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ऑपरेशन महादेव: जम्मू-कश्मीर के दारा-लिडवास क्षेत्र में आतंकी मुठभेड़ की बड़ी कार्रवाई

Operation Mahadev: Major action on terrorist encounter in Dara-Lidwas area of Jammu and Kashmir

जम्मू-कश्मीर की घाटी एक बार फिर आतंक के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई की गवाह बनी है। सोमवार, 28 जुलाई 2025 को भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने श्रीनगर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित दारा-लिडवास क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक ऑपरेशन को अंजाम दिया। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत की गई, जिसका उद्देश्य घाटी में छिपे उन आतंकियों को ढूंढना और खत्म करना था जो अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले में शामिल होने की आशंका के घेरे में थे।

दारा, हरवन और डाचीगाम नेशनल पार्क जैसे इलाके आमतौर पर ट्रेकिंग और पर्यटन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार इन इलाकों की वीरानी और दुर्गमता ने एक आतंक विरोधी अभियान की ज़मीन तैयार की, जिसमें तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया। इस ऑपरेशन की हर बारीकी को समझना, जम्मू-कश्मीर की बदलती सुरक्षा रणनीति को समझने के लिए बेहद ज़रूरी है।


1. ऑपरेशन की पृष्ठभूमि: पहलगाम हमला और खुफिया इनपुट

22 अप्रैल 2025 को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। सुरक्षाबलों ने इसके बाद से ही व्यापक तलाशी अभियान चलाया, ताकि हमले में शामिल आतंकवादियों की पहचान और ठिकानों का पता लगाया जा सके। पिछले एक महीने में प्राप्त खुफिया जानकारी से संकेत मिले कि हमले के जिम्मेदार आतंकवादी श्रीनगर के उत्तर-पूर्वी हिस्से — खासकर डाचीगाम और हरवन के इलाकों में शरण ले सकते हैं।

यही इनपुट ‘ऑपरेशन महादेव’ का आधार बना।


2. ऑपरेशन महादेव: सोमवार सुबह से कार्रवाई शुरू

सोमवार सुबह 11 बजे के आसपास लिडवास क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ की शुरुआत हुई। चिन्नार कॉर्प्स ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल से जानकारी दी:

“OP MAHADEV – Contact established in General Area Lidwas. Operation in progress.”

माना जा रहा है कि सेना ने पहले हरवन के मुलनार क्षेत्र में एक तलाशी अभियान शुरू किया था। जैसे-जैसे सैनिक आगे बढ़े, दो राउंड गोलियां चलने की आवाज़ें सुनी गईं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आतंकवादियों के साथ संपर्क हो चुका है।

उसके बाद, सेना ने रणनीतिक तरीके से इलाके को घेरते हुए मुठभेड़ की योजना बनाई। यह क्षेत्र अत्यधिक पथरीला, वनस्पति युक्त और दुर्गम है, जिससे ऑपरेशन में चुनौतियाँ बढ़ गईं।


3. तीन पाकिस्तानी आतंकी ढेर, ऑपरेशन जारी

भारतीय सेना की चिन्नार कॉर्प्स ने बाद में पुष्टि की कि तीन आतंकवादियों को एक तीव्र मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया है। हालांकि, ऑपरेशन अभी भी जारी है क्योंकि सुरक्षा बल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि क्षेत्र पूरी तरह से साफ है और कोई अन्य आतंकी बच न पाए।

SSP श्रीनगर जीवी सुंदीप चक्रवर्ती ने बताया कि

“तीनों आतंकी पाकिस्तान से थे और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े हुए थे।”
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि इन आतंकवादियों का सीधा संबंध पहलगाम हमले से है या नहीं।
“हम उनकी पहचान कर रहे हैं और पहलगाम कनेक्शन की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं,” SSP ने कहा।


4. ऑपरेशन की चुनौतियाँ: दुर्गम भूभाग और मौसम

लिडवास और हरवन क्षेत्र डाचीगाम नेशनल पार्क से सटे हुए हैं, जो कश्मीर का एक संरक्षित और अत्यंत जैवविविध क्षेत्र है। यही कारण है कि यहां किसी भी सैन्य ऑपरेशन को बहुत सावधानी और योजना के साथ अंजाम देना पड़ता है।

  • इलाके में घने जंगल, पथरीले पहाड़, और तंग घाटियाँ हैं, जिससे सैनिकों की आवाजाही धीमी होती है।
  • खराब मौसम और अचानक बारिश ने भी ऑपरेशन में व्यवधान डाला।
  • आतंकवादियों ने ऊंचाई वाले इलाकों में छिपने की कोशिश की, जिससे ड्रोन और सैटेलाइट इंटेलिजेंस की मदद लेनी पड़ी।

भारतीय सेना ने ड्रोन तैनात किए, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, CRPF और J&K पुलिस की टीमें भी ऑपरेशन में मदद के लिए मौके पर मौजूद रहीं।


5. लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका: आतंकी नेटवर्क की जड़ें

तीनों आतंकवादियों का लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा होना बेहद चिंताजनक है। यह आतंकी संगठन पाकिस्तान से संचालित होता है और कश्मीर में लंबे समय से सक्रिय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • पहलगाम हमला लश्कर की रणनीति का हिस्सा था, ताकि अमरनाथ यात्रा और पर्यटन सीजन को प्रभावित किया जा सके।
  • लिडवास और डाचीगाम जैसे पर्यटन स्थल अब आतंकियों की शरणस्थली बनते जा रहे हैं क्योंकि ये इलाके अक्सर सीज़न के अलावा वीरान रहते हैं।

6. क्या मारे गए आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे?

इस सवाल का जवाब अभी नहीं मिला है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:

  • पिछले एक महीने से मिले खुफिया इनपुट बता रहे थे कि पहलगाम हमले के संदिग्ध आतंकवादी हरवन क्षेत्र में घूम रहे हैं।
  • अप्रैल के बाद से लापता मोबाइल सिग्नलों और ड्रोन मूवमेंट से लिडवास पर खास नजर रखी जा रही थी।
  • मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ सैटेलाइट फोन, GPS डिवाइसेज़, और AK-47 जैसे हथियार बरामद हुए हैं।

अब NIA और IB जैसी जांच एजेंसियाँ इस ऑपरेशन से मिले सबूतों की गहराई से जांच कर रही हैं। अगर पुष्टि होती है कि यही आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे, तो यह भारत के लिए बड़ी कामयाबी होगी।


7. स्थानीय लोगों की भूमिका और प्रतिक्रिया

हालांकि ऑपरेशन बेहद संवेदनशील था, फिर भी स्थानीय लोगों से कोई विरोध की खबर नहीं आई। उल्टा, दारा और हरवन जैसे इलाकों के नागरिकों ने सुरक्षा बलों के प्रति सहयोग दिखाया।

कुछ स्थानीय लोगों ने मीडिया से बात करते हुए कहा:

“हम नहीं चाहते कि हमारे इलाकों को आतंकवादी छिपने की जगह बनाएं। सेना ने हमें पहले ही चेताया था, हम घरों के अंदर थे।”

यह स्पष्ट करता है कि घाटी में आतंक के प्रति स्थानीय विरोध धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है, खासकर जब पर्यटक क्षेत्रों की सुरक्षा दांव पर हो।


8. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और रणनीतिक संदेश

घटना के तुरंत बाद, केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने ऑपरेशन की सराहना की और सुरक्षाबलों को अतिरिक्त संसाधन देने की बात कही। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा:

“ऑपरेशन महादेव में तीन आतंकियों को मार गिराना सुरक्षाबलों की सतर्कता और ताकत का प्रमाण है। हम घाटी को आतंक मुक्त करने के संकल्प पर अडिग हैं।”

विपक्ष की ओर से जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने संतुलित प्रतिक्रिया दी, जहां उन्होंने मारे गए आतंकियों की पाकिस्तानी नागरिकता को लेकर चिंता जताई और पाकिस्तान से इस पर स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगा।


9. आगे की कार्रवाई: ऑपरेशन महादेव क्या यहीं खत्म हुआ?

चूंकि चिन्नार कॉर्प्स ने कहा है कि “ऑपरेशन अभी जारी है,” इसका सीधा अर्थ है कि अभी और तलाशी अभियान, डाटा विश्लेषण, और संभावित दूसरे आतंकियों की तलाश की प्रक्रिया जारी है।

सूत्रों के अनुसार:

  • ऑपरेशन महादेव को अगले 72 घंटे और बढ़ाया जा सकता है।
  • लिडवास और डाचीगाम के आसपास के सभी गांवों और जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलेंगे।
  • IB और NIA के अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं और डिजिटल सबूत इकट्ठा कर रहे हैं।

निष्कर्ष: आतंक के खिलाफ निर्णायक प्रहार

‘ऑपरेशन महादेव’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संदेश है — भारत आतंकवाद को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वह सीमा पार से आए या आंतरिक तौर पर पनपे।

तीन पाकिस्तानी लश्कर आतंकियों को मार गिराना सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि घाटी में शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, पहलगाम हमले से इसका सीधा संबंध अभी पुष्ट नहीं हुआ है, फिर भी यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकी नेटवर्क को तोड़ने में अहम साबित होगा।

अब ज़रूरत है इस ऑपरेशन से मिली जानकारी और तकनीकी सबूतों का इस्तेमाल कर आतंकवाद की जड़ों तक पहुंचने की — ताकि अगली पहलगाम जैसी त्रासदी कभी न दोहराई जाए।

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