एक बार फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े दोहरे चरित्र को बेनकाब कर दिया है। अमेरिका ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जिम्मेदार समूह The Resistance Front (TRF) को आधिकारिक रूप से “विदेशी आतंकवादी संगठन” (Foreign Terrorist Organization) और “विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी इकाई” (Specially Designated Global Terrorist Entity) घोषित कर दिया है। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें पर्यटक और स्थानीय नागरिक शामिल थे।
मार्को रुबियो का सख्त संदेश
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस घोषणा के साथ स्पष्ट संदेश दिया कि अमेरिका, भारत के साथ मिलकर सीमापार आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है। उन्होंने TRF की पहचान एक कट्टरपंथी और घातक संगठन के रूप में की जो पाकिस्तान की सरपरस्ती में काम कर रहा है। रुबियो ने कहा, “कोई भी देश जो आतंकवाद को समर्थन देता है, उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जवाबदेह होना होगा।”
भारत ने जताया स्वागत, कहा – ये वैश्विक गठबंधन की मजबूती का प्रतीक
भारत सरकार ने अमेरिका के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया और इसे भारत-अमेरिका के बढ़ते आतंकवाद-विरोधी सहयोग का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह निर्णय फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा और उसके बाद जारी हुए भारत-अमेरिका संयुक्त बयान की परिणति है।
संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की गई थी और पाकिस्तान से 26/11 मुंबई हमले और पठानकोट हमले के दोषियों को सजा दिलाने की मांग दोहराई गई थी। इस फैसले ने TRF जैसे संगठनों की ‘स्थानीय विद्रोह’ की झूठी छवि को भी उजागर कर दिया है।
TRF – लश्कर का नया चेहरा, ISI की योजना का हिस्सा
TRF की स्थापना 2019 में उस समय हुई थी जब भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया। इसके बाद पाकिस्तान के लिए एक नया नैरेटिव बनाना जरूरी था – TRF उसी कूटनीति का हिस्सा बना। हालांकि TRF का दावा रहा है कि वह “घरेलू कश्मीरी प्रतिरोध” का प्रतीक है, लेकिन खुफिया सूत्रों, इंटरसेप्ट और डिजिटल फुटप्रिंट्स से यह स्पष्ट हो चुका है कि TRF लश्कर-ए-तैयबा का ही नया संस्करण है, जिसे पाकिस्तान की ISI और सेना निर्देशित कर रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि TRF का निर्माण अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों जैसे FATF (Financial Action Task Force) की नज़रों से बचने, बैन से बचने और वैश्विक सहानुभूति पाने के लिए किया गया। यह एक “कवर” संगठन है, जो असल में लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी है। TRF की फंडिंग, ट्रेनिंग, हथियार और नेतृत्व सभी पाकिस्तान से नियंत्रित होते हैं।
चुनिंदा आतंकी घटनाएं जिनमें TRF शामिल रहा
TRF ने पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कई हाई-प्रोफाइल आतंकी हमलों को अंजाम दिया है:
- अप्रैल 2025 – पहलगाम हमला: इस हमले में पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाया गया। कुल 26 लोगों की जान गई।
- जून 2024 – रियासी बस हमला: तीर्थयात्रियों से भरी एक बस पर हमला हुआ, जिसमें 9 लोग मारे गए।
- अक्टूबर 2024 – गांदरबल में प्रवासी मजदूरों की हत्या: छह मजदूरों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
- सितंबर 2023 – अनंतनाग में सेना और पुलिस अफसरों की हत्या।
- जुलाई 2020 – बांदीपोरा में बीजेपी नेता और उनके परिवार की हत्या।
इन सभी घटनाओं में एक पैटर्न देखने को मिला – आम नागरिकों, अल्पसंख्यकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर इलाके में डर और अशांति फैलाना।
पाकिस्तान की फर्जी नैरेटिव की पोल खुली
पाकिस्तान TRF को भारत का ‘घरेलू विद्रोह’ कहता रहा है, लेकिन अमेरिका का यह फैसला पाकिस्तान के झूठे प्रचार की हार है। इससे यह संदेश गया है कि आतंकी चाहे किसी भी नाम या संगठन के बैनर तले हों, वे अंतरराष्ट्रीय कानून से नहीं बच सकते।
इसके अलावा यह भी उजागर हुआ है कि TRF की साजिशें अक्सर पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक संकटों से जुड़ी रही हैं। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि पहलगाम हमला भी पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर के निर्देश पर हुआ था, ताकि देश के भीतर इमरान खान की पार्टी पर हो रही कार्रवाई और जन असंतोष से ध्यान भटकाया जा सके। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इसी राजनीतिक उद्देश्य को साधने के लिए असीम मुनीर ने खुद को गैर-संवैधानिक रूप से “फील्ड मार्शल” घोषित कर दिया।
TRF के शीर्ष आतंकी और संगठन संरचना
भारत सरकार ने जनवरी 2023 में ही TRF को UAPA के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित कर दिया था। इस संगठन के प्रमुख आतंकी चेहरे इस प्रकार हैं:
- शेख सज्जाद गुल: मौजूदा कमांडर, जिसे भारत ने नामित आतंकवादी घोषित किया है।
- मुहम्मद अब्बास शेख: संस्थापक सदस्य, अब मारा जा चुका है।
- बसीत अहमद डार: पूर्व मुख्य ऑपरेशनल कमांडर, मारा जा चुका है।
- अहमद खालिद: प्रवक्ता, वर्तमान में सक्रिय है।
ये सभी आतंकी पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में ट्रेनिंग और ऑपरेशन चलाते हैं।
भारत और अमेरिका का आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प
TRF को आतंकवादी घोषित करना केवल एक कदम नहीं, बल्कि एक वैश्विक संदेश है। भारत और अमेरिका ने फरवरी 2025 में हुए समझौते और उसके तहत QUAD देशों के साझा घोषणापत्र में साफ किया था कि आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका की यह घोषणा उसी दिशा में एक ठोस कार्रवाई है। इससे न केवल TRF की गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय अंकुश लगेगा, बल्कि पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ेगा कि वह आतंकियों को पालने और बचाने की अपनी नीति से पीछे हटे।
निष्कर्ष: आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता की जरूरत
TRF को आतंकवादी संगठन घोषित करने से भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नैतिक बढ़त मिली है और पाकिस्तान की छवि एक बार फिर कटघरे में खड़ी हुई है। लेकिन यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। TRF जैसे संगठनों को खत्म करने के लिए वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर लगातार कार्रवाई करनी होगी।
भारत का यह रुख स्पष्ट है – वह आतंकवाद से समझौता नहीं करेगा, चाहे वह किसी भी रूप में हो। और अब अमेरिका का साथ मिलने के बाद यह लड़ाई और भी मजबूत हो चुकी है। आने वाले समय में भारत उम्मीद करता है कि और भी देश आतंकवाद के खिलाफ ऐसे ही कड़े कदम उठाएंगे और TRF जैसे संगठनों को दुनिया के नक्शे से मिटाने में सहयोग करेंगे।
















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