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दिल्ली के मुस्तफाबाद में अवैध धर्मांतरण का खुलासा: ‘धर्मांतरण फैक्टरी’ का पर्दाफाश

Illegal conversions exposed in Delhi’s Mustafabad: ‘Conversion Factory’ exposed

देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और आमजन दोनों को चौंका दिया है। पूर्वोत्तर दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में कथित तौर पर एक ‘अवैध धर्मांतरण फैक्टरी’ चल रही थी, जहां मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के इशारे पर धर्मांतरण का संगठित खेल खेला जा रहा था। इस पूरे मामले में हरियाणा की एक महिला ममता को जबरन मुसलमान बना कर उसका नाम ‘शिफा’ रख दिया गया। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सक्रियता के चलते महिला को सकुशल छुड़ाया गया और मामले की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं।


मामला क्या है?

आगरा पुलिस को सूचना मिली थी कि हरियाणा की रहने वाली ममता नाम की महिला लापता है और उसे जबरदस्ती धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जा रहा है। जांच-पड़ताल के बाद पुलिस की टीम दिल्ली के मुस्तफाबाद पहुंची, जहां एक संकरी गली के अंदर बने अब्दुल रहमान के घर से ममता को बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि अब्दुल रहमान ही इस अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का मुख्य संचालक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्दुल रहमान ने न सिर्फ ममता का नाम बदलकर ‘शिफा’ रखवाया, बल्कि उस पर इस्लामिक रीति-रिवाज़ अपनाने का दबाव भी डाला गया। उसकी पहचान, कपड़े, बोलचाल और रहन-सहन तक बदलने की कोशिश की गई। जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसे धमकाया गया और बाहर की दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया।


वीडियो आया सामने

न्यूज़ चैनल ‘आज तक’ को अब्दुल रहमान के घर का वीडियो हाथ लगा है जिसमें वह जगह साफ़ तौर पर देखी जा सकती है जहाँ ममता को रखा गया था। वीडियो में एक कमरे को धार्मिक साहित्य, हिजाब और अरबी किताबों से भरा हुआ दिखाया गया है। यह कमरा एक तरह का ‘धार्मिक प्रशिक्षण केंद्र’ जैसा लग रहा था, जहां कथित तौर पर धर्मांतरण से पहले ‘नई पहचान’ की तैयारी कराई जाती थी।

वीडियो में यह भी देखा गया कि घर के अंदर कई अन्य दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस मौजूद हैं, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क के तार किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथी संगठन से तो नहीं जुड़े हैं।


पीड़िता की आपबीती

पुलिस द्वारा छुड़ाए जाने के बाद ममता ने जो बयान दिया, वह बेहद चौंकाने वाला है। उसने बताया कि उसे ‘धार्मिक शुद्धिकरण’ के नाम पर बरगलाया गया और बताया गया कि अगर वह इस्लाम कबूल कर लेगी तो उसकी सभी परेशानियाँ खत्म हो जाएंगी। उसे यह यकीन दिलाया गया कि “इस्लाम अपनाने से उसकी ज़िन्दगी बेहतर हो जाएगी और अल्लाह उसकी मदद करेगा।”

ममता ने कहा, “मुझसे कहा गया कि मेरे पुराने कर्म ही मेरी परेशानियों की वजह हैं, और अगर मैं इस्लाम अपना लूं तो सबकुछ बदल जाएगा। उन्होंने मुझे डराया भी, कहा कि अगर मैंने मना किया तो मेरी ज़िंदगी नर्क बना देंगे।”


मास्टरमाइंड कौन है अब्दुल रहमान?

अब्दुल रहमान मुस्तफाबाद का निवासी है और उसके खिलाफ पहले से ही कई संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कई वर्षों से धर्मांतरण से जुड़े मामलों में संलिप्त रहा है, लेकिन उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण वह अब तक गिरफ्त से बाहर था।

बताया जा रहा है कि वह गरीब, कमजोर और समस्याग्रस्त महिलाओं को चिन्हित करता था और फिर उन्हें मानसिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश करता था। कई बार आर्थिक मदद और भावनात्मक सहारा देकर वह उनका विश्वास जीतता था, जिसके बाद उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाता था।


पुलिस और एजेंसियों की कार्रवाई

अब्दुल रहमान के खिलाफ अब IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें अपहरण, जबरन धर्मांतरण, धोखाधड़ी, धमकी और महिला को अवैध तरीके से कैद में रखने जैसे संगीन आरोप शामिल हैं। इसके अलावा आगरा पुलिस, दिल्ली पुलिस और IB की टीमें इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वह इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या अब्दुल रहमान का संपर्क किसी कट्टरपंथी संगठन से था, या क्या वह सोशल मीडिया और धार्मिक संगठनों के ज़रिए अपने शिकार तक पहुंचता था।


कानूनी और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मच गई है। कई संगठनों ने इस घटना को ‘जिहादी धर्मांतरण साजिश’ करार दिया है और दिल्ली सरकार से इस तरह की गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

विहिप (VHP) और बजरंग दल जैसे संगठनों ने अब्दुल रहमान को फौरन फांसी की सज़ा देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी कहा है कि इस तरह के कृत्य इस्लाम के नाम पर कलंक हैं।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ममता के बयान और जब्त सामान से यह साबित हो जाता है कि यह एक संगठित गिरोह था, तो इसके खिलाफ NIA जांच भी की जा सकती है।


अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या ममता अकेली पीड़िता है या फिर इस जाल में अन्य महिलाएं और युवक भी फंसे हैं। मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज और जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ के जरिए पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि धर्मांतरण के लिए क्या कोई फंडिंग नेटवर्क भी काम कर रहा था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमें संदेह है कि यह एक बड़ा रैकेट है और अब्दुल रहमान महज़ एक मोहरा हो सकता है। इसके पीछे कोई बड़ा संगठन या फंडिंग चैनल हो सकता है।”


धर्मांतरण कानून और इस पर बहस

भारत के कई राज्यों में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध कानून लागू हो चुके हैं। दिल्ली में अभी ऐसा कोई कानून नहीं है, लेकिन इस घटना के बाद यह मांग ज़ोर पकड़ रही है कि राजधानी में भी जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध कानून लाया जाए।

संविधान के अनुच्छेद 25 में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन यह तभी मान्य है जब वह स्वेच्छा से हो। यदि कोई व्यक्ति लालच, धोखे या भय के आधार पर धर्म बदलता है, तो वह गैरकानूनी है।


निष्कर्ष

मुस्तफाबाद में अब्दुल रहमान के घर से खुली यह ‘धर्मांतरण फैक्टरी’ न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता के लिए भी एक चेतावनी है। यह घटना दर्शाती है कि किस तरह गरीब, असहाय और अकेली महिलाओं को मानसिक रूप से निशाना बनाकर उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

यह मामला जल्द ही देशभर में बहस का विषय बन सकता है और इससे जुड़े कानूनी, धार्मिक और सामाजिक पहलुओं पर नई बहस की शुरुआत होगी। फिलहाल, ममता सुरक्षित है और अब्दुल रहमान पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन असली सवाल यह है – क्या इसी तरह की और भी ‘धर्मांतरण फैक्ट्रियाँ’ देश में कहीं और भी चल रही हैं?

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