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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025: विशाखापत्तनम से प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक संदेश

International Yoga Day 2025: PM Modi's global message from Visakhapatnam

भूमिका: योग का वैश्विक उत्सव
हर वर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अब केवल एक भारतीय सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि एक वैश्विक चेतना का उत्सव बन चुका है। 2025 में इस दिन की 11वीं वर्षगांठ को भारत ने पूरे गौरव के साथ मनाया। इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से राष्ट्रीय कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए दुनिया को एक बार फिर योग की व्यापकता, प्रासंगिकता और शांति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।


विशाखापत्तनम बना योग का केंद्र
शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशाखापत्तनम पहुंचे, जहां आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। शनिवार की सुबह समुद्र के किनारे योग सत्र आयोजित किया गया, जहां हजारों लोगों ने एक साथ योगासन कर इस ऐतिहासिक दिन को विशेष बना दिया।

विशाखापत्तनम की भौगोलिक सुंदरता और समुद्र के शांत वातावरण ने इस आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया। यह पहली बार था जब दक्षिण भारत के इस प्रमुख तटीय शहर को राष्ट्रीय स्तर पर योग उत्सव का केंद्र बनाया गया।


थीम: ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’
इस साल की थीम “Yoga for Self and Society – एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच के संबंध को रेखांकित करती है, बल्कि भारत के उस दृष्टिकोण को भी सामने लाती है जिसमें मानव कल्याण को पूरी प्रकृति के साथ जोड़कर देखा जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “पृथ्वी पर हर इकाई का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है। योग हमें इस परस्पर जुड़ाव के प्रति जागरूक करता है और दुनिया के साथ एकता की ओर ले जाता है।”


योग: एक विराम बटन
प्रधानमंत्री ने बेहद सटीक शब्दों में योग की भूमिका को “मानवता के लिए विराम बटन” कहा। उन्होंने कहा, “आज की भागती-दौड़ती दुनिया में, योग वह मौका है जब हम रुक सकते हैं, सांस ले सकते हैं, संतुलन बना सकते हैं और स्वयं को फिर से संपूर्ण बना सकते हैं।”

उन्होंने इसे “Yoga 2.0” की शुरुआत बताया — यानी ऐसा युग जहाँ योग केवल शरीर के व्यायाम तक सीमित न होकर मानवता की वैश्विक नीति का हिस्सा बन जाए।


शोध और चिकित्सा में योग की भूमिका
मोदी ने इस अवसर पर बताया कि कैसे भारत योग को आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा पद्धति से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि एम्स, दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थान योग पर साक्ष्य-आधारित रिसर्च कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अनुसंधानों से यह सामने आया है कि हृदय रोगों, तंत्रिका तंत्र संबंधी विकारों, महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं के इलाज में योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने इसे चिकित्सा पद्धति का पूरक बताया जो न केवल इलाज करता है बल्कि रोकथाम में भी सहायक है।


‘सर्वे संतु निरामया’ का संदेश
प्रधानमंत्री ने इस थीम को भारतीय लोकाचार से जोड़ते हुए कहा कि “सर्वे संतु निरामया” यानी “सभी रोग मुक्त हों” — यही भारत की प्राचीन सोच है और यही योग की आत्मा है। योग न केवल व्यक्ति के शरीर को स्वस्थ करता है बल्कि मानसिक, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर भी संतुलन और सहयोग को बढ़ावा देता है।


विश्व में योग का प्रभाव
आज योग केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के 190 से अधिक देशों में लाखों लोग हर दिन योग करते हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने के बाद से, इसकी लोकप्रियता में निरंतर वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि आज विश्व में योग केवल एक हेल्थ ट्रेंड नहीं, बल्कि एक सस्टेनेबल लाइफस्टाइल बन चुका है, जो मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व की मिसाल है।


आंध्र प्रदेश का योगदान
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री नायडू की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने योग के प्रचार और जागरूकता में उल्लेखनीय योगदान दिया है। स्थानीय युवाओं, छात्रों, बुजुर्गों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह आयोजन जन-आंदोलन में बदल गया।


निष्कर्ष: योग, भारत की देन – विश्व का मार्गदर्शन
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 के आयोजन ने फिर यह साबित किया कि योग सिर्फ शरीर के लिए नहीं, बल्कि आत्मा, समाज और सृष्टि के लिए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में, “योग वह धागा है जो शरीर, मन, समाज और पर्यावरण को एक सूत्र में बांधता है।”

इस दिन भारत ने एक बार फिर यह दिखाया कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना केवल शब्द नहीं, बल्कि व्यावहारिक दर्शन है — और योग उसका सबसे सशक्त माध्यम है।

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