नई दिल्ली, 18 जुलाई 2025: अमेरिका ने भारत में सक्रिय पाकिस्तान-समर्थित आतंकी संगठन “द रेजिस्टेंस फ्रंट” (TRF) को आधिकारिक रूप से एक विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित कर दिया है। यह कदम दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है, जिसमें कई अमरनाथ श्रद्धालु घायल हुए थे। अमेरिका के इस फैसले को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।
TRF: लश्कर का नया मुखौटा
TRF की स्थापना 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुई थी। भारत की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि TRF असल में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का ही नया चेहरा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने और स्थानीय कश्मीरी रंग देने के लिए बनाया गया। TRF ने सोशल मीडिया और टेलीग्राम के ज़रिए कई हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिनमें पत्रकारों, कश्मीरी पंडितों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया।
FTO घोषित होने के क्या मायने हैं?
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा TRF को FTO घोषित करने के बाद:
- TRF के अमेरिका स्थित सभी फंड और संपत्ति जब्त हो जाएंगे।
- इससे जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था को अमेरिका में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
- भारत को वैश्विक आतंकवाद विरोधी गठबंधन से और अधिक सहयोग मिलेगा।
पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि
14 जुलाई को अमरनाथ यात्रा मार्ग के पास पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले के पीछे TRF के लड़ाकों की भूमिका बताई जा रही है। इसी के बाद भारत की सेनाओं ने “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया, जिसमें कई संदिग्धों की धर-पकड़ और सीमा पार आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल कार्रवाई की गई।
सूत्रों के अनुसार, TRF के सक्रिय मॉड्यूल अब मुरीदके से शिफ्ट होकर बाहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के पुराने ठिकानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क में यह रणनीतिक बदलाव भारत की जवाबी नीति से बचने के लिए किया गया है।
अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला?
अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने अपने बयान में कहा:
“TRF भारत में लश्कर और ISI के इशारों पर नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसे बैन करना आतंकवाद के खिलाफ हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
अमेरिका की तरफ से यह कदम न सिर्फ भारत के साथ खड़े होने का संकेत है, बल्कि पाकिस्तान पर भी दबाव बनाने की रणनीति है कि वह अपनी जमीन से चलने वाले आतंकी ढांचे को खत्म करे।
भारत का रुख और रणनीति
भारत पहले ही TRF को गैरकानूनी संगठन घोषित कर चुका है और एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) इसके खिलाफ कड़े एक्शन ले रही है। अमेरिका के फैसले से भारत की कोशिशों को और कानूनी व कूटनीतिक बल मिलेगा।
भारत की खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TRF अब कश्मीर घाटी में “हाइब्रिड आतंकवाद” को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें स्थानीय युवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ब्रेनवॉश कर छोटी-छोटी आतंकी वारदातों के लिए तैयार किया जा रहा है।
निष्कर्ष:
TRF पर अमेरिकी प्रतिबंध एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता है, जो भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति की पुष्टि करता है। अब देखने वाली बात होगी कि पाकिस्तान पर इस कूटनीतिक दबाव का क्या असर होता है। लेकिन इतना तय है कि पहलगाम जैसे हमलों के बाद भारत अब किसी भी साजिश को माफ करने के मूड में नहीं है।















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