जम्मू-कश्मीर में बीते 24 घंटों से हो रही भारी बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बुधवार सुबह अचानक तवी नदी का जलस्तर बढ़ जाने से 9 लोग फंस गए, जिन्हें पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की संयुक्त टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित बाहर निकाला। इसके अलावा, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर भी कई घंटे तक ट्रैफिक ठप रहा और राजौरी ज़िले में एक उफनती धारा में दो वाहन बह गए।
तवी नदी में फंसे मजदूर और श्रद्धालु
बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे 52 वर्षीय मजदूर मदन लाल, जो तवी नदी से रेत निकालने गए थे, अचानक बढ़े जलस्तर के कारण जम्मू शहर के ज्वेल चौक ब्रिज के पास फंस गए। अधिकारियों के मुताबिक, SDRF की टीम ने पुल से सीढ़ी लटकाकर दो घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
इसके बाद पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, SDRF और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाया और आठ अन्य लोगों को बचाया गया, जिनमें कुछ लोग पिंडदान जैसे धार्मिक कर्मकांड के लिए नदी किनारे पहुंचे थे।
भारी बारिश से जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर ट्रैफिक ठप
बुधवार तड़के 6:30 बजे के आसपास भारी बारिश के कारण रामबन ज़िले के महाड़ और टी2 सुरंग के पास भूस्खलन हुआ, जिससे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। इस कारण दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।
हालांकि, सड़क साफ करने वाली एजेंसियों ने तत्परता दिखाते हुए तीन घंटे के भीतर मलबा हटा दिया और ट्रैफिक दोबारा बहाल कर दिया गया।
राजौरी में बाढ़ जैसे हालात, वाहन बहे
राजौरी ज़िले के खैरा, लोअर जवाहर नगर और थूड़ी इलाकों में एक नाला उफान पर आ गया, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। अधिकारियों ने बताया कि इस नाले के किनारे खड़े कुछ वाहन पानी में बह गए। प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच कर हालात का जायज़ा ले रही है।
घोड़े भी फंसे, रेस्क्यू में लाई गई राहत
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुछ घोड़े भी तवी नदी के किनारे फंसे हुए मिले। SDRF और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह दृश्य आम जनता के लिए राहत देने वाला रहा, जिसने आपदा के समय प्रशासन और आम लोगों के बीच तालमेल की मिसाल पेश की।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मंगलवार दोपहर से अब तक रियासी ज़िले के कटरा में सबसे ज़्यादा 108.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके बाद राजौरी में 80 मिमी, उधमपुर में 71.4 मिमी, पुंछ में 48 मिमी और रामबन में 47.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।
विभाग ने 27 जून तक जम्मू संभाग के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि और भूस्खलन की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की तैयारी और जनता से अपील
उधर, SDRF कमांडर अर्पण यादवंशी के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्रों की ड्रोन से निगरानी की जा रही है। लाइव ड्रोन फुटेज के माध्यम से संभावित खतरनाक इलाकों की पहचान की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित रेस्क्यू सुनिश्चित किया जा सके।
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे बारिश के दौरान नदी-नालों के आसपास न जाएं और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की जरूरत है जहां पहले भी बाढ़ या भूस्खलन हो चुके हैं।
निष्कर्ष:
जम्मू-कश्मीर में मौसम की मार ने जहां एक ओर राहत की उम्मीदें जगाई हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और जनता के लिए चुनौतियां भी पेश की हैं। SDRF, पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय नागरिकों की संयुक्त मुहिम ने 9 लोगों को सुरक्षित बचाकर एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया है। आगामी कुछ दिन बारिश के लिहाज से संवेदनशील हैं, ऐसे में सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है।
















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