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आंध्र प्रदेश में माओवादी मुठभेड़: शीर्ष केंद्रीय समिति सदस्य समेत तीन नक्सली ढेर

Maoist encounter in Andhra Pradesh: Three Naxalites including top central committee member killed

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में बुधवार सुबह हुई एक बड़ी मुठभेड़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक केंद्रीय समिति सदस्य समेत तीन माओवादी मारे गए। यह मुठभेड़ राज्य के मारेदुमिल्ली क्षेत्र के घने जंगलों में हुई, जहां सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच जोरदार गोलीबारी हुई।

मारे गए माओवादी कौन थे?

इस मुठभेड़ में मारे गए प्रमुख माओवादी नेताओं की पहचान गजरला रवि उर्फ उदय, रावी वेंकट चैतन्य उर्फ अरुणा, और एक अज्ञात माओवादी के रूप में की गई है।

  • गजरला रवि माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति के सदस्य थे और आंध्र-ओडिशा सीमा विशेष क्षेत्रीय समिति (AOBSZC) के सचिव भी थे।
  • अरुणा, जो इस मुठभेड़ में मारी गई, एक अन्य केंद्रीय समिति सदस्य प्रतापरेड्डी रामचंद्र रेड्डी उर्फ चलपति की पत्नी थीं।
    चलपति पहले ही छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में मारे जा चुके हैं।
  • तीसरे माओवादी की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

इन दोनों नेताओं की भूमिका माओवादी संगठन में बेहद अहम मानी जाती थी। ये आंध्र-ओडिशा सीमा पर सक्रिय माओवादी नेटवर्क का नेतृत्व कर रहे थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की मोस्ट वांटेड सूची में इनका नाम शामिल था। रवि पर सरकार ने 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था।

कैसे हुई मुठभेड़?

आंध्र प्रदेश पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ देवीपटनम वन क्षेत्र के कोंडामोडालू गांव के पास हुई, जो मारेदुमिल्ली पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है।
मंगलवार शाम को पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि इलाके में माओवादी गतिविधि बढ़ी है। इसके बाद ग्रेहाउंड्स, जो माओवादी विरोधी अभियानों में विशेष प्रशिक्षित बल है, ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया।

जैसे ही ग्रेहाउंड्स टीम ने माओवादियों को घेरने की कोशिश की, दोनों पक्षों के बीच जबरदस्त गोलीबारी हुई। पुलिस के मुताबिक, माओवादियों को इस मुठभेड़ में भारी नुकसान हुआ और तीन शीर्ष सदस्य मारे गए। घटनास्थल से तीन एके-47 राइफलें, कारतूस और अन्य हथियार बरामद किए गए हैं।

माओवादी संगठन को बड़ा झटका

गजरला रवि की मौत माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

  • रवि ने 1992 में केवल 23 वर्ष की उम्र में माओवादी आंदोलन से जुड़कर अपनी गतिविधियां शुरू की थीं।
  • वह मूलतः तेलंगाना (पूर्व संयुक्त आंध्र प्रदेश) के चित्याला ब्लॉक के वेलिशाला गांव का निवासी था।
  • वर्षों तक संगठन में काम करते हुए रवि ने कई क्षेत्रों में सशस्त्र आंदोलन और सैन्य रणनीति का नेतृत्व किया।

वह 2004 की शांति वार्ता में भी माओवादी संगठन की ओर से पीपुल्स वार ग्रुप के प्रतिनिधि के रूप में सरकार के सामने उपस्थित हुआ था।
एनआईए के अनुसार, रवि की आंध्र-ओडिशा सीमा के घने जंगलों पर मजबूत पकड़ थी और वह कई वर्षों से सुरक्षा बलों को चकमा देता रहा था।

रवि पर लगे प्रमुख आरोप

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रवि ने कई घातक और संगठित माओवादी हमलों का नेतृत्व किया था:

  • 2012 में ओडिशा के मलकानगिरी जिले में बीएसएफ के चार जवानों की हत्या में उसका नाम सामने आया था।
  • वह बालीमेला जलाशय हमला का मुख्य योजनाकार भी माना जाता है, जिसमें 2008 में 38 ग्रेहाउंड्स जवानों की मौत हुई थी।

अरुणा की भूमिका

अरुणा, जो इस मुठभेड़ में मारी गई, माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति की सदस्य थीं और संगठन में महिलाओं की गतिविधियों की मुख्य संचालक मानी जाती थीं।
उनका संबंध पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य चलपति से था, जिनकी पहले ही मौत हो चुकी है।

आगे क्या?

मुठभेड़ के बाद पुलिस का तलाशी अभियान जारी है, क्योंकि खुफिया रिपोर्ट्स से संकेत मिले हैं कि इलाके में कई अन्य माओवादी भी छिपे हुए हो सकते हैं।
ग्रेहाउंड्स और अन्य बल मारेडुमिली के जंगलों में लगातार अभियान चला रहे हैं।

निष्कर्ष

इस मुठभेड़ को माओवादी विरोधी अभियानों में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
गजरला रवि जैसे शीर्ष नेता की मौत से संगठन की रणनीतिक और सैन्य क्षमताओं को बड़ा नुकसान हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे माओवादियों के हौसले पस्त होंगे और आंध्र-ओडिशा सीमा पर माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ेगा।

सरकार और सुरक्षा बलों का अगला कदम इस मौके का फायदा उठाकर बाकी माओवादियों को पकड़ना और उनके ठिकानों को ध्वस्त करना होगा।


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