दिल्ली विधानसभा का आगामी मानसून सत्र अब एक नई तकनीकी दिशा में कदम रखने जा रहा है। यह सत्र पूरी तरह पेपरलेस होगा, यानी अब विधायकों को कार्यवाही, प्रश्नोत्तर, विधेयकों, नोटिस आदि की हार्ड कॉपी नहीं दी जाएगी, बल्कि वे सबकुछ एक टैबलेट के माध्यम से डिजिटल फॉर्मेट में देख सकेंगे। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए तीन दिवसीय सत्र में विधायकों को नेवा (NeVA – National eVidhan Application) सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग दी जाएगी।
यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, कुशलता और समय की बचत भी सुनिश्चित करेगी। चलिए इस बदलाव को विस्तार से समझते हैं — इसके पीछे की मंशा, तैयारी, ट्रेनिंग की प्रक्रिया, विधायकों की प्रतिक्रियाएं और इसका राष्ट्रीय महत्व।
क्या है नेवा (NeVA) प्रोजेक्ट?
नेवा यानी National eVidhan Application केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल है, जो देश की सभी विधानसभाओं और संसद को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य है कि विधायकों को डिजिटल डिवाइस के माध्यम से सारी संसदीय सूचनाएं, दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई जाएं।
नेवा के माध्यम से:
- विधायक ऑनलाइन प्रश्न भेज सकते हैं
- नोटिस दे सकते हैं
- विधेयक पढ़ सकते हैं
- चर्चाओं में भाग ले सकते हैं
- मतदान तक डिजिटल माध्यम से हो सकता है
यह सारी प्रक्रिया एक एकीकृत पोर्टल के जरिये होती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
दिल्ली विधानसभा का नया अध्याय
दिल्ली विधानसभा में यह मानसून सत्र इस मायने में ऐतिहासिक होगा कि यह राजधानी का पहला पूर्णत: डिजिटल सत्र होगा। विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने इस योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि 22 जुलाई से शुरू होने जा रहे तीन दिवसीय सत्र में नेवा पोर्टल के तहत विधायक डिजिटल रूप से हिस्सा लेंगे।
कार्यक्रम का शेड्यूल:
- दिन 1 (22 जुलाई): विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे, उन्हें लॉगिन आईडी-पासवर्ड और ऐप नेविगेशन की जानकारी दी जाएगी
- दिन 2: ट्रायल रन, मॉक सेशन, डिजिटल प्रश्नोत्तर की प्रक्रिया
- दिन 3: वास्तविक प्रश्नकाल, शून्यकाल, बिल पेश करने और बहस की डिजिटल प्रक्रिया का रिहर्सल
इसके बाद आधिकारिक मानसून सत्र 25 जुलाई से शुरू होगा, जो पूरी तरह पेपरलेस होगा।
विधायकों को दिए जाएंगे टैबलेट
पेपरलेस सत्र की तैयारी के तहत हर विधायक को एक टैबलेट डिवाइस दिया जाएगा, जो उनकी लॉगिन आईडी के साथ कनेक्टेड होगा। टैबलेट में नेवा ऐप पहले से इंस्टॉल होगी और उसमें दिल्ली विधानसभा से जुड़ी सारी कार्यवाही डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी।
टैबलेट से क्या-क्या किया जा सकेगा?
- प्रश्न पूछना और पढ़ना
- नियम 280 के तहत नोटिस देना
- प्रस्ताव रखना
- संशोधन भेजना
- बिल पढ़ना और बहस में हिस्सा लेना
- वोटिंग करना
तीन दिवसीय ट्रेनिंग: विधायकों को किया जाएगा टेक्नोलॉजी के लिए तैयार
हर विधायक को डिजिटल कामकाज के लिए पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि कोई तकनीकी परेशानी न हो। यह ट्रेनिंग न केवल टैबलेट की बेसिक समझ सिखाएगी, बल्कि नेवा पोर्टल के इंटरफेस, लॉगिन प्रोसेस, डॉक्युमेंट एक्सेस, संशोधन/नोटिस अपलोड और डिजिटल वोटिंग प्रक्रिया को भी स्पष्ट करेगी।
ट्रेनिंग के मुख्य पहलू:
- यूजर इंटरफेस की समझ: टैबलेट पर कैसे लॉगिन करें, कैसे ऐप खोलें, कहां से दस्तावेज खोजें
- प्रश्नोत्तर की प्रक्रिया: ऑनलाइन प्रश्न कैसे सबमिट करें, उत्तर कैसे देखें
- बिल/नोटिस कैसे पढ़ें और संसोधन भेजें
- डिजिटल हस्ताक्षर और वोटिंग प्रक्रिया
- साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग: डाटा सुरक्षा, गोपनीयता और लॉग आउट संबंधी जरूरी बातें
पर्यावरण और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली विधानसभा में हर सत्र के दौरान हजारों पेज प्रिंट होते हैं, जिनमें सवाल-जवाब, बिल, प्रस्ताव, अधिसूचना आदि शामिल होते हैं। अब जब यह प्रक्रिया डिजिटल होगी, तो पेपर की भारी बचत होगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
कुछ अनुमान:
- हर सत्र में औसतन 20 लाख पेज प्रिंट होते हैं
- एक साल में पेपर बचत से लगभग 500 पेड़ों को काटने से रोका जा सकेगा
- प्रिंटिंग, बाइंडिंग और डिलीवरी में लगने वाला समय और पैसा बचेगा
विधायक क्या कह रहे हैं?
पेपरलेस सत्र को लेकर विधायकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विपक्ष के विधायक जहां इसे “सराहनीय पर देर से लिया गया फैसला” बता रहे हैं, वहीं कुछ वरिष्ठ विधायक तकनीकी चुनौती को लेकर चिंतित हैं।
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा,
“नेवा पोर्टल देश को आगे ले जाने वाला कदम है। इससे समय, संसाधन और पर्यावरण तीनों की बचत होगी।”
वहीं भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा,
“डिजिटल कार्यवाही अच्छी बात है, लेकिन टेक्नोलॉजी का भरोसेमंद होना और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।”
राष्ट्रीय स्तर पर नेवा की स्थिति
देश के कई राज्यों में नेवा प्रोजेक्ट लागू हो चुका है या परीक्षण के दौर में है:
- नगालैंड विधानसभा देश की पहली पूरी तरह पेपरलेस विधानसभा बनी थी
- उत्तर प्रदेश, गोवा, हिमाचल, ओडिशा, राजस्थान में भी आंशिक रूप से नेवा लागू
- संसद में भी डिजिटल ट्रांजिशन की तैयारी चल रही है
केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक भारत की सभी विधानसभाएं डिजिटल हों।
क्या चुनौतियां हैं?
- वरिष्ठ विधायकों की डिजिटल साक्षरता एक चिंता का विषय हो सकती है
- साइबर सिक्योरिटी, डाटा चोरी और नेटवर्क फेलियर जैसी तकनीकी समस्याएं
- फुल ट्रांजिशन में समय लग सकता है — अभी दस्तावेज की स्कैनिंग, फॉर्मेटिंग और अपलोडिंग मैनुअल है
- भाषाई विविधता — विधेयकों को हिंदी/अंग्रेजी दोनों में अपलोड करना
निष्कर्ष
दिल्ली विधानसभा का पेपरलेस मानसून सत्र न केवल राजधानी की कार्यप्रणाली में एक आधुनिक परिवर्तन है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को डिजिटल युग में ले जाने का प्रतीक भी है। जहां यह कदम तकनीकी कुशलता और पारदर्शिता को बढ़ाएगा, वहीं यह पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
अब देखना होगा कि यह बदलाव कितनी सहजता और दक्षता से लागू होता है और क्या अन्य राज्य विधानसभाएं भी दिल्ली की तरह इसका अनुसरण करेंगी।















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