अगर आपकी हर सुबह की शुरुआत अलार्म की तेज आवाज से होती है, तो ये आदत आपके लिए धीरे-धीरे नुकसानदायक साबित हो सकती है। हम में से कई लोग समय पर उठने के लिए अलार्म का सहारा लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका सेहत के लिए अच्छा नहीं है। अलार्म हमारी नींद के नेचुरल साइकल को तोड़ता है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है, तनाव बढ़ता है और दिनभर थकान महसूस होती है। यही नहीं, लंबे समय तक ऐसा करने से हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और मानसिक तनाव जैसी गंभीर दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि समय पर सोने की आदत डालें ताकि सुबह खुद-ब-खुद नींद खुल सके बिना अलार्म के।

अलार्म की तेज आवाज बढ़ा सकती है तनाव
अलार्म की तेज आवाज हमारी नींद को अचानक तोड़ देती है, जिससे शरीर एकदम से “फाइट और फ्लाइट मोड” में चला जाता है, यानी जैसे कोई खतरा सामने आ गया हो। इस वजह से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन जैसे एड्रिनलिन और कॉर्टिसोल तेजी से निकलते हैं। इससे न सिर्फ शरीर पर असर पड़ता है बल्कि कई बार झटका जैसा महसूस भी हो सकता है। लगातार अलार्म से उठने की आदत से नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है और जब स्लीप साइकिल बिगड़ती है, तो मानसिक सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे व्यक्ति को बेचैनी या डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अलार्म के भरोसे उठने की बजाय, समय पर सोने और खुद-ब-खुद जागने की आदत डालना ज्यादा फायदेमंद है।

अलार्म से उठने पर बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर, रिसर्च में हुआ खुलासा
जो लोग अलार्म की तेज आवाज से सुबह उठते हैं, उनमें अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है। जब कोई व्यक्ति अलार्म बजने पर जागता है, तो ब्रेन एक्टिविटी अचानक तेज हो जाती है, जिससे शरीर में मॉर्निंग हाइपरटेंशन यानी सुबह-सुबह हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति पैदा हो सकती है। इस शोध में पाया गया कि ऐसा असर 74% लोगों में देखा गया जो रोज अलार्म से उठते हैं। इसके विपरीत, जो लोग नैचुरल तरीके से यानी बिना अलार्म के उठते हैं, उनका ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर पाया गया। यह दिखाता है कि नेचुरल वे में जागना शरीर के लिए ज्यादा सेहतमंद होता है।

अलार्म से उठना दिल के लिए बन सकता है खतरा, बढ़ सकता है हार्ट अटैक का रिस्क
सुबह तेज अलार्म की आवाज केवल नींद नहीं तोड़ती, बल्कि दिल पर सीधा असर डाल सकती है। जब कोई व्यक्ति अलार्म की आवाज से चौंककर उठता है, तो उस वक्त ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है, जिसे मॉर्निंग हाइपरटेंशन कहा जाता है। यह स्थिति हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है। खासकर जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी है, उनके लिए यह खतरा और भी ज्यादा हो जाता है। इसके अलावा, जो लोग रोज़ाना 7 घंटे से कम सोते हैं और सुबह अलार्म से उठते हैं, उनकी हृदय से जुड़ी सेहत (कार्डियोवेस्कुलर हेल्थ) भी कमजोर हो सकती है। इसलिए हेल्दी दिल के लिए जरूरी है कि नींद पूरी लें और स्वाभाविक रूप से जागने की कोशिश करें।

अलार्म से उठने का असर मूड पर भी पड़ता है, दिनभर रह सकते हैं चिड़चिड़े
नींद का हमारे इमोशंस यानी भावनाओं से गहरा रिश्ता होता है, और हमारा मूड दिमाग से ही कंट्रोल होता है। जब अलार्म की तेज आवाज से नींद अचानक टूटती है, तो दिमाग को झटका लगता है और उसकी सेहत पर असर पड़ता है। इसका सीधा असर हमारे मूड पर भी होता है। ऐसे में इंसान सुबह उठते ही चिड़चिड़ा, गुस्सैल और चुपचाप हो सकता है। कई बार तो लोग उठते ही घरवालों या साथियों से ठीक से बात नहीं करते। जब दिन की शुरुआत इस तरह होती है, तो पूरा दिन भी खराब मूड में गुजर सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि नींद पूरी करें और नेचुरल वे में उठने की आदत डालें, ताकि दिन की शुरुआत सुकून से हो।

अलार्म से उठने की आदत को ऐसे बदलें
अगर आप हर दिन अलार्म बजने पर चौंककर उठते हैं तो अब समय है इस आदत को बदलने का। सबसे पहला कदम है, अलार्म पर निर्भर रहना छोड़िए। इसके बजाय रोज़ एक नियमित समय पर सोने और उठने की आदत डालिए। जब आप हर दिन एक जैसे समय पर सोते और जागते हैं, तो आपकी बॉडी की इंटरनल क्लॉक यानी शरीर की घड़ी खुद-ब-खुद सेट हो जाती है। इसके अलावा, कोशिश करें कि जिस कमरे में आप सोते हैं, वहां सुबह की नेचुरल रोशनी जरूर आए। सूरज की रोशनी से शरीर में नींद का हार्मोन मेलाटॉनिन धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे आप बिना अलार्म के भी समय पर उठ सकते हैं। यह तरीका न सिर्फ आपकी नींद को बेहतर बनाएगा, बल्कि पूरा दिन भी तरोताजा महसूस होगा।
















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