प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल ‘चिनाब ब्रिज’ का उद्घाटन किया। ये पुल न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए इंजीनियरिंग का एक बड़ा चमत्कार है। इस ऐतिहासिक पुल के निर्माण में जिन लोगों का अहम योगदान रहा, उनमें से एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है – माधवी लता।
कौन हैं माधवी लता?

माधवी लता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु में सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर हैं। वह रॉक इंजीनियरिंग की विशेषज्ञ हैं और पिछले 17 साल से चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट से जुड़ी रही हैं। उन्होंने ब्रिज बनाने वाली कंपनी अफकॉन्स के साथ मिलकर प्रोजेक्ट एडवाइजर के तौर पर काम किया।

प्रोजेक्ट की शुरुआत में उनके साथ एक और इंजीनियर थे, लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने प्रोजेक्ट छोड़ दिया। माधवी लता ने अकेले इस काम को आगे बढ़ाया और साल 2022 तक जब तक ब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हुआ, तब तक जुड़ी रहीं।
क्या है चिनाब ब्रिज की खासियत?

चिनाब ब्रिज को 1,486 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।
यह पुल 359 मीटर ऊंचा है, जो इसे एफिल टॉवर से भी ऊंचा बनाता है।
यह कटरा और काजीगुंड के बीच बना है और दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है।
यह पुल भूकंप, तेज हवाएं (266 किमी/घंटा तक) और -20°C तापमान भी सह सकता है।
इस पुल की उम्र 120 साल से ज्यादा मानी जा रही है।
क्यों खास हैं माधवी लता?

माधवी लता ने ना सिर्फ इंजीनियरिंग की बारीकियों को समझा, बल्कि पहाड़ियों पर पुल की नींव को मजबूती से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। उनका धैर्य, मेहनत और तकनीकी समझ इस पुल के निर्माण की रीढ़ साबित हुई।
















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