3 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घाना की संसद को संबोधित किया और इस अवसर को भारत-घाना संबंधों के लिए ऐतिहासिक बताया। घाना सरकार की ओर से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक — “ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना” — से सम्मानित किया गया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और घाना की स्थायी मित्रता और साझा मूल्यों को समर्पित किया।
घाना संसद में दिया प्रेरणादायक भाषण
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और घाना की साझेदारी महज एक कूटनीतिक संबंध नहीं, बल्कि साझा संघर्ष, समान आदर्शों और भविष्य की दिशा में मिलकर चलने की भावना है। उन्होंने कहा:
“यह सम्मान सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए है, जो घाना के साथ अपनी मित्रता और साझेदारी को गर्व से देखते हैं।”
मोदी के इस बयान को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों और दक्षिण-दक्षिण सहयोग की भावना के रूप में देखा जा रहा है।
व्यापारिक रिश्तों में नई गति
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और घाना ने आपसी व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक ‘विकास सहयोगी’ नहीं, बल्कि घाना के ‘विकास यात्रा का सह-यात्री’ है।
इस दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत ने घाना को डिजिटल ट्रांजिशन और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तकनीकी सहायता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
ग्लोबल साउथ की आवाज
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और घाना दोनों ही ग्लोबल साउथ — यानी विकासशील देशों के समूह — की आवाज बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा:
“ग्लोबल साउथ की चुनौतियां और आकांक्षाएं एक जैसी हैं। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य संकट, और आर्थिक असमानताएं — ये सब हमें मिलकर हल करनी होंगी।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मंचों पर भारत ने कई बार ग्लोबल साउथ की समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाया है, और अफ्रीका को हमेशा अपनी प्राथमिकताओं में रखा है।
भारत-घाना संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और घाना के संबंधों की जड़ें 1957 में घाना की स्वतंत्रता के समय से जुड़ी हुई हैं। घाना स्वतंत्रता प्राप्त करने वाला पहला उप-सहारा अफ्रीकी देश था, और भारत, जिसने 1947 में ही ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाई थी, घाना की आजादी का समर्थन करने वाले पहले देशों में शामिल था।
भारत ने घाना में टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, अस्पताल और आईटी केंद्रों की स्थापना में मदद की है। साथ ही, भारत के कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्यमी भी घाना में सक्रिय हैं।
मोदी की अफ्रीका यात्रा का अगला चरण
घाना की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 3-4 जुलाई को त्रिनिडाड और टोबैगो की यात्रा पर जाएंगे, जहाँ वह भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। इसके बाद वह अर्जेंटीना और फिर नामीबिया की यात्रा करेंगे।
नामीबिया में प्रधानमंत्री मोदी देश के स्वतंत्रता सेनानी और अफ्रीकी नेता सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि देंगे, जिनका निधन इस वर्ष 8 फरवरी को हुआ था। सैम नुजोमा को नामीबिया की आजादी का अगुवा माना जाता है, और मोदी की श्रद्धांजलि अफ्रीकी संघर्षों के प्रति भारत की संवेदनशीलता को दर्शाएगी।
विदेश मंत्रालय का बयान
भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा:
“प्रधानमंत्री द्वारा घाना संसद में दिया गया भाषण भारत-घाना संबंधों की गहराई और समान मूल्यों की पुष्टि करता है। यह दोनों देशों के बीच विकास, लोकतंत्र और वैश्विक सहयोग की साझा आकांक्षाओं को दर्शाता है।”
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घाना यात्रा और वहां संसद में दिया गया उनका भाषण न केवल अफ्रीकी देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को साझा करने और उन्हें वैश्विक मंच पर उठाने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराता है। घाना के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को स्वीकारते हुए मोदी ने इसे भारत-घाना मैत्री का प्रतीक बताया और यह संदेश दिया कि भारत किसी भी विकासशील देश के लिए केवल एक व्यापारी नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय साझेदार है।
आगामी दौरों में त्रिनिडाड, अर्जेंटीना और नामीबिया में मोदी की उपस्थिति वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव और भागीदारी को और सशक्त करेगी।
















Leave a Reply