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महाराष्ट्र में रोहित पवार और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस: नितिन देशमुख की कथित पिटाई और राजनीतिक तनाव

Heated argument between Rohit Pawar and police officer in Maharashtra: Alleged beating of Nitin Deshmukh and political tension

राजनीतिक उथल-पुथल और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस बार मामला सीधे एक विधायक और पुलिस के बीच हुए तीखे टकराव से जुड़ा है। शुक्रवार को मुंबई के आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन पर जो कुछ हुआ, उसने ना सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर भी कई सवाल खड़े कर दिए। मामला है एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार और पुलिस अधिकारी के बीच हुई बहस का, जो कि एक घायल पार्टी कार्यकर्ता की तलाश के दौरान हुई।

घटना का क्रम

शुक्रवार को एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार और जितेन्द्र आव्हाड मुंबई के आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन पहुंचे। वे एक घायल पार्टी कार्यकर्ता नितिन देशमुख को ढूंढ रहे थे, जो कथित रूप से बीजेपी के एमएलसी गोपीचंद पडळकर के समर्थकों द्वारा पीटे गए थे। नितिन देशमुख, एनसीपी नेता जितेन्द्र आव्हाड के करीबी माने जाते हैं।

घटना के बाद यह स्पष्ट नहीं था कि नितिन देशमुख को पूछताछ के लिए किस पुलिस स्टेशन में ले जाया गया है या उन्हें इलाज के लिए कहां भर्ती कराया गया है। इसी भ्रम की स्थिति के कारण पवार और आव्हाड उन्हें ढूंढने निकले और आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन पहुंचे।

वीडियो वायरल: पुलिस से उलझे रोहित पवार

एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसमें विधायक रोहित पवार गुस्से में पुलिस अधिकारी से बहस करते नजर आए। वीडियो में पवार एक पुलिस अधिकारी से कहते हैं, “आवाज़ मत ऊंची करो। अगर बोलना नहीं आता है तो मत बोलो।” उनका यह तीखा लहजा और शब्द साफ तौर पर उनके गुस्से और निराशा को दर्शाता है।

रोहित पवार की प्रतिक्रिया

बाद में विधानसभा परिसर (विधान भवन) में पत्रकारों से बात करते हुए रोहित पवार ने कहा कि पुलिस अधिकारी ने उनसे बदसलूकी की, आवाज़ ऊंची की और स्पष्ट जानकारी देने से बचते रहे। “हम सिर्फ अपने सहयोगी के बारे में जानकारी लेने आए थे। लेकिन पुलिस की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उल्टे हमसे ही रूखा व्यवहार किया गया,” पवार ने कहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पुलिस का असंवेदनशील रवैया था, और इससे यह प्रतीत होता है कि शायद सरकार के इशारे पर यह व्यवहार हो रहा है।

जितेन्द्र आव्हाड का बयान

एनसीपी विधायक जितेन्द्र आव्हाड, जो स्वयं इस घटनाक्रम का हिस्सा थे, उन्होंने भी रोहित पवार के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नितिन देशमुख को लेकर पुलिस की भूमिका संदिग्ध थी और वह पारदर्शी नहीं दिख रही थी। “अगर कोई कार्यकर्ता घायल होता है और उसके नेताओं को जानकारी तक नहीं मिलती, तो यह बहुत गंभीर मामला है,” आव्हाड ने कहा।

घायल कार्यकर्ता: नितिन देशमुख कौन हैं?

नितिन देशमुख, जितेन्द्र आव्हाड के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से एनसीपी के लिए काम कर रहे हैं। वे किसी प्रदर्शन या राजनीतिक विरोध के दौरान घायल हुए या उन्हें निशाना बनाया गया – इस बात की अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, उनकी पिटाई बीजेपी नेता गोपीचंद पडळकर के समर्थकों द्वारा की गई थी। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि यह हमला जानबूझकर राजनीतिक द्वेषवश किया गया।

गोपीचंद पडळकर पर आरोप

भाजपा एमएलसी गोपीचंद पडळकर, जो कि अपने आक्रामक बयानों और आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, उनके समर्थकों पर यह गंभीर आरोप लगना विपक्ष के लिए एक हथियार बन गया है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक पडळकर की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

इस पूरी घटना ने एक बार फिर से महाराष्ट्र पुलिस की निष्पक्षता और कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रही है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को परेशान किया जा रहा है।

इससे पहले भी महाराष्ट्र में विपक्षी नेताओं ने यह आरोप लगाए हैं कि पुलिस दबाव में काम कर रही है और सरकार विरोधी आवाजों को दबाया जा रहा है।

राजनीतिक मायने और असर

इस घटना को सिर्फ एक विधायक और पुलिस के बीच की झड़प कहकर नहीं टाला जा सकता। यह मामला महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को उजागर करता है, जहां विपक्षी दलों को लगातार सत्ताधारी दल की तरफ से दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एनसीपी (शरद पवार गुट) इस समय बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन के विरोध में मुखर है और राज्य में विपक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

रोहित पवार, जो कि शरद पवार के परिवार से हैं, युवाओं में अपनी लोकप्रियता और बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। इस घटना के बाद उन्हें विपक्ष का चेहरा बनाकर पेश किया जा सकता है। वहीं जितेन्द्र आव्हाड जैसे अनुभवी नेता उनके समर्थन में सामने आकर इस मुद्दे को और गंभीर बना रहे हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

घटना के वीडियो वायरल होते ही ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने रोहित पवार के गुस्से को जायज़ ठहराया, जबकि कुछ ने इसे “अनुशासनहीनता” बताया। वहीं कुछ यूज़र्स ने सवाल उठाया कि क्या एक विधायक का पुलिस स्टेशन में जाकर ऐसा व्यवहार करना उचित है?

हालांकि, विपक्ष समर्थक यूज़र्स ने दावा किया कि जब जनता के प्रतिनिधि को ही जवाब नहीं मिल रहा, तो आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है।

सरकार की चुप्पी

अब तक महाराष्ट्र सरकार की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे या उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न तो इस घटना की निंदा की और न ही पुलिस के रवैये को लेकर कोई सफाई दी है। यह चुप्पी अपने आप में कई संकेत दे रही है।

आगे की कार्रवाई?

एनसीपी के नेताओं ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह भी संभावना है कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा और विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करेगा।

यदि आरोप साबित होते हैं, तो बीजेपी और पडळकर की छवि को बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं अगर पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप सही साबित होता है, तो यह महाराष्ट्र की कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट होगा।

निष्कर्ष

इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर उबाल पर ला दिया है। एक घायल कार्यकर्ता की तलाश में विधायक का पुलिस से उलझना एक साधारण घटना नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक राजनीतिक संघर्ष और अविश्वास को दर्शाता है जो राज्य में लगातार गहराता जा रहा है। रोहित पवार और जितेन्द्र आव्हाड की सक्रियता बताती है कि विपक्ष अब खामोश बैठने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है और महाराष्ट्र की सियासत में नई करवट ले सकता है।

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