पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत एक बार फिर ड्रग्स केस में सियासी हलचल तेज हो गई है। अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ दर्ज ड्रग्स केस में अब नया एंगल सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। मजीठिया से बरामद मोबाइल फोन की जांच में एक व्यक्ति जसमीत सिंह का नाम सामने आया है, जो जांच एजेंसियों के लिए अब अहम कड़ी बन गया है।
13 जुलाई को जब मजीठिया की गिरफ्तारी हुई, उसके कुछ ही घंटों बाद जसमीत सिंह भारत छोड़कर कनाडा रवाना हो गया, जिससे इस पूरे मामले में विदेशी कनेक्शन और संभावित साजिश की आशंका को बल मिला है।
इस लेख में हम इस ड्रग्स केस की पूरी पृष्ठभूमि, नए खुलासों, मोहाली विजिलेंस की कार्रवाई और अकाली दल की प्रतिक्रिया को विस्तार से समझेंगे।
केस की पृष्ठभूमि: मजीठिया पर क्या हैं आरोप?
ड्रग्स केस में बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम 2013-14 के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में प्रमुख रूप से उभरा था। उन पर ड्रग्स की तस्करी, हवाला नेटवर्क और ड्रग्स सिंडिकेट से संपर्क जैसे गंभीर आरोप हैं।
कांग्रेस सरकार के दौरान 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आदेश पर एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद इस मामले ने और तूल पकड़ा। एफआईआर में साफ कहा गया कि मजीठिया ने ड्रग्स सिंडिकेट के साथ सांठगांठ कर राज्य में नशे का व्यापार बढ़ाया और अवैध रूप से पैसा कमाया।
मजीठिया ने इस एफआईआर को राजनीतिक बदले की भावना बताया और सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी से राहत ली, लेकिन 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद मामला दोबारा तेज़ी से आगे बढ़ा।
मोबाइल से मिला सुराग: जसमीत सिंह का नाम क्यों अहम?
हाल ही में जब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, तब उनका मोबाइल फोन जब्त किया गया। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में पता चला कि मजीठिया ने जसमीत सिंह नामक व्यक्ति से लगातार संपर्क किया था।
फोन कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और कुछ वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य सामने आए हैं, जिससे जांच एजेंसियों को शक है कि जसमीत इस ड्रग्स नेटवर्क की लॉजिस्टिक्स या फाइनेंसिंग में कोई अहम भूमिका निभा रहा था।
मजीठिया की गिरफ्तारी के बाद जसमीत का कनाडा भाग जाना
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 13 जुलाई को जैसे ही मजीठिया को औपचारिक रूप से हिरासत में लिया गया, उसी दिन जसमीत सिंह कनाडा के लिए उड़ान भर चुका था।
यह संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत भागने की कोशिश मानी जा रही है। मोहाली स्थित विजिलेंस टीम ने जसमीत सिंह के घर पर छापा मारा, जहां उसके परिवार से पूछताछ की गई।
परिवार ने पुष्टि की कि जसमीत ‘छुट्टियों’ पर कनाडा गया है, लेकिन टीम को इस पर संदेह है क्योंकि मजीठिया की गिरफ्तारी और जसमीत की यात्रा का समय लगभग एक जैसा है।
विजिलेंस की रणनीति: अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावना
अब जबकि केस में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आया है, विजिलेंस ब्यूरो इंटरपोल या कनाडाई एजेंसियों से संपर्क करने की योजना बना रहा है।
कुछ संभावित कदम:
- लुकआउट नोटिस और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा सकता है।
- जसमीत सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में शामिल किया जा सकता है, अगर मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमाण मिलते हैं।
- विदेश मंत्रालय के माध्यम से कनाडाई सरकार से सहयोग मांगा जा सकता है।
सियासी प्रतिक्रियाएं: अकाली दल और विपक्ष में बयानबाज़ी
अकाली दल ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश बताया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा:
“यह AAP सरकार द्वारा पुरानी रंजिश के तहत मजीठिया को फंसाने की कोशिश है। जसमीत कौन है, यह पहले जांच होनी चाहिए। मजीठिया का उससे कोई व्यावसायिक या आपराधिक संबंध नहीं है।”
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पंजाब के गृह मंत्री ने बयान में कहा:
“यह स्पष्ट है कि बिक्रम मजीठिया एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा हैं। सरकार किसी भी दबाव में आए बिना जांच पूरी करेगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।”
घटना का मीडिया कवरेज: “पंजाब आजतक” की रिपोर्ट
न्यूज़ चैनल “पंजाब आजतक” ने इस मामले को प्रमुखता से कवर किया। उनके मुताबिक:
- मजीठिया और जसमीत सिंह की व्हाट्सएप चैट में ड्रग्स कोड वर्ड्स मिले हैं।
- चैट में ‘पैकेज, डिलीवरी, शिपमेंट, और क्लाइंट’ जैसे शब्द बार-बार इस्तेमाल हुए हैं।
- कुछ मैसेज डिलीट किए गए थे, जिन्हें डिजिटल रिकवरी के माध्यम से हासिल किया गया।
हवाला कनेक्शन और मनी ट्रेल
सूत्रों के अनुसार मजीठिया और जसमीत के बीच कुछ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन दुबई और कनाडा के माध्यम से हुए हैं। यह रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
इन लेन-देन की जांच में ED को भी जोड़ा जा सकता है। हवाला चैनलों के जरिए नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम विदेश भेजी गई, ऐसी आशंका जताई जा रही है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
- मजीठिया के मोबाइल से मिले डेटा को लेकर नए FIR दर्ज किए जा सकते हैं।
- जसमीत सिंह को घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
- अकाली दल की भूमिका पर भी राज्य की जांच एजेंसियां पैनी नजर रख रही हैं।
निष्कर्ष
बिक्रम मजीठिया के ड्रग्स केस में जसमीत सिंह के नाम के सामने आने से यह केस अब केवल पंजाब का नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की दिशा में बढ़ गया है। मजीठिया की सियासी पकड़, अकाली दल की रणनीति, और विजिलेंस की तेज़ जांच – इन सबके बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला क्या मोड़ लेता है।
अगर मजीठिया और जसमीत के बीच साजिश और वित्तीय लेनदेन के पुख्ता सबूत मिल जाते हैं, तो यह पंजाब की राजनीति और ड्रग्स माफिया के रिश्तों को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर देगा।















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