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भगवान मुरुगा सम्मेलन: आस्था और राजनीति के टकराव में घिरी AIADMK, BJP के साथ गठबंधन पर उठे सवाल

Lord Muruga Conference: AIADMK caught in the conflict between faith and politics, questions raised on alliance with BJP

तमिलनाडु के मदुरै में आयोजित भगवान मुरुगा सम्मेलन का उद्देश्य भले ही एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन के रूप में प्रस्तुत करना रहा हो, लेकिन यह सम्मेलन अंततः एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है। हिंदू मुन्नानी द्वारा आयोजित और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम में एक ऐसा वीडियो दिखाया गया, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी। यह वीडियो द्रविड़ आंदोलन के प्रतीक माने जाने वाले पेरियार ई. वी. रामासामी और पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई की आलोचना करता हुआ प्रतीत हुआ। सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब यह वीडियो चलाए जाने के समय AIADMK के वरिष्ठ नेता मंच पर मौन बैठे रहे।

📌 पेरियार और अन्नादुरई: द्रविड़ राजनीति की धुरी

तमिलनाडु की राजनीति में पेरियार और अन्नादुरई केवल नाम नहीं हैं — वे विचारधाराओं के स्तंभ हैं। पेरियार ने जातिवाद और ब्राह्मणवाद के खिलाफ सामाजिक आंदोलन खड़ा किया था, जिसे अन्नादुरई ने राजनीतिक धरातल पर उतारा। अन्नादुरई ही AIADMK के वैचारिक पूर्वज माने जाते हैं। ऐसे में पेरियार और अन्नादुरई की आलोचना वाला वीडियो दिखाया जाना और उस पर मंच पर बैठे AIADMK नेताओं की चुप्पी राजनीतिक आत्मघात के समान समझा जा रहा है।

🧨 DMK का तीखा हमला

जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। पार्टी प्रवक्ता डॉ. सैयद हफीजुल्लाह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“भगवान भी ऐसे आयोजनों को राजनीतिक सभा में बदलने को माफ नहीं करेंगे। यह भक्ति का आयोजन नहीं, बल्कि एक ढका हुआ राजनीतिक स्टंट था।”

उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह तमिल सांस्कृतिक प्रतीकों का सहारा लेकर द्रविड़ आंदोलन को कमजोर करने की साजिश कर रही है। DMK का यह हमला सिर्फ BJP पर नहीं, बल्कि AIADMK की वैचारिक स्थिति पर भी था — और वह कामयाब भी रहा।


🤐 AIADMK की सफाई और दुविधा

घटना के बाद AIADMK पूरी तरह रक्षात्मक मुद्रा में नजर आई। पार्टी प्रवक्ता कोवई सत्यन ने NDTV से बातचीत में स्वीकार किया कि:

“वीडियो का चलना एक भूल थी, जिससे भविष्य में बचना चाहिए। विपक्ष को यह दिखाने का मौका नहीं देना चाहिए कि AIADMK-BJP गठबंधन में मतभेद हैं।”

पार्टी के वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि ने भी विवाद को कम करने की कोशिश की और कहा कि AIADMK अपने दिवंगत नेताओं के प्रति निष्ठावान है, और यह आरोप गलत हैं कि पार्टी ने अपनी वैचारिक पहचान खो दी है।

हालांकि पार्टी के भीतर यह स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा के साथ चल रहे गठबंधन ने उसे वैचारिक असमंजस में डाल दिया है। एक ओर अन्नादुरई और पेरियार की विरासत को बचाए रखना ज़रूरी है, तो दूसरी ओर भाजपा के साथ राजनीतिक समीकरण भी बनाए रखने हैं।


🧭 BJP की रणनीति और भगवान मुरुगा सम्मेलन

भाजपा ने तमिलनाडु में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए धार्मिक प्रतीकवाद और सांस्कृतिक आयोजनों का सहारा लेना शुरू किया है। भगवान मुरुगा सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा है। इस आयोजन में:

  • भगवान मुरुगा के छह प्रमुख निवासों की प्रतिकृतियाँ प्रदर्शित की गईं।
  • हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी रही।
  • आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जिनकी मौजूदगी ने आयोजन में स्टार पावर जोड़ी।
  • तमिलनाडु और झारखंड के राज्यपालों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे केंद्र सरकार की सीधी भागीदारी स्पष्ट हुई।

भाजपा का उद्देश्य यह था कि भगवान मुरुगा जैसे लोकप्रिय तमिल देवता के जरिए द्रविड़ राजनीति को काउंटर किया जाए और हिन्दुत्व के एजेंडे को स्थानीय रंग में ढाला जाए।


🧱 लेकिन उलटा पड़ा दांव

BJP को उम्मीद थी कि इस सम्मेलन के जरिए वह AIADMK के साथ गठबंधन को मजबूत करेगी और DMK को धार्मिक मोर्चे पर घेरने में सफल होगी। लेकिन पेरियार और अन्नादुरई पर आलोचनात्मक वीडियो ने पूरा परिदृश्य उलट दिया।

अब भाजपा पर यह आरोप लग रहे हैं कि वह तमिलनाडु की सांस्कृतिक अस्मिता और द्रविड़ विरासत को मिटाने का प्रयास कर रही है। वहीं, AIADMK के लिए यह दोधारी तलवार बन गया है — वह भाजपा के साथ भी रहना चाहती है और अपने द्रविड़ वोट बैंक को भी नहीं खोना चाहती।


🤝 गठबंधन पर फिर छाया संदेह

भले ही AIADMK नेताओं ने यह संकेत दिए हैं कि गठबंधन बरकरार है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह गठबंधन डगमगाता हुआ और तनावपूर्ण है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई की पहले की टिप्पणियों के कारण भी AIADMK ने एक बार गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया था।

अब फिर से पार्टी को सफाई देनी पड़ रही है कि उनके दिवंगत नेताओं का अपमान नहीं होगा, लेकिन साथ ही BJP से दूरी भी नहीं बन रही। यह सियासी अंतर्विरोध आने वाले समय में और भी गहराने की आशंका है।


🔚 निष्कर्ष: भक्ति बनाम राजनीति की लड़ाई

भगवान मुरुगा सम्मेलन की घटना तमिलनाडु की राजनीति में आस्था और विचारधारा के टकराव का प्रतीक बन चुकी है। भाजपा की कोशिश है कि धार्मिक भावनाओं को उभार कर तमिलनाडु की सत्ता में अपनी दावेदारी मजबूत करे, जबकि AIADMK दो पाटों में फंसी दिख रही है — भाजपा की राजनीति और द्रविड़ विचारधारा की विरासत

आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या AIADMK इस दोराहे से सुरक्षित निकल पाती है या यह संकट उसके लिए अस्तित्व का सवाल बन जाएगा।

खबर हंट पर हम आपके लिए लाते हैं राजनीति के हर परत की गहराई से जांच — खबर से आगे की समझ।

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