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प्रदेश भर में सक्रिय अवैध धर्मांतरण रैकेट: बड़ी जांच का खुलासा

Illegal conversions exposed in many districts of UP: Questions raised on the role of Christian missionaries

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर अवैध धर्मांतरण के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। आगरा, बलरामपुर, प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से सामने आए मामलों ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने और कानून व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक जांच और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के बाद अब यह साफ होता जा रहा है कि इन घटनाओं के पीछे संगठित रूप से काम कर रहे कुछ विदेशी फंडेड मिशनरियों की भूमिका भी संदिग्ध है।

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि इन मामलों की तह तक क्या खुलासे हुए हैं, किस तरह लोगों को धर्म बदलने के लिए उकसाया गया, और सरकार तथा प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है।


1. आगरा: मंदिर के पुजारी के बेटे को लालच देकर धर्मांतरण का प्रयास

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक मंदिर के पुजारी के बेटे को लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाया गया। पीड़ित के अनुसार, एक स्थानीय व्यक्ति ने उसे नौकरी और शिक्षा में मदद का वादा किया और इसके बदले में ईसाई धर्म अपनाने की शर्त रखी।

जैसे ही मामला उजागर हुआ, परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और FIR के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी का संबंध एक मिशनरी संगठन से है जो पहले भी धर्मांतरण से जुड़े मामलों में संदिग्ध रहा है।


2. बलरामपुर: आदिवासी समुदाय को टारगेट किया गया

बलरामपुर जिले में भी अवैध धर्मांतरण का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है। यहां ईसाई मिशनरियों द्वारा दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य शिविर और शिक्षा की आड़ में धर्मांतरण की कोशिश की गई। स्थानीय प्रशासन की छापेमारी में कुछ ऐसे प्रचार साहित्य और बाइबलें बरामद की गईं जिनमें ‘धार्मिक चमत्कार’ के जरिए हिंदू देवी-देवताओं को नीचा दिखाने की कोशिश की गई थी।

गांव वालों का कहना है कि मिशनरी कार्यकर्ताओं ने उन्हें इलाज, रोजगार और बच्चों की पढ़ाई का लालच देकर धर्म बदलने को कहा। जिलाधिकारी के आदेश पर एक SIT का गठन किया गया है जो पूरे मामले की तह तक जांच कर रही है।


3. प्रतापगढ़: चर्च के आयोजन में युवाओं को बुलाकर दबाव बनाया गया

प्रतापगढ़ जिले में भी अवैध धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों का खुलासा हुआ है। यहां एक ‘प्रेयर मीटिंग’ के नाम पर सैकड़ों लोगों को एक चर्च में बुलाया गया था, जहां उन्हें ईसाई धर्म के प्रति आकर्षित करने वाले भाषण दिए गए और चमत्कारिक घटनाओं का हवाला देकर हिंदू धर्म की आलोचना की गई।

कुछ युवाओं ने पुलिस को बताया कि उन्हें आयोजकों द्वारा कहा गया था कि अगर वे ईसा मसीह में विश्वास रखें तो उनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी और वे आर्थिक रूप से संपन्न बनेंगे। कई परिवारों को ‘धार्मिक सेवा’ के बदले पैसे और राशन भी दिए जा रहे थे।


4. ईसाई मिशनरियों की भूमिका पर सवाल

इन सभी घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन अवैध धर्मांतरण की कोशिशों के पीछे विदेशी फंडिंग प्राप्त मिशनरी संगठनों की कोई भूमिका है?

सूत्रों के अनुसार, कई मिशनरियों को विदेशों से फंडिंग मिलती है, जो ग्रामीण इलाकों में स्कूल, अस्पताल और सेवा केंद्र खोलने के नाम पर अपना प्रचार-प्रसार कर रही हैं। लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने अब इनके कार्यों पर पैनी नजर रखना शुरू कर दिया है।

राज्य की गृह विभाग की एक रिपोर्ट में यह संकेत मिला है कि कुछ विदेशी NGOs यूपी में मिशनरियों के जरिए हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए गरीब और अशिक्षित वर्ग को उकसा रहे हैं। इसके लिए उन्हें आर्थिक सहायता, इलाज, बच्चों की स्कॉलरशिप और रोजगार का वादा किया जाता है।


5. प्रशासन की कार्रवाई और कानून व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पहले ही 2020 में अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर चुकी है, जिसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन करवाना संज्ञेय अपराध है। इस कानून के अंतर्गत कई गिरफ्तारियां पहले भी हो चुकी हैं।

हाल ही में आगरा और बलरामपुर में सामने आए मामलों में पुलिस ने IPC की धारा 295A, 506, 120B सहित उत्तर प्रदेश धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं लगाकर केस दर्ज किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये मामले सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़े हुए हैं।


6. विपक्ष और समाज का रुख

विपक्षी दल इन घटनाओं पर दो हिस्सों में बंटे दिखाई देते हैं। कुछ दल इन कार्रवाईयों को ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ पर हमला बता रहे हैं, वहीं सामाजिक संगठनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे समूहों का कहना है कि यह राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का हिस्सा है और इन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि विदेश से फंडिंग पाने वाले सभी धार्मिक संगठनों की जांच की जाए और जिन संस्थाओं की भूमिका संदिग्ध हो, उनका पंजीकरण तत्काल रद्द किया जाए।


7. धर्मांतरण से प्रभावित परिवारों की दास्तान

रिपोर्टों में सामने आया कि कुछ परिवारों ने मिशनरियों द्वारा किए गए प्रलोभनों के चलते धर्म बदल लिया, लेकिन बाद में उन्हें न अपने पुराने समाज में स्वीकार किया गया, न ही ईसाई समुदाय से कोई सहायता मिली। ऐसे में वे दोहरी सामाजिक बहिष्कृति के शिकार हो गए।

एक पीड़ित महिला ने बताया, “हमें कहा गया कि अगर हम ईसा मसीह को अपनाएं तो हमारी बेटी की बीमारी ठीक हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमने अपना धर्म छोड़ दिया और अब हमें अपने गांव में भी तिरस्कार झेलना पड़ रहा है।”


8. निष्कर्ष: धर्मांतरण के खेल को रोकने की जरूरत

उत्तर प्रदेश में हो रही इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धर्मांतरण एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा है, जिसमें गरीब, अशिक्षित और हाशिये पर खड़े समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे न केवल सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की भी अवहेलना होती है।

राज्य सरकार और केंद्र सरकार को इस दिशा में और कठोर कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही, समाज को भी जागरूक करने की आवश्यकता है कि वे धर्म के नाम पर मिलने वाले लालच और प्रचार से बचें और अपने मूल विश्वास में अडिग रहें।

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