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बिहार में फिर वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव: पकड़ाए नाबालिगों ने बताई हैरान करने वाली वजह

Stones pelted on Vande Bharat Express again in Bihar: Minors caught reveal shocking reason

पटना/गया — बिहार में वंदे भारत एक्सप्रेस पर एक बार फिर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। इस बार घटना गया जिले के पास हुई, जहां कुछ नाबालिग लड़कों ने ट्रेन पर पथराव किया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन नाबालिगों को पकड़ लिया। पूछताछ में इन बच्चों ने जो वजह बताई, वह न सिर्फ हैरान करने वाली है बल्कि एक गहरी सामाजिक समस्या की ओर भी इशारा करती है।


वंदे भारत पर फिर हमला

बुधवार शाम लगभग 4:45 बजे हावड़ा से नई दिल्ली जा रही 22302 अप वंदे भारत एक्सप्रेस गया-पटना सेक्शन में जैसे ही तिलैया और पथरोटा के बीच पहुंची, तभी कुछ अज्ञात लड़कों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके। पत्थर सीधे ट्रेन के कोच नंबर C-3 की खिड़की पर आ लगे, जिससे खिड़की का शीशा टूट गया। हालांकि, इस हमले में कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन यात्रियों में डर का माहौल जरूर बन गया।

यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी गया, किऊल, सासाराम, और जहानाबाद जैसे क्षेत्रों में वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।


RPF की त्वरित कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही RPF और GRP की संयुक्त टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। रेलवे की CCTVs और स्थानीय लोगों की मदद से पहचान कर तीन नाबालिग लड़कों को हिरासत में लिया गया। पकड़े गए बच्चों की उम्र 13 से 15 साल के बीच है।

आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव कुमार ने बताया:

“शुरुआती पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्होंने यह काम सिर्फ ‘मज़े’ के लिए किया। उन्हें ट्रेन का तेज़ी से गुजरना रोमांचक लगता है और वे यह देखने के लिए पत्थर फेंकते हैं कि ट्रेन कितनी तेज़ चल रही है।”


वजहें: ‘शौक’, ‘रोमांच’, और मोबाइल गेम्स का असर

आरपीएफ द्वारा की गई पूछताछ में बच्चों ने कई चौंकाने वाली बातें बताईं। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘Free Fire’ और ‘PUBG’ जैसे वीडियो गेम्स में ट्रेन पर हमले करने जैसे सीन देखने को मिले थे, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने असल जिंदगी में ऐसा करने की कोशिश की।

इसके अलावा, एक नाबालिग ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ दोस्तों ने उन्हें ‘चैलेंज’ दिया था कि अगर वे चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकेंगे तो उनका वीडियो वायरल होगा। हालांकि ऐसा कोई वीडियो बरामद नहीं हुआ है, लेकिन यह स्वीकारोक्ति सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को उजागर करती है।


रेलवे पर लगातार हो रहे हैं हमले

वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी कोई नई बात नहीं रह गई है। पिछले एक साल में बिहार और झारखंड में ट्रेन पर ऐसे 40 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। खासकर नई, चमचमाती ट्रेनों को निशाना बनाया जा रहा है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें ग्रामीण इलाकों में जब तेज़ी से गुजरती हैं, तो बच्चों और किशोरों को यह ‘एडवेंचर’ जैसा लगता है। इसका नतीजा होता है कि वे ट्रेन पर पत्थर मारते हैं या रेलवे ट्रैक के किनारे खतरनाक हरकतें करते हैं।


कानून और सज़ा

रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत चलती ट्रेन पर पथराव एक गंभीर अपराध है। इसके लिए सात साल तक की जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। हालांकि, नाबालिग होने के कारण इन बच्चों को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बाल सुधार गृह भेजे जाने की संभावना है।

आरपीएफ कमांडेंट विजय प्रकाश ने कहा:

“हमारे लिए यह सिर्फ कानून का मामला नहीं है, यह एक सामाजिक चेतना का सवाल भी है। हम स्कूलों और पंचायतों के साथ मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाएंगे ताकि बच्चे समझ सकें कि यह महज मज़ाक नहीं, एक गंभीर अपराध है।”


माता-पिता और स्कूल की भूमिका

पकड़े गए नाबालिगों के माता-पिता भी इस घटना से बेहद शर्मिंदा हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनके बच्चे इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। कुछ अभिभावकों ने स्वीकार किया कि वे अपने बच्चों के मोबाइल उपयोग या दिनभर की गतिविधियों पर नज़र नहीं रख पाते।

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र वर्मा कहते हैं:

“आज के दौर में सोशल मीडिया और वीडियो गेम्स बच्चों की सोच और व्यवहार को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। स्कूलों में ऐसे मामलों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाने की ज़रूरत है।”


रेलवे की योजना: जागरूकता और निगरानी

पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के तहत आने वाले गया मंडल में अब विशेष सतर्कता बढ़ाई जा रही है। RPF द्वारा कुछ योजनाएं बनाई गई हैं:

  1. ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत ट्रैक के पास रहने वाले बच्चों को ट्रेन सुरक्षा और खतरों की जानकारी देने वाले सेशंस होंगे।
  2. ड्रोन निगरानी के माध्यम से पथराव संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां CCTV लगाए जाएंगे।
  3. स्थानीय मुखिया और सरपंचों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें भी बच्चों के व्यवहार पर नज़र रखने के लिए कहा जाएगा।

सामाजिक सोच में बदलाव की ज़रूरत

यह घटना न केवल कानून व्यवस्था बल्कि समाजिक मूल्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। जिस उम्र में बच्चों को किताबें, खेल और संस्कारों की सीख मिलनी चाहिए, उस उम्र में वे ‘वायरल वीडियो’ और ‘डिजिटल चैलेंज’ के पीछे चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंक रहे हैं।

वरिष्ठ समाजशास्त्री प्रो. अनीता द्विवेदी कहती हैं:

“यह तकनीक और समाज के बीच बढ़ते फासले की एक त्रासदी है। हमें बच्चों के डिजिटल व्यवहार और सामाजिक संपर्क पर गहरी नज़र रखनी होगी।”


निष्कर्ष

वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों पर पत्थरबाजी केवल रेलवे की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि यह यात्रियों की जान के लिए भी खतरा है। बिहार में हालिया घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या हमारा समाज तकनीक के साथ सामंजस्य बिठा पा रहा है?

इस घटना में शामिल नाबालिगों को सुधार की ज़रूरत है, और उनके माता-पिता, स्कूल, और समाज को मिलकर यह जिम्मेदारी उठानी होगी। वहीं रेलवे को भी चाहिए कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी और जनजागरूकता दोनों को प्राथमिकता दे।


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