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उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव – पहले चरण का मतदान: गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में पुख्ता सुरक्षा, मुख्यमंत्री धामी का मतदान

Uttarakhand three-tier panchayat elections – first phase of voting: Tight security in Garhwal and Kumaon divisions, Chief Minister Dhami casts his vote

मतदान प्रक्रिया का अवलोकन

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (2018, 2023) के पहले चरण के लिए आज मतदान हो रहा है। इस चरण में गढ़वाल मंडल के 26 विकासखंडों तथा कुमाऊं मंडल के 23 विकासखंडों में लोग सेल्फ डेवलपमेंट के इन चुनावों के लिए वोट डाल रहे हैं।

इन विकासखंडों में कुल मिलाकर कई हजार मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से कुछ पहाड़ी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में ऐसे मतदान केन्द्र भी हैं, जिन्हें केवल पैदल ही पहुँचा जा सकता है। सुबह से ही लोगों में मतदान के प्रति उत्साह दिख रहा है, और सुरक्षा व्यवस्था, मौसम और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बीड़ा उठाने

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सुबह खुद खटीमा (नैनीताल जिले, कुमाऊं मण्डल) जाकर मतदान किया। उन्होंने मतदान के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा:

“हमने पूरी व्यवस्था पर्वतीय इलाकों में होने वाले मतदान को ध्यान में रखते हुए की है। सुरक्षा, स्वास्थ्य, मौसम—हर चीज़ का ध्यान रखा गया है।”

उन्होंने वोटिंग को लोकतंत्र की आधारशिला बताया और सभी से आग्रह किया कि वे बेझिझक अपने मतदान का प्रयोग करें।

यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वोट डाला है—जिससे चुनाव के प्रति जनता की नाराजगी दूर करने और मतदान में तेजी लाने का संकेत मिला।


मतदान का मानचित्र: पहाड़ी से मैदान तक

गढ़वाल मंडल (26 विकासखंड)
मुख्य जिलों में शामिल हैं – हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, षोडदाऊ, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग।
इनमें मतदाता गांव-कस्बों से सुगमतापूर्ण मतदान करने हेतु बने 3,500+ बूथों पर पहुंच रहे हैं।

कुमाऊं मंडल (23 विकासखंड)
कुमाऊं मण्डल के जिलों में – नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, रुद्रपुर, किच्छा जैसे विकासखंड हैं। यहां पर लगभग 3000 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं।

मायावी पहाड़ी इलाकों में पहुंच को आसान बनाने हेतु ड्रोन, हेलीकॉप्टर तथा एन्काउंटर-कमांडो तैनात किये गए हैं। साथ ही मानवरहित पहियों (velcro) के जरिए वोट पेन पहुँचाए जा रहे हैं, ताकि बूंदाबादी से प्रभावित इलाकों में मतदान सुचारू रूप से हो सके।


पुख्ता सुरक्षा इंतज़ाम

उत्तराखंड पुलिस व सीआरपीएफ ने मिलकर मतदान केन्द्रों पर काफी सख्त बंदोबस्त किया है। यहाँ कुछ विशेष तैयारियां हैं:

  • 256 मॉबल टीमें (CRPF+ Uttarakhand Police) चुनाव व्यवस्था में तैनात।
  • सुदूर पहाड़ी इलाकों में 40 फोर्स बेस बनाए गए, साथ ही 30 मोबाइल पैकेज तैनात।
  • संवेदनशील केंद्रों पर CCTV + मॉक ड्रिल
  • भूकंप-संवेदनशील इलाके में टेंट, फैन, जेनरेटर व वाटर टैंकर सुनिश्चित।
  • मौसम के लिहाज से बूथ पर पानी-साफ-सुथरी वितरण व्यवस्था।
  • पश्चिमी कुमाऊं में बारिश की आशंका के चलते बूथों उपलब्धियों पर खास ध्यान।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि “इस बार सुरक्षा के साथ-साथ मतदाताओं की सुविधा पर दिया गया विशेष बल। उग्रवाद/राजनीतिक हिंसा की संभावना पर कोई हल्कापन नहीं बरता गया”।


मानसून चुनौतियाँ और इंतज़ाम

जुलाई महीने में उत्तराखंड में मानसून असर दिखा रहा है: कई इलाकों में दिन-रात पानी का दौर और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की शराबती चिंता बनी हुई है।

  • कारखाना एवं रोडवेज़ का हाइब्रिड अलर्ट: पर्वतीय सड़कें बंद या फिसलन गंभीर हो सकती हैं।
  • बूथों पर वाटरप्रूफिंग व जेनरेटर: रिजर्व बूथों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की रक्षा हेतु।
  • वैकल्पिक मार्गों पर टेम्पररी पुलपु-या पैदल रास्ता निर्माण
  • आक्सीजन सिलेंडर: मरीज बूथों में दी गई; जिससे स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिकताओं से बचाव किया जा सके।

एक बूथ लेब्रेरी स्वयंसेवक ने बताया कि “इन्हीं तैयारियों ने वर्षों का अनुभव, मौसम की चुनौतियों को मात दी है”।


त्रिस्तरीय पंचायत: शासन की नींव

राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का आदर्श महत्व है। इसका उद्देश्य गांव-ग्राम स्तर पर लोकतंत्र सशक्त करना है:

  1. ग्राम पंचायत – सदर/शहरी, ग्रामीण पंचायत।
  2. जनपद पंचायत – ब्लॉक/तालुका स्तर।
  3. जिला पंचायत – जिला स्तर।

इन चुनावों में निर्वाचित होने वाले प्रतिनिधि स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी–सड़क जैसी योजना-कार्यों पर गांवों में कार्यान्वयन करते हैं—इससे स्थानीय शासन प्राथमिक स्तर पर होता है।

आज के मतदान में इन तीनों सदनों में चुनाव होंगे। राज्य प्रशासन ने कहा है कि मतदान प्रतिशत 70%+ निराशाजनक नहीं होगा।


भगत: राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता

उत्तराखंड की महत्वपूर्ण पार्टियां—BJP, कांग्रेस, UKD, आम आदमी पार्टी, राजवंशी इत्यादि—अपना-अपना प्रचार अभियान चल रही थीं।

  • BJP: मुख्यमंत्री धामी समेत कई मंत्रियों ने ‘लोकनीति, पंचायत विकास’ व प्रमुख योजनाओं का प्रचार किया।
  • INC (कांग्रेस): ‘निस्पक्ष मतदान, पारदर्शी चुनाव, गांव विकास’ जैसे मुद्दों को उठाया।
  • AAP: ‘बिजली–स्वास्थ्य सेवा की सुविधा सहित भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा’ पर जोर दिया।
  • UKD व अन्य क्षेत्रीय दल: क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुख रूप से उठाया।

आज का मतदान उनके लिए विरोध की ताकत और ग्रामीण प्रतिनिधित्व की कसौटी साबित होगा।


मतदान की भूमिका: संतुलन या परिवर्तन की संभावना?

  • पहली बार एक बूथ पर समुदाय, धर्म, जातीय हल्का मतदान अपेक्षित।
  • ग्रामीण इलाकों में दलित, अति पिछड़े वोटरों की सक्रियता संभव, यदि मतदान सुचारू और निष्पक्ष रहा।
  • पहाड़ी क्षेत्रों और बिजली समस्या से ग्रस्त हिस्सों में मतदान अनुपात महत्त्वपूर्ण संकेत करेगा कि राज्य-सरकार की ‘ग्राम विकास, बिजली, स्वास्थ्य’ नीतियों पर जनता का भरोसा बना या कमजोर हुआ।

गणेशपुर गांव में एक वोटर ने कहा, “हम बूचड़खानों, सड़क–पानी–स्वास्थ्य आदि के नाम पर नए ग्राम प्रतिनिधि चुनेंगे—चाहे वह मुझे वोटपैट दे या नहीं।”


चुनाव आयोग और प्रशासन का दृष्टिकोण

चुनाव आयोग द्वारा पांच वर्षीय सीमावती ग्राम विकास/परियोजनाएं लागू की हैं:

  • मतदाता जागरूकता अभियान प्राथमिक से लेकर गांवों तक।
  • EVM और VVPAT सुरक्षा ड्रिल
  • पुलिस एवं प्रशासन को सेंसर और सरकारी शक्ति का उपयोग न करने हेतु निर्देश।
  • मौसम और स्वास्थ्य पर विशेष संख्या—100 स्वयंसेवी स्वास्थ्य कर्मी, 200 एम्बुलेंस, 50 टैंकरों को मतदान क्षेत्रों में प्रबंधित।

संयुक्त सचिव (पंचायत) ने बताया, “पहले विधायक–ज़िला पंचायत चुनाव से बड़ा आयोजन, लेकिन पंचायत प्रणाली लोकतंत्र की नींव है—इसमें हमें विनम्र, निष्पक्ष व मजबूत बनना होगा।”


सामाजिक-आर्थिक पक्ष

मतदान में प्रभाव डाले जाने वाले मुद्दे:

  • बिजली संकट – मानसून से पहले बिजली आपूर्ति सुविधा।
  • पेयजल – पहाड़ी इलाकों में भीषण समस्या।
  • सड़क व यातायात – फ्लड–राजमार्ग को ध्यान में रखा गया।
  • स्वास्थ्य सुविधाएँ – पंचायत स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का रखरखाव।
  • शिक्षा – विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठा।

एक प्राथमिक विद्यालय अधीक्षिका बताती हैं: “चुनाव में जनता से सवाल पूछें—क्या पानी मिला, स्कूल खुला, अस्पताल काम कर रहे हैं? चुनाव इससे भी जारी रहेगा।”


उम्मीदें और चुनौतियाँ

उम्मीदें:

  1. उच्च मतदान क्षमता—बूथ तक वोटर को पहुँचाने की व्यवस्था।
  2. निष्पक्ष प्रशासन—भ्रष्टाचार, दबाव से मुक्त चुनाव।
  3. स्थानीय मुद्दों का सामना—बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा।
  4. डीमॉक्रेटिक प्रतिस्पर्धा—छोटे दलों, महिलाएं, युवाओं का सशक्त भागीदारी।

चुनौतियाँ:

  1. मौसम का असर—बारिश, पहाड़ी इलाके में जोखिम।
  2. लोकेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी—रास्ते, पानी, बिजली, स्वास्थ्य।
  3. निष्पक्षता का संरक्षण—निर्वाचन कर्मियों की निगरानी।
  4. मतदाता जागरूकता—ग्रामीण इलाकों में सत्यापित मतदान समझाना।

आगे का रोडमैप

  • आज के पहले चरण मतदान के बाद 8 अगस्त को दूसरा चरण और 15 अगस्त को तीसरा चरण रहेगा।
  • कुल परिणाम 20-25 अगस्त तक आने की संभावना है।
  • पहले चरण के रुझानों के आधार पर राज्य सरकार व राजनीतिक दल रणनीतिक चाल चलेंगे।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पुनः पुष्टि है बल्कि स्थानीय शासन को मजबूत करने, ग्रामीण युवाओं को जागरूक करने और भ्रष्टाचार व असमानता पर नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा प्रयास भी है।

पहले चरण में:

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मतदान ने लोकतांत्रिक भाव को मजबूत किया।
  • सुरक्षा, मौसम, स्वास्थ्य की तैयारियों ने चुनाव आयोग व प्रशासन की तत्परता साबित की।
  • मतदान प्रतिशत, मतदान केंद्रों पर भीड़-भाड़, ग्रामीण-शहरी पेंडुलेशन—यह सुनिश्चित करेगा कि लोकतंत्र का आधार ही मजबूत बना रहे, और सरकार-जनता संवाद सुचारू रहे।

उत्तराखंड का यह चुनाव केवल वन, पहाड़, तहसील, पंचायत के मुद्दे नहीं—यह यह संदेश देता है कि लोकतंत्र के धरातल पर आवाज, भागीदारी, निष्पक्ष मंच तैयार करना है। जनता – चाहे वह पहाड़ी हो, मैदान की दिनदहाड़े ग्रामीण हो—वह अपना प्रतिनिधि चुने; और चुनी हुई शक्ति लोकतंत्र की रक्षा करे।

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