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नोएडा में नकली पनीर का बड़ा भंडाफोड़: 1400 किलो माल जब्त, अलिगढ़ से चल रहा था गोरखधंधा

Big bust of fake cheese in Noida: 1400 kg of goods seized, racket was being run from Aligarh

उत्तर प्रदेश के नोएडा में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने नकली पनीर के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस रैकेट के जरिए करीब छह महीने से पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में नकली पनीर की आपूर्ति की जा रही थी। पुलिस की सतर्कता से इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ और करीब 1400 किलो नकली पनीर जब्त किया गया है।

कैसे हुआ खुलासा?

नोएडा पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि एक पिकअप वैन में नकली पनीर लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर नोएडा सेक्टर-63 पुलिस ने उस गाड़ी को रोका और तलाशी ली। गाड़ी से करीब 1400 किलो नकली पनीर बरामद हुआ। वाहन चालक की पहचान 32 वर्षीय गुलफाम के रूप में हुई, जिसे तत्काल हिरासत में ले लिया गया।

पूछताछ के दौरान गुलफाम ने बताया कि यह नकली पनीर अलीगढ़ के सहजपुरा गांव स्थित एक फैक्ट्री से लाया जा रहा था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अलीगढ़ में उस फैक्ट्री पर छापा मारा।

अलीगढ़ की फैक्ट्री से चला था खेल

अलीगढ़ के सहजपुरा गांव में स्थित इस फैक्ट्री में नकली पनीर बनाने के लिए कई तरह के खतरनाक रसायन और मिलावटी सामग्री पाई गई। छापेमारी के दौरान पुलिस को निम्नलिखित सामान बरामद हुआ:

  • 25 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर
  • नकली सफेद रंग (आर्टिफिशियल वाइट कलर)
  • स्टार्च युक्त पाउडर की बोरियां (Red Bull Sortex Clean के लेबल वाली)
  • 15-15 किलो के दो टिन रिफाइंड पाम ऑयल
  • 4 किलो वजन वाला एक नीला बॉक्स जिसमें केमिकल भरा था
  • 11 नीले रंग के ड्रम
  • नकली पनीर बनाने की मशीन

नकली पनीर बनाने की विधि

पुलिस पूछताछ में फैक्ट्री के कर्मचारियों ने बताया कि नकली पनीर बनाने की प्रक्रिया काफी सोची-समझी और खतरनाक थी। सबसे पहले स्टार्चयुक्त पाउडर को पानी और रसायनों के साथ उबाला जाता था। फिर उसमें आर्टिफिशियल सफेद रंग मिलाया जाता ताकि उसका रंग असली पनीर जैसा लगे।

इसके बाद इस घोल को जमाकर पनीर जैसी शक्ल दी जाती, और कपड़े में बांधकर उसका पानी निकाल दिया जाता। अंत में, उसे मलाईदार दिखाने के लिए उसमें पाम ऑयल मिलाया जाता था। इस प्रक्रिया के बाद जो उत्पाद बनता, वह देखने में बिल्कुल असली पनीर जैसा लगता, लेकिन सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक होता।

आरोपी गिरफ्तार

छापेमारी के बाद पुलिस ने फैक्ट्री का संचालन कर रहे 36 वर्षीय गुड्डू, 30 वर्षीय सहयोगी इखलाक और एक अन्य व्यक्ति नावेद को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, पहले से पकड़े गए गुलफाम के साथ कुल चार आरोपी अब पुलिस हिरासत में हैं।

कहां-कहां सप्लाई होता था ये नकली पनीर?

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस फैक्ट्री से बने नकली पनीर की सप्लाई दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में होती थी। खासकर रोडसाइड स्टॉल, ढाबों, छोटे रेस्टोरेंट्स और लोकल मिठाई की दुकानों पर इस नकली पनीर का उपयोग किया जाता था। इसकी कीमत 180 से 220 रुपये प्रति किलो होती थी, जो कि असली पनीर की तुलना में काफी कम है। इसी कारण दुकानदार इस नकली माल को सस्ते में खरीद कर ग्राहकों को परोसते थे।

जनता की सेहत से खिलवाड़

इस पूरे मामले का सबसे भयावह पहलू यह है कि छह महीने से लोग अनजाने में इस खतरनाक नकली पनीर का सेवन कर रहे थे। जिसमें ऐसे रसायन मिले होते हैं जो लीवर, किडनी और पेट से जुड़ी बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। खासतौर पर पाम ऑयल और कृत्रिम रंग जैसे पदार्थ शरीर में विषाक्तता उत्पन्न कर सकते हैं।

पुलिस की अगली कार्रवाई

नोएडा पुलिस ने अब इस मामले की तह तक जाने की योजना बनाई है। पुलिस का कहना है कि अब वे इस नकली पनीर को खरीदने और बेचने वालों की भी तलाश कर रही है। जिन रेस्टोरेंट्स, मिठाई दुकानों और वेंडर्स ने यह नकली पनीर खरीदा है, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग से भी संपर्क किया गया है ताकि पूरे एनसीआर क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जा सके।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का नकली पनीर न केवल स्वाद में असली जैसा होता है, बल्कि दिखने में भी हूबहू लगता है। ऐसे में आम जनता इसे पहचान ही नहीं सकती। उन्होंने सुझाव दिया कि पनीर खरीदते समय उसकी बनावट, गंध और पानी छोड़ने की क्षमता को ध्यान से परखना चाहिए।

निष्कर्ष

नोएडा में नकली पनीर का यह मामला सिर्फ एक खाद्य घोटाला नहीं है, बल्कि यह लोगों की सेहत से किया जा रहा संगीन अपराध है। यह घटना इस बात का संकेत है कि किस प्रकार लालच और मुनाफे के लिए कुछ लोग हजारों-लाखों लोगों की जान को खतरे में डालने से भी पीछे नहीं हटते।

जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और जनता दोनों सतर्क रहें। फूड इंस्पेक्शन की प्रक्रिया को और कड़ा किया जाए और ऐसी फैक्ट्रियों को जड़ से खत्म किया जाए।

यदि आप भी किसी दुकान या रेस्टोरेंट में पनीर या किसी अन्य खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर शक करें, तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें। आपकी सतर्कता कई लोगों की जान बचा सकती है।

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