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यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर भूस्खलन: रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, SDRF-NDRF ड्रोन से कर रही निगरानी

Landslide on Yamunotri Yatra route: Rescue operation underway, SDRF-NDRF monitoring with drones

24 जून 2025 को दोपहर लगभग 4 बजे, यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर नौ-कांची भैरव मंदिर के पास अचानक भारी बारिश के बीच भूस्खलन हुआ। तेज बारिश से पहाड़ी की मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर ढलान पर टूटकर पैदल मार्ग पर गिर पड़े—कई तीर्थयात्रियों को चपेट में ले लिया। इस हादसे में उ.प्र. के हरिशंकर (47) और उनकी नाबालिग बेटी ख्याती (9) की मृत्यु हो गई, जबकि एक अन्य तीर्थयात्री रसिक (मुंबई निवासी) घायल बचा, और दो बच्चे—भाविका शर्मा (11, दिल्ली) और कमलेश जेत्थवा (35, मुंबई)—अभी भी लापता हैं।


राहत एवं बचाव अभियान

घटना के तुरंत बाद उत्तराखंड एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला पुलिस, वन विभाग और स्वास्थ्य टीमें मौके पर पहुंचीं। एसडीआरएफ के कमांडर अर्पण यदुवंशी ने ड्रोन कैमरों के जरिए घटनास्थल का एरियल सर्वेक्षण कर संभावित गड्ढों और लोगों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों की पहचान शुरू करवाई।
ड्रोन फुटेज का लाइव फीड बचाव दलों को तुरंत आंकलन और बचाव कार्यों की दिशा तय करने में मदद कर रहा है।

इसके अलावा Uttarkashi DM प्रशांत कुमार आर्य ने यात्रा को स्थगित करने और सतर्कता के साथ पुनः शुरू करने के निर्देश जारी किए।
एक वैकल्पिक मार्ग—भनेली गड़—बनाकर उसे मंगलवार रात तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है ।


स्थानीय और राज्य स्तरीय प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और मेडिकल टीमें डटे हुए हैं। उन्हें पीड़ितों के परिवारों को राहत देने, चिकित्सा सहायता प्रदान करने, और क्षेत्र को सुरक्षित रखने पर बल देने को कहा गया।
उन्होंने एक घायल तीर्थयात्री से मिलने के बाद उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जांकीछट्टी भेजने की समीक्षा की और पुनः सभी की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए दुआ भी की ।


मॉनसून की तीव्रता

उत्तराखंड में पिछले सप्ताह अत्यधिक प्रारंभिक मॉनसून वर्षा दर्ज की गई—कुछ स्थानों पर 490% से अधिक बारिश हुई।
तब से अब तक 1,800 से अधिक भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें कम से कम 82 लोग मारे गए

यमुनोत्री ट्रेक मार्ग पर कीचड़ भरे और फिसलन भरे हालात भी बनाए हुए हैं—न केवल यात्रियों के लिए खतरा, बल्कि राहत कार्यों को भी चुनौती दी जा रही है ।


बचाव के असफल प्रयास और जारी चुनौतियाँ

  • रसिक नामक युवक को बचाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया; हालत स्थिर बताई गई ।
  • हालांकि भाविका और कमलेश की अभी खबर नहीं मिली। SDRF, NDRF और पुलिस टीम दिन-रात तलाश में जुटी है, लेकिन मौसम और फिसलन भरे गैरीज़ीयन ने बचाव कार्यों को धीमा कर दिया है ।
  • यात्रा मार्ग उस समय पूरा बंद कर दिया गया है—न केवल नौ-कांची तक, बल्कि डामटा, बरकॉट और डोबटा से लेकर जांकीछट्टी तक ।

उजागर प्रश्न: क्या पर्याप्त तैयारी थी?

समारेखों दिखाते हैं कि इन दुर्घटनाओं के बावजूद—कीचड़ नियंत्रण, राहत मार्ग की मजबूती और मौसम पूर्वानुमान कवरेज—जैसे तत्वों पर अभी भी ध्यान केंद्रित होना बाकी है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों का कहना है:

“बारिश शुरू हुई तो जैसे बचाव कार्य धीमे पड़े।”

मौजूदा स्थिति में मुआवजे, लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और आपदा प्रबंधन रणनीतियों की सख्त आवश्यकता है।


आगे की प्राथमिकताएँ

  1. जैविक मार्ग की सफाई और वैकल्पिक सुरंग मार्ग का उद्घाटन
  2. मॉनिटरिंग और ड्रोन निगरानी को स्थायी रूप में लागू करना
  3. स्थायी सुरक्षा बाड़, रेलिंग और रॉक-फॉल सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था
  4. पानी निकासी और कीचड़ निराकरण प्रणाली का निर्माण

निष्कर्ष

  • नौ-कांची भूस्खलन एक दर्दनाक लेकिन चेतावनी-पूर्ण घटना है।
  • SDRF‑NDRF‑पुलिस‑वन‑मेडिकल टीमों की संयुक्त बचाव प्रक्रिया संरक्षित रूप से कार्यकुशल दिखी।
  • मॉनसून की असामान्य गतिविधि ने हादसों की तीव्रता को चिह्नित किया।
  • लेकिन, लंबी अवधि की 灾害 प्रतिरोधी रणनीति और पूर्वभविष्यवाणी क्षमता की कमी स्पष्ट है।

आगे कदम: यात्रा मार्ग को दोबारा खोलने से पहले पूरी तरह से सुरक्षित करना—भूस्खलन संसाधन, मलवे की सफाई, और आपातकालीन सूचना प्रणालियों का उन्नयन।


यात्रियों को सलाह है कि वे अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल—जैसे हेलमेट, वॉटरप्रूफ जूते, मॉनसून उपकरण—जरूर साथ रखें, और स्थानीय निर्देशों का सख्ती से पालन करें

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