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पिथौरागढ़ में भीषण सड़क हादसा: नाक चीथ नदी में गिरी सवारियों से भरी गाड़ी, 8 की मौत

Horrific road accident in Pithoragarh: A vehicle full of passengers fell into the Naak Chith river, 8 died

उत्तराखंड के पर्वतीय जिले पिथौरागढ़ में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। एक सवारी गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से फिसलकर गहरी खाई में जा गिरी और सीधा नाक चीथ नदी में समा गई। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ अन्य के घायल होने की सूचना है।

हादसे का विवरण

यह हादसा पिथौरागढ़ जनपद के धारचूला क्षेत्र के पास हुआ, जहां एक मैक्स वाहन (प्राइवेट टैक्सी) यात्रियों को लेकर जा रही थी। जैसे ही वाहन एक मोड़ पर पहुंचा, वह अनियंत्रित होकर करीब 300 मीटर गहरी खाई में गिरते हुए सीधा नदी में जा समाया। हादसे की भयावहता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि गाड़ी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और सवारियों के शव दूर-दूर तक नदी और पत्थरों के बीच बिखर गए।

बचाव और राहत कार्य

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, पुलिस प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। खाई में उतरकर नदी के किनारे-किनारे शवों को खोजा गया और कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें ऊपर लाया गया। खाई की गहराई और दुर्गम भू-भाग के चलते रेस्क्यू में भारी कठिनाई आई।

प्रशासन के अनुसार, अब तक 8 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें कुछ की पहचान हो गई है जबकि बाकी की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं, इस हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है।

मृतकों की पहचान

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मरने वालों में अधिकांश स्थानीय ग्रामीण हैं जो किसी पारिवारिक काम या बाजार के सिलसिले में यात्रा कर रहे थे। कुछ स्कूली छात्र और महिलाएं भी गाड़ी में सवार थीं। मृतकों की पहचान के लिए परिजनों को सूचित किया जा रहा है और डीएनए नमूनों के ज़रिए भी शिनाख्त की प्रक्रिया चलाई जा सकती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिलाधिकारी रिचा सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना बेहद दुखद है और सभी संबंधित विभागों को तत्काल राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वाहन दुर्घटना का कारण ड्राइवर की लापरवाही थी, गाड़ी की तकनीकी खराबी या फिर सड़क की स्थिति।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा:

“पिथौरागढ़ में सड़क हादसे की दुखद खबर अत्यंत पीड़ादायक है। मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर उन्हें इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें। जिला प्रशासन को राहत व बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।”

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता और घायलों के इलाज का खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने की घोषणा की गई है।

खराब सड़कें और पुरानी गाड़ियाँ: पहाड़ों में बार-बार क्यों हो रहे हादसे?

उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में आए दिन इस तरह के हादसे सामने आते हैं। सड़कें संकरी और खतरनाक हैं, गाड़ियों की हालत खराब होती है और ड्राइवरों पर अतिरिक्त दबाव होता है। पिथौरागढ़ से धारचूला और उसके आगे नेपाल सीमा तक जाने वाली सड़कें विशेष रूप से दुर्गम हैं। ऐसे में स्थानीय लोग वर्षों से सरकार से सड़क चौड़ीकरण और सुरक्षा इंतज़ामों की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद हरकत में आता है, जबकि रोजाना सैकड़ों लोग इन जोखिम भरी सड़कों पर जान हथेली पर रखकर यात्रा करते हैं। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी वाहनों के बजाय निजी टैक्सी ऑपरेटर पुराने वाहन चलाते हैं जो तकनीकी रूप से फिट नहीं होते।

हादसे के पीछे संभावित कारण

पुलिस और प्रशासन द्वारा प्रारंभिक रूप से जो कारण सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं:

  • वाहन का ब्रेक फेल होना
  • सड़क पर गीली मिट्टी और फिसलन
  • मोड़ पर तेज रफ्तार
  • ड्राइवर की लापरवाही या झपकी

इन सभी पहलुओं की जांच जारी है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को नदी से बाहर निकालने की भी कोशिश की जा रही है, ताकि यांत्रिक कारणों की पुष्टि हो सके।

निष्कर्ष

पिथौरागढ़ का यह हादसा एक बार फिर उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों की स्थिति और परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि पहाड़ों में जीवन की कठिनाइयों और लोगों की असुरक्षा को भी उजागर करता है।

जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं को केवल ‘दुर्घटना’ समझने के बजाय, एक सिस्टम की असफलता माना जाए और परिवहन नीतियों में सुधार किया जाए।

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