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वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पराग जैन बने RAW के नए चीफ: ऑपरेशन सिंदूर के नायक का परिचय और रणनीतिक पृष्ठभूमि

Senior IPS officer Parag Jain becomes the new chief of RAW: Introduction and strategic background of the hero of Operation Sindoor

भारत की खुफिया एजेंसी RAW (Research and Analysis Wing) को नया प्रमुख मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पराग जैन को RAW का अगला चीफ नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान प्रमुख रवि सिन्हा की जगह लेंगे, जो 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पराग जैन की नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है, जब देश की बाहरी सुरक्षा चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं—खासकर पाकिस्तान और खालिस्तानी आतंक से जुड़ी गतिविधियों को लेकर।

पराग जैन, जो वर्तमान में RAW के Aviation Research Centre (ARC) के प्रमुख हैं, उन्हें “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे महत्वपूर्ण खुफिया अभियानों में अहम भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर जवाबी कार्रवाई की थी, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे।


पराग जैन: एक परिचय

  • बैच: 1989
  • कैडर: पंजाब
  • वर्तमान पद: RAW में द्वितीय वरिष्ठतम अधिकारी, ARC प्रमुख
  • कार्यकाल: अगले दो वर्षों के लिए RAW प्रमुख

RAW प्रमुख के रूप में पराग जैन का महत्व क्यों?

पराग जैन को RAW के भीतर एक सख्त, चुपचाप काम करने वाले और रणनीतिक सोच वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। उनका RAW में लंबा अनुभव, पाकिस्तान डेस्क की गहन समझ और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर सक्रिय भूमिका, उन्हें इस भूमिका के लिए आदर्श बनाती है।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब भारत को बाहरी मोर्चे पर कई जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

  • पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों को समर्थन
  • खालिस्तानी गतिविधियों का विदेशी धरती से संचालन
  • चीन से सीमाई तनाव
  • अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव
  • और वैश्विक जासूसी नेटवर्क के साथ तालमेल

🇮🇳 ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बर्बर आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई। भारत ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया। इसके बाद केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान की सीमा में कई लक्षित हमले किए।

पराग जैन को इस ऑपरेशन की खुफिया योजना और उसके सफल क्रियान्वयन का मुख्य रणनीतिकार माना जाता है। उन्होंने सटीक इंटेलिजेंस इनपुट के माध्यम से भारतीय वायुसेना और विशेष बलों को आवश्यक जानकारी मुहैया कराई, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर सर्जिकल एक्युरेसी के साथ हमला किया जा सका।


ARC (Aviation Research Centre) में योगदान

ARC भारत की खुफिया निगरानी इकाई है, जो हवाई निगरानी, उपग्रह चित्र, और इलेक्ट्रॉनिक जासूसी से संबंधित कार्य करती है। पराग जैन के नेतृत्व में इस इकाई ने न केवल भारत की सीमा सुरक्षा मजबूत की, बल्कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल और समुद्री इलाकों में निगरानी तंत्र को भी और सशक्त किया।

उनकी रणनीतिक सोच के कारण ARC ने ड्रोन-सहायित निगरानी, इन्फ्रारेड स्कैनिंग और सीमावर्ती क्षेत्रों में उन्नत तकनीक का सफल प्रयोग किया।


आतंकवाद विरोधी अभियान में अनुभव

पंजाब में आतंकवाद के चरम काल (1980-90 के दशक) में पराग जैन एसएसपी और डीआईजी के रूप में विभिन्न जिलों में तैनात रहे। उस दौर में उन्होंने न केवल कई खालिस्तानी मॉड्यूल्स को ध्वस्त किया, बल्कि स्थानीय पुलिस को आधुनिक प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक रणनीति के लिहाज से तैयार भी किया।

इस अनुभव ने उन्हें उग्रवाद और आतंक के मनोविज्ञान की गहरी समझ दी, जो RAW में उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।


RAW में ‘पाकिस्तान डेस्क’ की अगुवाई

पराग जैन ने RAW के भीतर पाकिस्तान डेस्क को लंबे समय तक लीड किया। उन्हें:

  • ISI की कार्यप्रणाली की गहन जानकारी
  • आतंकी संगठनों की गतिविधियों का नेटवर्क विश्लेषण
  • और LoC पार के कैंपों की सटीक मैपिंग का विशेषज्ञ माना जाता है।

उनकी अगुवाई में कई घुसपैठ प्रयासों को समय रहते रोका गया और कई हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन सफल हुए।


अंतरराष्ट्रीय मिशनों में अनुभव

RAW के भीतर विदेशी मिशनों में भी पराग जैन ने अहम भूमिका निभाई:

  1. श्रीलंका: यहां उन्होंने लिट्टे (LTTE) के बचे हुए मॉड्यूल्स की निगरानी की।
  2. कनाडा: खालिस्तानी नेटवर्क पर उनकी नजर बेहद पैनी थी। कहा जाता है कि उन्होंने कनाडा में मौजूद कई फंडिंग चैनल्स और डिजिटल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया

कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों पर कड़ी नजर रखने और भारत विरोधी प्रचार पर रोक लगाने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।


नई चुनौतियाँ: क्या बदल सकता है RAW का चेहरा?

अब जब वे RAW प्रमुख बन चुके हैं, तो उनसे निम्नलिखित पहलुओं पर सशक्त रणनीति की उम्मीद की जा रही है:

  • Hybrid Warfare: साइबर, सूचना और मनोवैज्ञानिक युद्ध को ध्यान में रखते हुए नई खुफिया पद्धतियों का विकास।
  • Indo-Pacific Strategy: चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए समुद्री खुफिया पर फोकस।
  • Diaspora Surveillance: विदेशों में सक्रिय भारत-विरोधी समूहों की निगरानी।
  • AI और टेक्नोलॉजी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा का खुफिया विश्लेषण में प्रयोग।

सरकार और सेना के साथ तालमेल

पराग जैन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के करीबी अधिकारियों में से एक माना जाता है। उनके नेतृत्व में RAW और अन्य खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है।

वो भारतीय सेना, वायुसेना और नेवी के साथ इंटेलिजेंस शेयरिंग के मौजूदा सिस्टम को और तेज व प्रभावी बना सकते हैं।


निष्कर्ष

पराग जैन का RAW प्रमुख बनना न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह भारत की खुफिया प्रणाली में एक नई दिशा और रणनीतिक दृष्टिकोण का संकेत भी है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी सफलताओं के बाद अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे भारत की बाहरी सुरक्षा को न केवल मजबूत करेंगे, बल्कि आने वाले खतरों से पहले ही निपटने की क्षमता विकसित करेंगे।

उनका अनुभव, दूरदृष्टि और जमीनी स्तर की पकड़ RAW को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में सक्षम है।

देश को अब उनसे सिर्फ इंटेलिजेंस नहीं, बल्कि विज़न की भी उम्मीद है

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