फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को एक बार फिर फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। इस बार उनका बुत ही पेरिस म्यूजियम से लापता हो गया है। मैक्रों के इस पुतले को राजधानी के ग्रेविन म्यूजियम से चोरी कर लिया गया। माना जा रहा है कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रीनपीस संगठन के सदस्यों ने इसे चुराया था।
इससे सवाल उठा है कि आखिर इतनी सुरक्षा के बीच राष्ट्रपति का स्टैच्यू चोरी कैसे हो गया। रूस के दूतावास के बाहर इस ग्रीनपीस के प्रदर्शनकारियों ने इस पुतले का इस्तेमाल किया। ग्रीनपीस वर्कर सवाल उठा रहे हैं यूक्रेन में कत्लेआम के बावजूद फ्रांस रूस के साथ अपने आर्थिक संबंधों को क्यों जारी रखे हुए हैं।

बताया जा रहा है कि मैक्रों का पुतला चुराने के लिए ग्रीनपीस कार्यकर्ता पर्यटक बनकर म्यूजियम में घुसे। फिर उन्होंने संग्रहालय के अंदर जाकर कपड़े बदले और मजदूरों की पोशाक में पहन ली। फिर पुतले को कपड़े में लपेटा और इमरजेंसी गेट से बाहर निकल गए। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को ये बताया कि वो मरम्मत के लिए कुछ सामान बाहर ले जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के पुतले की कीमत करोड़ों रुपये में बताई जाती है।

जब राष्ट्रपति का पुतला संग्रहालय से गायब होने की जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया दूतावास के बाहर उसे पाया गया।ग्रीनपीस एक्टिविस्ट ने वादा किया कि ये मूर्ति बिना किसी नुकसान के संग्रहालय को वापस कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने कपड़े से ढंकी गई स्टैच्यू को दिव्यांगों के लिए लिफ्ट बताया। मजदूरों की पोशाक के कारण सिक्योरिटी गार्ड को कोई शक नहीं हुआ।
फ्रांस अभी भी रूस से तेल-गैस और बिजली के साथ खाद खरीद रहा है. फ्रांस और रूस में परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा है। इसको लेकर फ्रांस की जनता में गुस्सा है। प्रदर्शनकारियों ने मैक्रों के पुतले के सिर पर रूस का झंडा फहराया. मानवाधिकार हनन को दबाकर व्यापार करने को लेकर फ्रांस सरकार को घेरा।
ग्रीनपीस का कहना है कि फ्रांस दोहरा खेल खेल रहा है। राष्ट्रपति एक ओर तो यूक्रेन का समर्थन करते हैं लेकिन दूसरी ओर फ्रांस और रूसी कंपनियों के बीच कारोबार भी बढ़ा रहे हैं। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला बोला था। फ्रांस ने उसका खुले तौर पर समर्थन किया है।
















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