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अमित शाह का उत्तराखंड दौरा: “तेज़ विकास, मज़बूत इन्फ्रास्ट्रक्चर और गरीबों का सशक्तिकरण—नए भारत की पहचान

Amit Shah's Uttarakhand visit: "Rapid development, strong infrastructure and empowerment of the poor—the identity of the new India

रुद्रपुर (उत्तराखंड) में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की आर्थिक यात्रा, बुनियादी ढांचे के क्रांतिकारी विकास और औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ गरीबों के कल्याण को लेकर एक विस्तृत और आत्मविश्वास से भरा वक्तव्य दिया। उनका यह संबोधन न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नीति-दृष्टि और नई दिशा का संकेत देता है।

विकास की तेज़ रफ्तार: आंकड़े खुद बोलते हैं

अमित शाह ने बताया कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जिस रफ्तार से आर्थिक प्रगति की है, वह अभूतपूर्व है। सेवा क्षेत्र का निर्यात दोगुना हुआ है और कुल निर्यात में 76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।”

भारत की GDP में निर्यात का योगदान लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से आईटी, हेल्थकेयर, एजुकेशन, और टूरिज्म जैसे सेवा क्षेत्रों में भारत ने विश्व मंच पर अपनी मज़बूत पकड़ बनाई है। शाह के मुताबिक, इन क्षेत्रों के तेज़ विकास ने न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित की है, बल्कि देश के युवाओं को रोज़गार के नए अवसर भी दिए हैं।

औद्योगिक विकास बनाम गरीब कल्याण—एक झूठा मिथक

अपने भाषण में अमित शाह ने एक पुराने और व्यापक मिथक को तोड़ते हुए कहा कि, “यह कहना गलत है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास केवल अमीरों के लिए होते हैं। असल में, यही क्षेत्र गरीबों को रोज़गार, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी ज़रूरतें प्रदान करते हैं।”

उन्होंने उदाहरण दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह देशभर में हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क, और औद्योगिक गलियारे बनाए गए हैं, उनसे लाखों गरीबों को रोज़गार मिला है। साथ ही, इन विकास परियोजनाओं ने गांव और छोटे शहरों को आर्थिक गतिविधियों के केंद्र में ला खड़ा किया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर से बदल रही है गरीब की जिंदगी

गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि किस तरह पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना जैसे अभियानों ने गरीबों की जीवनशैली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है।

  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देश के करोड़ों गरीबों को पक्के मकान मिले हैं।
  • जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खासकर महिलाओं की दिनचर्या में बड़ा परिवर्तन आया है।
  • स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई आई, बल्कि स्वास्थ्य स्तर में भी सुधार हुआ।

उत्तराखंड में विकास की बयार

उत्तराखंड की बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य में पिछले 10 वर्षों में केंद्रीय सरकार ने रिकॉर्ड निवेश किया है। उन्होंने विशेष रूप से रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन, और औद्योगिक क्लस्टरों की बात की।

उन्होंने कहा, “उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्य में बुनियादी ढांचा मज़बूत करना न सिर्फ विकास का सवाल है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा है।” अमित शाह ने यह भी बताया कि सीमा पर बुनियादी ढांचे की मजबूती से न केवल सेना को सुविधा मिली है, बल्कि सीमावर्ती गांवों में भी विकास की रफ्तार तेज हुई है।

सेवा क्षेत्र से बदली तस्वीर

सेवा क्षेत्र को लेकर अमित शाह ने कहा कि डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों ने गांव-गांव तक डिजिटल सेवाओं को पहुंचाया है। इससे न केवल स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि ग्रामीण भारत भी वैश्विक सेवा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बना है।

उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी, फिनटेक, हेल्थकेयर और ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से गांव के नौजवान अब मेट्रो शहरों पर निर्भर नहीं हैं। डिजिटलीकरण ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है।

गरीबों को मुख्यधारा से जोड़ने की नीति

अमित शाह ने अपने भाषण में दोहराया कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने गरीबों को “सरकारी योजनाओं के लाभार्थी” नहीं, बल्कि “विकास प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी” के रूप में देखा है।

उन्होंने DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) की सफलता की बात की, जिससे बिचौलियों को खत्म किया गया और लाभ सीधे गरीबों तक पहुंचा। इससे न केवल पारदर्शिता आई, बल्कि करोड़ों रुपये की बचत भी हुई।

नए भारत की सोच: इन्फ्रास्ट्रक्चर = समावेशी विकास

गृह मंत्री का पूरा भाषण इस विचार के इर्द-गिर्द घूमता रहा कि अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगीकरण को ठीक से योजनाबद्ध किया जाए, तो वह देश के सबसे गरीब तबके के लिए भी वरदान साबित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नया भारत अब उस सोच से आगे बढ़ चुका है, जहां विकास को केवल जीडीपी ग्रोथ या बड़ी इमारतों से मापा जाता था। अब विकास का मापदंड यह है कि कितना गरीब अपने पैरों पर खड़ा हुआ, कितने गांवों में रोशनी पहुंची, कितने घरों में शौचालय बने और कितनी महिलाओं को सम्मानजनक जीवन मिला।

रोज़गार, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम

अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का पूरा ध्यान अब युवाओं को रोज़गार और स्वरोज़गार देने पर है। उन्होंने कहा, “स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मुद्रा योजना, और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों ने देश के करोड़ों युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।”

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां प्रवास की समस्या पुरानी रही है, वहां अब युवा गांव में ही स्वरोजगार कर रहे हैं, और यह तभी संभव हुआ जब सड़कों, बिजली, इंटरनेट और बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव तक पहुंचीं।


निष्कर्ष: अमित शाह का संदेश—विकास सबका, विश्वास सबका

रुद्रपुर से अमित शाह ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मोदी सरकार का “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एक ठोस नीति है। भारत के विकास मॉडल में अब गरीब को दरकिनार नहीं किया जाता, बल्कि उसे केंद्र में रखा गया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर हो या निर्यात, सेवा क्षेत्र हो या औद्योगीकरण—हर योजना का अंतिम उद्देश्य गरीब को सशक्त बनाना और नए भारत का भागीदार बनाना है। यही है “विकास के साथ विश्वास” की असली परिभाषा।

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