प्रचार कर रही थी।
- ISIS और AQIS जैसे संगठनों की विचारधारा को ‘सत्य’ के रूप में पेश कर रही थी।
जांच में अब तक क्या सामने आया?
गुजरात एटीएस और खुफिया एजेंसियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में ये बातें सामने आई हैं:
- शमा का सीधा संपर्क AQIS के बांग्लादेशी हैंडलर्स से था।
- वह ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ के विचार को प्रचारित कर रही थी।
- भारत के विश्वविद्यालयों और महिला कॉलेजों में ऑनलाइन सेमिनार के ज़रिए कट्टर विचारधारा फैलाई जा रही थी।
- कुछ भारतीय युवकों को सीरिया भेजने की योजना बन रही थी, जहां उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती।
उसके नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था?
अब तक की जानकारी के अनुसार, शमा का नेटवर्क निम्नलिखित श्रेणियों में बंटा हुआ था:
- डिजिटल प्रचारक: सोशल मीडिया के ज़रिए जिहाद का प्रचार।
- लॉजिस्टिक सपोर्टर: रहने की जगह, ट्रैवल दस्तावेज़, फाइनेंसिंग।
- कम्युनिकेशन हैंडलर: VPN, TOR और डार्क वेब के ज़रिए सुरक्षित बातचीत।
- फिजिकल ट्रेनिंग मॉड्यूल: भारत के सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में संभावित कैंप।
महिलाओं में कट्टरपंथ का नया चेहरा:
शमा की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि अब आतंकी संगठन महिलाओं को भी फ्रंटलाइन पर लाने लगे हैं। महिलाओं को अब केवल संपर्क माध्यम या प्रेरक नहीं, बल्कि आपरेशन प्लानर और कमांडर की भूमिका में देखा जा रहा है।
शमा परवीन इस पूरे नेटवर्क में “रहबर” यानी मार्गदर्शक के तौर पर काम कर रही थी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:
शमा की गिरफ्तारी के बाद कई राजनीतिक नेताओं और मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों ने इस पर चिंता जाहिर की है:
- मौलाना अरशद मदनी ने कहा – “ये घटनाएं पूरे मुस्लिम समाज को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा हैं, लेकिन अगर कोई सच में दोषी है, तो सख्त सज़ा मिलनी चाहिए।”
- गृह मंत्रालय ने इस गिरफ्तारी की प्रशंसा की और कहा कि भारत में आतंकवाद के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।
आगे की जांच में क्या हो सकता है?
अब एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) इस केस को टेकओवर कर सकती है। साथ ही इंटरपोल और बांग्लादेशी खुफिया एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है ताकि उसके विदेशी कनेक्शन की पुष्टि की जा सके।
जांच एजेंसियां इन बिंदुओं पर काम कर रही हैं:
- क्या शमा भारत में किसी बड़े आतंकी हमले की योजना बना रही थी?
- क्या उसके संपर्क पाकिस्तान या तालिबान से भी जुड़े थे?
- भारत के किन-किन राज्यों में उसका नेटवर्क एक्टिव था?
निष्कर्ष:
शमा परवीन की गिरफ्तारी न केवल सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का प्रमाण है, बल्कि यह चेतावनी भी है कि भारत के भीतर आतंकवाद के नए रूप विकसित हो रहे हैं। यह केस बताता है कि अब सिर्फ सीमा पार से हमला करने वाले आतंकी नहीं, बल्कि देश के भीतर डिजिटल क्रांतिकारी और कट्टर सोच रखने वाले लोग भी उतने ही खतरनाक हैं।















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